पृथक 'भील प्रदेश' के लिए आदिवासियों की बड़ी हुंकार; शिवपुरी से ठाणे और बाड़मेर तक का प्रस्तावित नक्शा जारी
एमपी, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में 'भील प्रदेश' बनाने की मांग तेज। आदिवासी संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर नया नक्शा जारी किया।
भोपाल। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल जिलों में एक बार फिर से पृथक 'भील प्रदेश' बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। 15 जुलाई 2026 को इन चारों राज्यों के सभी ब्लॉक और जिला मुख्यालयों पर विभिन्न आदिवासी संगठनों और भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) ने 'भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा' के संयुक्त बैनर तले विशाल रैलियां निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। पृथक भील प्रदेश की इस ऐतिहासिक मांग के समर्थन में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने इस नए राज्य का प्रस्तावित नक्शा भी सार्वजनिक किया है। इस जारी नक्शे में मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली के आदिवासी बहुल जिलों को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में न केवल नए राज्य के गठन, बल्कि प्रमुख बांध परियोजनाओं, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और बांसवाड़ा में जारी गोल्ड माइनिंग (सोने के खनन) को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं।
🚝 ठाणे से बाड़मेर और शिवपुरी तक: भील प्रदेश के प्रस्तावित नक्शे में दादरा-नगर हवेली भी शामिल, विस्थापितों के लिए नौकरी की मांग
विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के बैनर तले दिए गए ज्ञापन में राष्ट्रपति से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 (Article 3) के तहत शक्तियों का प्रयोग कर नए 'भील प्रदेश' के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। इस प्रस्तावित भील प्रदेश के भौगोलिक नक्शे में महाराष्ट्र के ठाणे से लेकर राजस्थान के बाड़मेर और मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले तक के आदिवासी क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, ज्ञापन में आदिवासियों के आर्थिक और सामाजिक हितों का मुद्दा उठाते हुए मांग की गई है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और बड़ी जल व बांध परियोजनाओं के कारण जिन आदिवासी परिवारों की पुश्तैनी जमीनें अधिग्रहित की गई हैं, उन्हें सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से शासकीय नौकरियां प्रदान की जाएं।
🌊 जल, जंगल और जमीन पर अधिकार: नर्मदा, ताप्ती, चंबल और माही के पानी के इस्तेमाल और सोने के खनन पर रोक की मांग
आदिवासी नेताओं ने प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के हक की वकालत करते हुए ज्ञापन में मांग की है कि नर्मदा, ताप्ती, चंबल और माही जैसी प्रमुख नदियों के जल का उपयोग भील प्रदेश के नागरिकों के व्यापक हित और सिंचाई के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में खोजी गई सोने की खदानों में चल रहे खनन कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग भी राष्ट्रपति से की गई है। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के प्रदेश संयोजक दिनेश माल ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया, "पृथक भील प्रदेश की मांग हमारी पीढ़ियों पुरानी और न्यायसंगत मांग है। संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत आदिवासी हितों, वनों की सुरक्षा और हमारे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए इस अलग राज्य का निर्माण होना अत्यंत आवश्यक है।"
उन्होंने आगे कहा, "भील प्रदेश का यह प्रस्तावित नक्शा पूर्ण रूप से आदिवासियों की ऐतिहासिक संस्कृति, परंपरा और बोली के भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस पूरे क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जल स्रोत, घने जंगल और अमूल्य खनिज संपदा उपलब्ध है, जिस पर पहला और वास्तविक अधिकार केवल यहां के मूल निवासी आदिवासियों का है।" गौरतलब है कि पृथक भील प्रदेश की मांग समय-समय पर उठती रही है। हाल ही में भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा और लोकसभा में भी इस मुद्दे को प्रखरता से उठाया था, जिसके बाद आज 15 जुलाई को चारों राज्यों में ब्लॉक स्तर पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया गया।
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