उज्जैन में विराजे 22 फीट के 'हरिद्रा गणेश', 3.5 क्विंटल खड़ी हल्दी से तैयार हुए महाकाल वन के युवराज
उज्जैन के महाकाल अवंतिका द्वार पर इस बार 22 फीट ऊंचे 'हरिद्रा गणेश' विराजे हैं। 3.5 क्विंटल खड़ी हल्दी से बनी यह प्रतिमा इको-फ्रेंडली है और आकर्षण का केंद्र बनी है।
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन के अवंतिका द्वार पर इस बार गणेश उत्सव का नजारा अद्भुत और अलौकिक है। राजा महाकाल के पावन द्वार पर उनके युवराज 22 फीट ऊंची 'हरिद्रा गणेश' (हल्दी से निर्मित) की भव्य प्रतिमा के रूप में विराजेंगे। महाकाल मंदिर का अवंतिका द्वार, जिसे अब महाकालेश्वर इंटरनेशनल चौराहे के नाम से जाना जाता है, यह पूरा क्षेत्र महाकाल वन के अंतर्गत आता है।
यहां स्थापित की गई भगवान गणेश की इस विशालकाय प्रतिमा को तैयार करने में करीब 3.5 क्विंटल खड़ी हल्दी का इस्तेमाल किया गया है। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भगवान का आगमन हुआ है और अगले 10 दिनों तक यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ेगा।
🪔 मोर पंख, सुपारी व लौंग-इलायची के बाद अब हल्दी से बने गणेश, 3 महीने में बनकर हुई तैयार
आयोजनकर्ता ऋषभ बाबू यादव ने बताया, "यह सिर्फ एक गणेश प्रतिमा नहीं है, बल्कि उज्जैन की उस गौरवशाली परंपरा का नया अध्याय है, जिसमें हर साल भगवान गणेश को किसी अनूठी सामग्री और नए कॉन्सेप्ट के साथ आकार दिया जाता है। मोर पंख से लेकर सुपारी और लौंग-इलायची के सफल प्रयोग के बाद अब शुद्ध हल्दी से हरिद्रा गणेश तैयार किए गए हैं। इस अनूठे प्रयोग के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है। इस प्रतिमा को तैयार करने का कार्य लगभग 3 महीने पहले ही इंदौर में शुरू कर दिया गया था।"
🎨 कोलकाता के 12 कारीगरों और इंदौर की श्रुति आर्ट्स टीम ने मिलकर दिखाया कमाल
ऋषभ बाबू यादव के अनुसार, कोलकाता से बुलाए गए 12 विशेष बंगाली कारीगरों ने दिन-रात मेहनत करके इस 22 फीट ऊंची प्रतिमा को इको-फ्रेंडली आकार दिया है। वहीं, प्रतिमा के डेकोरेशन और पूरे कॉन्सेप्ट को अंतिम रूप देने में इंदौर की प्रसिद्ध 'श्रुति आर्ट्स' टीम का विशेष सहयोग लिया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हर साल की तरह इस बार भी धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है।
👑 55 वर्षों से चली आ रही है परंपरा, 20 सालों से 'महाकाल वन के युवराज' के रूप में मिल रही भव्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल को राजा और भगवान गणेश को युवराज स्वरूप में देखने की प्राचीन परंपरा है। इसी भाव को आगे बढ़ाते हुए महाकाल वन क्षेत्र में भगवान गणेश को 'महाकाल वन के युवराज' के नाम से स्थापित किया जाता है।
समिति सदस्य आकाश वर्मा ने बताया कि महाकाल अवंतिका द्वार पर गणेश उत्सव की परंपरा बीते 55 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। पिछले 20 सालों से 'महाकाल वन के युवराज' के इस आयोजन ने बेहद भव्य और व्यापक रूप ले लिया है।
📜 वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है आयोजन का नाम, हर साल बदला जाता है प्रतिमा का स्वरूप
'महाकाल वन के युवराज' की सबसे खास पहचान हर साल किया जाने वाला नया और अनूठा प्रयोग है। आकाश वर्मा ने बताया कि पिछले वर्षों में निर्मित प्रतिमाओं का नाम 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज हो चुका है:
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साल 2023: मिट्टी से निर्मित प्रतिमा को 9,000 असली मयूर पंखों से सजाया गया था।
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साल 2024: 1.25 लाख (सवा लाख) साबुत सुपारी से 21 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की गई थी।
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साल 2025: मिट्टी और औषधीय लौंग-इलायची से भव्य प्रतिमा का निर्माण किया गया था।
🏆 सुपारी से बनी प्रतिमा को 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन' से मिला सम्मान
इस आयोजन की ख्याति वर्ष 2024 में देश-विदेश तक पहुंची थी, जब सवा लाख सुपारी से निर्मित 21 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा बनाई गई थी। इस अद्भुत कलाकृति के लिए 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' की ओर से 17 सितंबर 2024 को आधिकारिक सर्टिफिकेट देकर समिति को सम्मानित किया गया था। इसके अलावा 'वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया' ने भी इसे "Largest Lord Shree Ganpati Idol Made From Betel Nuts" के रूप में 11 सितंबर 2024 को सम्मानित किया था।
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