ठीक 24 साल बाद कोर्ट का फैसला, रिश्वत लेते पकड़े गए थे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के यंत्री
इंदौर में 24 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल को 5 साल की सजा और 25 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया गया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में विशेष अदालत ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पूर्व कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल को दोषी करार देते हुए 5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले की सबसे खास और रोचक बात यह है कि परवाल के खिलाफ ठीक 24 साल पहले 8 सितंबर 2002 को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था, और संयोगवश ठीक 24 साल बाद 8 सितंबर 2026 को ही अदालत ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया है।
💰 34 लाख की वैध आय पर मिली एक करोड़ से अधिक की संपत्ति, 2002 में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़े गए थे अधिकारी
लोकायुक्त संगठन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल को 6 सितंबर 2002 को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया था। इस कार्रवाई के बाद लोकायुक्त टीम ने उनकी चल-अचल संपत्ति की व्यापक जांच की, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि नौकरी के दौरान उनकी कुल वैध आय करीब 34.64 लाख रुपये थी, जबकि उनके पास इससे कई गुना अधिक यानी एक करोड़ रुपये से ज्यादा की अकूत संपत्ति पाई गई थी। लंबे समय तक चली अदालती प्रक्रिया के बाद आखिरकार भ्रष्टाचार के इस मामले में अदालत ने सजा का यह बड़ा आदेश सुनाया है।
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