पैट्रियट एयर डिफेंस को चकमा देकर अमेरिकी बेस पर बरसीं ईरानी मिसाइलें, IRGC का बड़ा दावा

ईरान ने अपनी अचूक 'खैबरशिकन' बैलिस्टिक मिसाइल से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया है। जानिए इस हाइपरसोनिक मिसाइल की मारक क्षमता।

Jul 16, 2026 - 17:39
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पैट्रियट एयर डिफेंस को चकमा देकर अमेरिकी बेस पर बरसीं ईरानी मिसाइलें, IRGC का बड़ा दावा

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण युद्ध और रणनीतिक संघर्ष के बीच ईरान ने अपनी अब तक की सबसे आधुनिक, घातक और अचूक मानी जाने वाली ‘खैबरशिकन’ (Kheibar Shekan) बैलिस्टिक मिसाइल से दुश्मन के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दावों के मुताबिक, हालिया संघर्ष के दौरान खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए इस मिसाइल की जबरदस्त बौछार की गई है.

IRGC ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि अमेरिकी हमलों के करारे जवाब में ‘ऑपरेशन नसर-2’ की आठवीं लहर के तहत ‘या जैनब कुबरा (स)’ के गुप्त कोड नाम से दो अलग-अलग चरणों में इस मिसाइल हमले को अंजाम दिया गया. इस रणनीतिक कार्रवाई के दौरान जॉर्डन के अल-अजरक में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर लड़ाकू विमानों के रखरखाव रैंप (Maintenance Ramps) और अमेरिका के नवनिर्मित संवेदनशील कमांड एवं कंट्रोल सेंटर को ‘खैबरशिकन’ बैलिस्टिक मिसाइलों से सीधे निशाना बनाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया.

🔥 कितनी घातक है 'खैबरशिकन' मिसाइल?: मैक 12 की तूफानी रफ्तार और पैट्रियट को चकमा देने की अचूक ताकत

इस मिसाइल का नाम इतिहास के प्रसिद्ध ‘खैबर युद्ध’ से प्रेरित है, जिसका अरबी भाषा में शाब्दिक अर्थ होता है— ‘खैबर के किले को ढहाने वाला’. खैबरशिकन को ईरान की तीसरी पीढ़ी की सबसे उन्नत मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) माना जाता है. आइए इसकी तकनीकी और विनाशकारी सैन्य ताकत पर एक नजर डालते हैं:

  • अचूक मारक क्षमता (Range): यह मिसाइल लगभग 1,450 किलोमीटर (900 मील) की दूरी तक पिन-पॉइंट सटीकता के साथ मार कर सकती है. इसकी जद में पूरा इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिका के तमाम सैन्य ठिकाने सीधे तौर पर आते हैं.

  • सॉलिड फ्यूल तकनीक (Solid Fuel Tech): खैबरशिकन में आधुनिक ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. इस वजह से मिसाइल को लॉन्च करने की तैयारियों में महज 15 मिनट से भी कम का समय लगता है और इसे आसानी से छिपाकर कहीं भी त्वरित गति से ले जाया जा सकता है.

  • मैक 12 की तूफानी रफ्तार (Hypersonic Speed): उड़ान के दौरान इसकी गति ध्वनि की रफ्तार से 12 गुना ज्यादा (लगभग 19,500 किमी/घंटा) तक पहुंच जाती है. इस अत्यधिक सुपरसोनिक/हाइपरसोनिक स्पीड के कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए इसे ट्रैक कर पाना असंभव हो जाता है.

  • हवा में रास्ता बदलने की क्षमता (Maneuverability): खैबरशिकन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका टर्मिनल फेज (अंतिम चरण) में लक्ष्य की ओर बढ़ते समय तेजी से अपनी दिशा बदलने (Maneuver) की क्षमता है. अपनी इसी चालाकी के चलते यह अमेरिका के विख्यात ‘पैट्रियट’ (Patriot) डिफेंस सिस्टम को भी हवा में चकमा दे देती है.

  • हल्की और अत्यंत विनाशकारी: कंपोजिट मैटेरियल (Composite Materials) से निर्मित होने के कारण इसका कुल वजन केवल 4.5 टन है, जो कि इस श्रेणी की अन्य पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद हल्का है. हल्का होने के बावजूद यह अपने साथ 550 किलोग्राम का विनाशकारी वारहेड (Warhead/बारूद) ले जाने में सक्षम है.

सामरिक चुनौती: खैबरशिकन मिसाइल की एक और बड़ी ताकत यह है कि इसे किसी भी सामान्य 10-चक्के वाले कमर्शियल ट्रक नुमा मोबाइल लॉन्चर पर आसानी से लोड करके दागा जा सकता है. ऐसे में सैटेलाइट या खुफिया टोही विमानों के जरिए इनके लॉन्चर को युद्ध क्षेत्र में ढूंढकर नष्ट करना अमेरिका और इजराइल जैसे आधुनिक देशों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

💣 ईरान के पास मिसाइलों का महा-जखीरा: आखिर अब तक दागे कितने रॉकेट और क्या है रणनीति?

ईरानी सेना (IRGC) ने इस अचूक मिसाइल का इस्तेमाल बेहद रणनीतिक और किश्तों में किया है ताकि दुश्मन को संभलने का मौका न मिले. इससे पहले ईरान ने इजराइल के खिलाफ किए गए अपने बड़े सैन्य अभियानों (जैसे अक्टूबर 2024 में दागी गई 181 बैलिस्टिक मिसाइलें) के दौरान खैबरशिकन का भारी मात्रा में उपयोग कर इजराइली एयर डिफेंस को भेदने में सफलता पाई थी.

हालिया संघर्ष के दौरान भी ईरान ने अमेरिकी और इजराइली रक्षा प्रणालियों को थकाने के लिए लगातार मिसाइलों की नई लहरें (Waves) तैनात की हैं. IRGC के अनुसार, हाल ही में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ (Operation True Promise) की 22वीं लहर के तहत खैबरशिकन और आधुनिक 'फतह' (Fattah) मिसाइलों की बड़े पैमाने पर मास फायरिंग (Mass Firing) की गई है.

सैन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि इस संघर्ष की शुरुआत से पहले ईरान के पास लगभग 3,000 से 4,000 बैलिस्टिक मिसाइलों का एक विशाल और सुरक्षित जखीरा मौजूद था. मौजूदा युद्ध में ईरान अपने इसी विशाल स्टॉक से सैकड़ों की संख्या में अत्याधुनिक मिसाइलें दागकर अमेरिकी और इजराइली एयर डिफेंस प्रणालियों (जैसे आयरन डोम और पैट्रियट) को पूरी तरह थकाकर उन्हें निष्क्रिय करने की आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है.

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