छाता चोरों को युवक का करारा जवाब! बाजार से नया खरीदने के बजाय पत्तों से तैयार किया वाटरप्रूफ छाता

मध्य प्रदेश के सिवनी में छाता चोरी होने पर युवक रघुवीर सैयाम ने सागौन के पत्तों से 'देशी जुगाड़' वाला अनोखा छाता बना दिया। बारिश से बचाने वाली यह पारंपरिक छतरी अब पूरे इलाके में आकर्षण का केंद्र है।

Jul 19, 2026 - 15:51
0
छाता चोरों को युवक का करारा जवाब! बाजार से नया खरीदने के बजाय पत्तों से तैयार किया वाटरप्रूफ छाता

सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से 'देशी जुगाड़' और आत्मनिर्भरता का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जो इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां एक युवक का छाता चोरी हो गया था, जिससे आहत होकर उसने बाजार से नया छाता खरीदने के बजाय प्रकृति का रुख किया. युवक ने सागौन के विशाल पत्तों का उपयोग करके एक बेहद सुंदर और मजबूत छतरी बना डाली. अब जब भी वह इस छतरी को लेकर सड़क पर निकलता है, तो यह अनोखी कलाकृति लोगों के बीच भारी आकर्षण का केंद्र बन जाती है.

आमतौर पर बारिश के मौसम में जब किसी का छाता चोरी या खराब होता है, तो लोग तुरंत बाजार से नई छतरियां खरीदने की सोचते हैं. इसके विपरीत, सिवनी के छपारा नगर के रहने वाले रघुवीर सैयाम ने प्रकृति से प्रेरणा लेकर एक पूर्णतः इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) और अनोखी छतरी तैयार कर ली. उनकी सागौन के पत्तों से बनी यह देसी छतरी स्थानीय लोगों को खूब पसंद आ रही है. सड़क पर चलने वाले राहगीर इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं.

स्थानीय जानकारी के अनुसार, छपारा नगर निवासी रघुवीर का पुराना छाता कुछ दिनों पहले अचानक चोरी हो गया था. महंगाई के इस दौर में बाजार से नया छाता खरीदने के बजाय रघुवीर ने अपने बचपन के दिनों को याद किया और पिता से सीखी पारंपरिक कला का इस्तेमाल करने की ठानी. भारी बारिश के बीच जब वे इस अनोखी और वाटरप्रूफ हरी-भरी छतरी के साथ पहली बार बाजार निकले, तो सड़क पर मौजूद हर शख्स की नजरें उनकी इस कलाकृति पर ठहर गईं.

इस अनोखे और प्राकृतिक आविष्कार के मुख्य बिंदु नीचे दी गई तालिका में संकलित किए गए हैं:

मुख्य विषय विवरण और वर्तमान स्थिति पर्यावरण पर प्रभाव
आविष्कारक (Innovator) रघुवीर सैयाम (निवासी: छपारा नगर, सिवनी) 100% प्राकृतिक और प्लास्टिक मुक्त.
उपयोग की गई सामग्री सागौन (Teak) के विशाल और मजबूत पत्ते शून्य लागत (Zero Cost) पर तैयार छतरी.
बनाने की प्रेरणा बचपन में पिता द्वारा जंगल में सीखी गई कला पारंपरिक ज्ञान और धरोहर का बेहतरीन उदाहरण.
वर्तमान स्थिति स्थानीय स्तर और सोशल मीडिया पर जमकर वायरल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील सोच की सराहना.

रघुवीर ने इस छतरी को बनाने के पीछे की कहानी और अपनी पारिवारिक परंपरा को साझा करते हुए बताया:

रघुवीर की यह देसी छतरी वर्तमान आधुनिक युग में न केवल बारिश से बचाव का एक सस्ता और टिकाऊ साधन बनी है, बल्कि यह प्रकृति और इंसान के पुराने, गहरे रिश्ते की भी एक जीवंत मिसाल पेश कर रही है. सिवनी के स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने रघुवीर के इस हुनर की मुक्तकंठ से सराहना की है और इसे प्लास्टिक के दौर में पर्यावरण के प्रति एक बेहद संवेदनशील और अनुकरणीय सोच बताया है.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User