'सरकार का फैसला मनमाना नहीं', हाई कोर्ट ने वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल भेजने की मांग पर सुनाया फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की उनकी पत्नी की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।

Jul 19, 2026 - 18:12
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'सरकार का फैसला मनमाना नहीं', हाई कोर्ट ने वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल भेजने की मांग पर सुनाया फैसला

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल से किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की उनकी पत्नी की अंतरिम मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि वांगचुक की नाजुक सेहत और मेडिकल इमरजेंसी को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय कहीं से भी मनमाना या गैर-कानूनी नहीं था. मामले की गंभीरता से सुनवाई कर रही जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की चौबीसों घंटे बारीकी से निगरानी कर रही है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उनके साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती की जा रही है.

⚖️ 1. सरकार को दखल देने का पूरा अधिकार: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा बयान

'बार एंड बेंच' की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात को रेखांकित किया कि सोनम वांगचुक ने अपनी बिगड़ती शारीरिक हालत के बावजूद खुद से स्वेच्छा से अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था. ऐसी गंभीर स्थिति में किसी नागरिक के जीवन की रक्षा के लिए सरकार को कानूनन दखल देने का पूरा अधिकार था.

इसके साथ ही, अदालत ने सरकार द्वारा पेश किए गए उन तथ्यों पर भी ध्यान दिया जिसमें बताया गया कि वांगचुक के परिवार को उनसे दिन भर बिना किसी रोक-टोक के मिलने की पूरी इजाजत दी गई है और अधिकारियों ने उनके परिजनों की सुविधा के लिए अस्पताल परिसर में एक अलग कमरा भी आवंटित किया है. अतः कोर्ट ने माना कि इस प्रारंभिक चरण में किसी भी तरह के अंतरिम निर्देश या अस्पताल बदलने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट नियमित रूप से परिवार के साथ साझा की जाए. मामले की अगली सुनवाई अब 24 जुलाई को तय की गई है.

🏥 2. क्या नागरिक अपनी पसंद के अस्पताल भी नहीं जा सकता? वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की तीखी दलील

इससे पहले, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से देश के दिग्गज और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और अखिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष पैरवी की. सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद से वांगचुक को उनके वकीलों और निजी डॉक्टरों से पर्याप्त रूप से संपर्क नहीं करने दिया जा रहा है. उन्होंने अदालत से कहा कि वे प्रशासन से ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे, वे केवल वांगचुक को बेहतर और स्वतंत्र इलाज के लिए गुरुग्राम स्थित मेदांता (Medanta) अस्पताल ले जाना चाहते हैं.

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट में सवाल उठाते हुए कहा, "सोनम वांगचुक को पुलिस ने किसी अपराध में हिरासत में नहीं रखा है और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज है. ऐसे में क्या भारत के एक स्वतंत्र नागरिक को बीमार होने पर अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की बुनियादी इजाजत भी नहीं है? सरकारी अधिकारी किस कानून के तहत यह दावा कर सकते हैं कि वे उनके शरीर पर कब्जा बनाए रखेंगे और उन्हें अपनी मर्जी से कहीं और जाने नहीं देंगे?"

📊 3. दिल्ली हाई कोर्ट वांगचुक मामला 2026: एक नजर में मुख्य विवरण

इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य कानूनी पक्षों और कोर्ट की टिप्पणियों का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में संकलित है:

विधिक बिंदु (Legal Points) याचिकाकर्ता (पत्नी) का पक्ष केंद्र सरकार (ASG) का पक्ष हाई कोर्ट का अंतिम निर्देश
अस्पताल स्थानांतरण सफदरजंग से हटाकर मेदांता (प्राइवेट) अस्पताल शिफ्ट किया जाए. एम्स और सफदरजंग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम इलाज कर रही है. प्राइवेट अस्पताल शिफ्ट करने की अंतरिम मांग को फिलहाल खारिज किया.
नागरिक अधिकार हिरासत में न होने के कारण अपनी पसंद के अस्पताल जाने का हक. कोर्ट के पिछले आदेश के तहत मेडिकल खर्च व जिम्मेदारी सरकार की है. स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पताल का फैसला मनमाना नहीं.
पारदर्शिता व संपर्क वकीलों और डॉक्टरों से संपर्क करने में बाधा आने का आरोप. परिवार को मिलने की पूरी छूट है और अलग रूम दिया गया है. वांगचुक की सभी मेडिकल रिपोर्ट परिवार के साथ साझा करने का निर्देश.
🧪 4. केंद्र सरकार की दलील: डॉक्टरों के साथ सहयोग करना होगा, इलाज में कोई कमी नहीं

केंद्र सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने याचिका का कड़ा विरोध किया. उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि कोर्ट द्वारा 16 जुलाई को जारी किए गए पिछले आदेश में यह साफ तौर पर कहा गया था कि वांगचुक के इलाज और चिकित्सा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सरकार ही करेगी. वर्तमान में सफदरजंग और एम्स (AIIMS) के शीर्ष विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल लगातार उनके उपचार में जुटा हुआ है और उन्हें क्रिटिकल केयर के तहत इमरजेंसी वार्ड में रखा गया है.

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