आरजीपीवी पेपर गायब होने के मामले में बड़ा मोड़! पूर्व परीक्षा प्रभारी का आरोप— मुझे हटाने के लिए रची साजिश

भोपाल के आरजीपीवी (RGPV) में बीटेक के 9 सीलबंद प्रश्नपत्र चोरी होने के मामले की जांच जारी है। सीसीटीवी न होने से पुलिस और आंतरिक समिति की जांच उलझी।

Jul 15, 2026 - 10:04
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आरजीपीवी पेपर गायब होने के मामले में बड़ा मोड़! पूर्व परीक्षा प्रभारी का आरोप— मुझे हटाने के लिए रची साजिश

भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में बीटेक चतुर्थ सेमेस्टर के नौ सीलबंद प्रश्नपत्रों के लिफाफे चोरी होने के सनसनीखेज मामले की जांच कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। वर्तमान में भोपाल की गांधी नगर थाना पुलिस और विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति समानांतर रूप से मामले की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो चोरी करने वाले शातिर का पता चल सका है और न ही गायब हुए प्रश्नपत्रों का कोई सुराग हाथ लगा है।

🕵️ अंदरूनी मिलीभगत की आशंका गहराई: सीसीटीवी में नहीं दिखा कोई बाहरी व्यक्ति, टूटी दीवार और कॉल लोकेशन की जांच जारी

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के दौरान कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे विश्वविद्यालय के भीतर ही किसी अंदरूनी मिलीभगत की आशंका और ज्यादा गहरा गई है। गांधी नगर पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में लगे तमाम सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने पर कोई भी बाहरी संदिग्ध व्यक्ति अंदर प्रवेश करता हुआ दिखाई नहीं दिया है। ऐसे में यह प्रबल आशंका जताई जा रही है कि प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय के भीतर से ही किसी जानकार द्वारा गायब किए गए हैं। हालांकि, पुलिस ने इस संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया है कि विश्वविद्यालय के पिछले हिस्से की टूटी हुई दीवार का फायदा उठाकर कोई शातिर चोर अंदर दाखिल हुआ हो। फिलहाल परीक्षा शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों से लगातार पूछताछ जारी है। पुलिस तकनीकी रूप से यह भी पता लगा रही है कि घटना के समय किन-किन लोगों के मोबाइल चालू थे और उनकी लोकेशन कहां थी। जिन विषयों के प्रश्नपत्र चोरी हुए हैं, उन संबंधित परीक्षार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

🔒 सुरक्षा में भारी चूक: जिस रूम में रखे थे गोपनीय प्रश्नपत्र वहां नहीं थे सीसीटीवी, गार्ड के बयान पर उठे सवाल

पुलिस जांच में जो सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है, वह यह है कि जिस कक्ष में विश्वविद्यालय के गोपनीय और संवेदनशील प्रश्नपत्रों के लिफाफे रखे गए थे, वहां सुरक्षा के लिहाज से कोई सीसीटीवी कैमरा ही स्थापित नहीं किया गया था। इस भारी चूक के कारण अब यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है कि घटना वाले समय में उस प्रतिबंधित कमरे में किसने प्रवेश किया और कौन बाहर निकला। इसके साथ ही, पुलिस ने मौके पर तैनात सुरक्षा गार्ड के बयानों पर भी गहरे संदेह व्यक्त किए हैं। पूछताछ में सुरक्षा गार्ड ने एक ही समय पर तीन अलग-अलग स्थानों पर अपनी ड्यूटी होने का दावा किया है, जिसकी जमीनी सत्यता और तार्किकता की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

⚖️ पूर्व परीक्षा प्रभारी का बड़ा आरोप: 'पद से हटाने के लिए रची गई साजिश', पुलिस को सौंपी संदिग्धों की सूची

विश्वविद्यालय की तत्कालीन परीक्षा प्रभारी डॉ. अर्चना तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर आरजीपीवी प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था में घोर लापरवाही बरतने का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मामले को नया मोड़ देते हुए अपने स्तर पर घटना के समय की मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल (CDR) की जांच कराने के लिए पुलिस को कुछ संदिग्धों की एक सूची भी सौंपी है। उन्होंने गंभीर आशंका व्यक्त की है कि विश्वविद्यालय के ही कुछ बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरी आपराधिक साजिश रची गई है। उनका सीधा आरोप है कि कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार उनके पास होने से विश्वविद्यालय के कुछ लोग उनसे लंबे समय से असंतुष्ट चल रहे थे और उन्हें परीक्षा नियंत्रक के पद से जबरन हटाने के उद्देश्य से ही इस सुनियोजित घटना को अंजाम दिया गया है।

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