धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; मुस्लिम पक्ष ने किया स्वागत, ऐतिहासिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाने के निर्देश

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का मुस्लिम पक्ष ने स्वागत किया है। जानें कोर्ट के मुख्य निर्देश, दोनों पक्षों के दावे और भोजशाला का पूरा इतिहास।

Jul 15, 2026 - 14:03
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धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; मुस्लिम पक्ष ने किया स्वागत, ऐतिहासिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाने के निर्देश

धार। मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अंतरिम आदेश के बाद मुस्लिम पक्ष की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे अपने पक्ष के लिए एक बड़ी अंतरिम राहत बताया है। गौरतलब है कि इंदौर हाईकोर्ट के पिछले आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। जुल्फिकार पठान के अनुसार, उनके वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष मुस्लिम पक्ष की दलीलों को बेहद मजबूती और साक्ष्यों के साथ रखा।

📜 कोर्ट के मुख्य निर्देश और दावे: परिसर के बाहर होगी जुम्मे की नमाज, ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान न पहुंचाने की शर्त

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक शुक्रवार को परिसर के बाहर जुम्मे की नमाज की व्यवस्था को पूर्ववत (पहले की तरह) अनिवार्य रूप से जारी रखा जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि भोजशाला परिसर के भीतर ऐसी कोई भी नई गतिविधि नहीं होनी चाहिए, जिससे उसके मूल स्वरूप या ऐतिहासिक ढांचे को किसी भी प्रकार का भौतिक नुकसान पहुंचे। इस आदेश के बाद कमेटी के सदर जुल्फिकार पठान ने दावा किया कि कमाल मौला मस्जिद में पिछले लगभग 800 वर्षों से नियमित रूप से नमाज अदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और मस्जिद के स्वरूप के संरक्षण के लिए मुस्लिम समाज ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दूसरी ओर, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे में भोजशाला से प्राचीन सनातन मूर्तियां मिली थीं और कोर्ट ने भी भोजशाला को मंदिर माना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए परिसर के बाहर जो जगह की व्यवस्था करने की बात कही है, हम उस न्यायिक फैसले का सहर्ष स्वागत करते हैं।

🤝 आगे की रणनीति और समाज का निर्णय: नमाज की व्यवस्था को लेकर मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी जल्द करेंगे बैठक

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार परिसर के बाहर खुले स्थान पर जुम्मे की नमाज अदा करने की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर जुल्फिकार पठान ने कहा कि इस संबंध में मुस्लिम समाज के वरिष्ठजन, धर्मगुरु और बुद्धिजीवी जल्द ही एक विशेष बैठक आयोजित करेंगे। इस बैठक में सभी कानूनी पहलुओं और व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा करने के बाद ही समाज की ओर से कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजरें मुस्लिम समाज के अगले कदम और मामले की आगामी नियमित कानूनी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

⏳ धार भोजशाला का पूरा इतिहास: 11वीं सदी के राजा भोज काल से लेकर साल 2022 की याचिका और 98 दिनों के ASI सर्वे तक की इनसाइड स्टोरी

धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का गौरवशाली और विवादित इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है:

  • राजा भोज काल (1034 ईस्वी): धार में परमार वंश के मशहूर और प्रतापी शासक राजा भोज ने साल 1034 में शिक्षा, संस्कृत और संस्कृति का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए 'सरस्वती सदन' की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला कहा गया। राजा भोज ने धार पर 1000 से 1055 ईस्वी तक शासन किया था। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि साल 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने इस भव्य भोजशाला को तोड़कर उसे नुकसान पहुंचाया था।

  • धार दरबार का नोटिफिकेशन (1935): 24 अगस्त 1935 को तत्कालीन धार दरबार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि भोजशाला मस्जिद है और यहां मुस्लिम समाज नमाज पढ़ता रहेगा।

  • विवाद की शुरुआत (1990-1997): साल 1990 के दशक में भोजशाला को लेकर दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ। साल 1995 के बाद यह विवाद और उग्र हो गया। 1997 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा भोजशाला पर झंडा फहराने के ऐलान के बाद, 12 मई 1997 को स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भोजशाला में आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। तब प्रशासन ने एक मध्यमार्ग निकालते हुए हिंदुओं को बसंत पंचमी पर पूजा और मुसलमानों को प्रत्येक शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी।

  • साल 2022 की याचिका और ASI सर्वे: धार भोजशाला का यह कानूनी विवाद साल 2022 में नए सिरे से तब उठा, जब 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की ओर से 2 मई 2022 को इंदौर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई। हिंदू पक्ष का अटूट दावा था कि धार भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी (सरस्वती) का पवित्र मंदिर है। इस पर हाई कोर्ट ने भोजशाला की वास्तविक वैज्ञानिक स्थिति की जांच के लिए निर्देश जारी किए थे। जिसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने आधुनिक तकनीकों की मदद से 98 दिनों तक परिसर के अंदर और बाहर सघन सर्वे किया था। एएसआई ने सर्वे के दौरान मिले नक्काशीदार पत्थरों, प्राचीन स्तंभों और खुदाई में मिलीं मूर्तियों की जांच के आधार पर तैयार की गई 2,100 पन्नों की विशाल रिपोर्ट इंदौर हाईकोर्ट में पेश की थी, जिसके बाद वर्तमान कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

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