नामांकन में संपत्ति और टैक्स की जानकारी छिपाना पड़ा भारी, इंदौर की कांग्रेस पार्षद की कुर्सी छिनी
इंदौर जिला कोर्ट ने वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनेहरा अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है। उन पर नामांकन में संपत्ति और टैक्स की जानकारी छिपाने का आरोप था।
इंदौर। शहर के वार्ड क्रमांक 60 की कांग्रेस पार्षद सुनेहरा अंसारी की पार्षद की कुर्सी छिन गई है. इंदौर जिला कोर्ट (District Court) ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कांग्रेस पार्षद सुनेहरा अंसारी का निर्वाचन पूरी तरह से शून्य (Disqualified) घोषित कर दिया है. उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे एक निर्दलीय प्रत्याशी ने उनके निर्वाचन और नामांकन प्रक्रिया की प्रामाणिकता को लेकर कोर्ट में कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करते हुए एक चुनाव याचिका दायर की थी. इंदौर की जिला अदालत में पिछले तीन सालों से चल रही इस याचिका की गहन सुनवाई के बाद पार्षद पर लगे सभी वित्तीय आरोप पूरी तरह सही पाए गए हैं.
अदालती कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को कोर्ट ने वार्ड क्रमांक 60 से चुनाव लड़ चुके निर्दलीय प्रत्याशी मुन्ना अंसारी की मुख्य याचिका पर अंतिम सुनवाई की. मुन्ना अंसारी ने निर्वाचित पार्षद सुनेहरा अंसारी पर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष झूठा हलफनामा देने और महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां छिपाने के सीधे आरोप लगाए थे.
याचिका में लगाए गए मुख्य वित्तीय आरोप:
मुन्ना अंसारी द्वारा अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्यों के साथ दाखिल याचिका में बताया गया था कि पार्षद सुनेहरा अंसारी ने जब निर्वाचन कार्यालय में अपना आधिकारिक नामांकन पत्र दाखिल किया, तो उन्होंने अपनी वास्तविक चल-अचल संपत्तियों के बारे में सही जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को नहीं दी थी. इसके साथ ही नामांकन दाखिल करने के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में उनकी कई व्यावसायिक संपत्तियां (कमर्शियल प्रॉपर्टीज) मौजूद थीं, जिनका जानबूझकर नामांकन फॉर्म के शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया गया था.
इसके अतिरिक्त याचिका में यह गंभीर कानूनी बिंदु भी उठाया गया था कि वार्ड क्रमांक 60 की पार्षद ने शहर में स्थित अपनी इन कीमती संपत्तियों का कई वर्षों का नगर निगम का प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) भी जमा नहीं किया था. तकरीबन 3 सालों से इंदौर की जिला कोर्ट इस हाई-प्रोफाइल मामले के हर पहलू पर बारीकी से सुनवाई कर रही थी.
इस मामले की अंतिम बहस के दौरान पूर्व प्रत्याशी मुन्ना अंसारी के वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा इंदौर की जिला कोर्ट में कई महत्वपूर्ण विधिक दस्तावेज और निगम के टैक्स डिफ़ॉल्ट के रिकॉर्ड तर्क के रूप में प्रस्तुत किए गए.
इस पूरे अदालती फैसले और विवाद की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए मामले से जुड़े एडवोकेट विजय शर्मा ने मीडिया को बताया:
| चुनाव और कानूनी केस टाइमलाइन | मुख्य तथ्य व प्रशासनिक विवरण |
| नगर निगम चुनाव की तारीख | 6 जुलाई 2022 |
| विवादित वार्ड और दल | वार्ड क्रमांक 60, कांग्रेस पार्टी (Congress) |
| याचिकाकर्ता प्रत्याशी | मुन्ना अंसारी (प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार) |
| फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश | माननीय न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा |
| अदालती आदेश का मुख्य आधार | नामांकन हलफनामे में कमर्शियल संपत्तियों व टैक्स की चोरी छिपाना |
एडवोकेट विजय शर्मा ने कहा, "6 जुलाई 2022 को इंदौर नगर निगम चुनाव के परिणाम में वार्ड क्रमांक 60 से सुनेहरा अंसारी को विजयी और निर्वाचित घोषित किया गया था. लेकिन उनके निकटतम प्रतिद्वंदी मुन्ना अंसारी ने इस जीत को कानूनी चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दायर कराई थी. इस याचिका में सप्रमाण बताया गया था कि कैसे निर्वाचित पार्षद ने नामांकन के दौरान अपनी करोड़ों की प्रॉपर्टी संबंधी जानकारियां छिपाई थीं, जो विधिक रूप से चुनाव में आम जनता और लोकतंत्र के साथ एक बड़ा धोखा है. वार्ड के जागरूक मतदाताओं ने बिना इस महत्वपूर्ण सत्य को जाने उन्हें अपना अमूल्य वोट दिया था, जिसे कोर्ट ने गंभीर कदाचार माना है. यही वजह है कि माननीय न्यायालय ने उनके पूरे निर्वाचन को ही अवैध और शून्य करार दे दिया है."
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