संस्कारधानी को मिलेंगी 100 ई-बसें, तंग रास्तों पर भी आसानी से सफर कर सकेंगे यात्री
जबलपुर में आगामी 15 दिनों में 'पीएम ई-बस सेवा' के तहत 20 इलेक्ट्रिक बसों की पहली खेप का संचालन शुरू हो जाएगा। सीसीटीवी और पैनिक बटन से लैस ये हाइटेक बसें प्रदूषण मुक्त सफर सुनिश्चित करेंगी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. आगामी 15 दिनों के भीतर शहर की सड़कों पर प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) का नियमित संचालन शुरू हो सकता है. जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (JCTSL) से मिली जानकारी के अनुसार, अगले 10 से 12 दिनों में 20 इलेक्ट्रिक बसों की पहली खेप शहर पहुंच जाएगी. ई-बसों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य भी अपने अंतिम चरण में है. शहर के कठौंदा क्षेत्र में मुख्य चार्जिंग स्टेशन बनाने का कार्य तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है.
विगत दिनों निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों का जमीनी निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए. बसों के जबलपुर पहुंचते ही सभी आवश्यक कागजी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर इनका नियमित व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया जाएगा. विदित हो कि केंद्र सरकार की 'पीएम ई-बस सेवा' योजना के अंतर्गत जबलपुर शहर को कुल 100 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से पहले चरण में 20 बसें शहर आ रही हैं.
इस नई बस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन बसों की लंबाई 9 मीटर रखी गई है. छोटे आकार की होने के कारण ये हाइटेक बसें शहर के उन संकरे और अत्यधिक व्यस्त रूटों पर भी आसानी से आवाजाही कर सकेंगी, जहां अब तक बड़ी मेट्रो बसों को चलाने में कठिनाई होती थी. जेसीटीएसएल के अधिकारियों के मुताबिक, ये नई इलेक्ट्रिक बसें शहर के अधिकांश प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को कवर करेंगी. यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक रूट पर हर 10 से 15 मिनट के अंतराल में बसों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. भविष्य में शहर की बढ़ती आबादी और मांग को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में और बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे डीजल वाहनों पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी.
यह नई इलेक्ट्रिक बस सेवा शहर के भीतर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ उपनगरीय और पर्यटन क्षेत्रों को भी आपस में जोड़ेगी. प्राथमिक रूप से निम्नलिखित प्रमुख रूटों को इस सेवा में शामिल किया गया है:
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मदर टेरेसा वार्ड से रांझी रूट
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अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) से भेड़ाघाट पर्यटन स्थल रूट
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मुख्य रेलवे स्टेशन से ग्वारीघाट/गौरीघाट रूट
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जबलपुर मुख्य स्टेशन से पाटन, बरगी डैम (Bargi Dam), शहपुरा और बरेला रूट
इस महत्वाकांक्षी सार्वजनिक परिवहन परियोजना के तकनीकी पहलुओं, चार्जिंग क्षमता और संचालन मापदंडों की विस्तृत रूपरेखा नीचे दी गई तालिका में संकलित की गई है:
| परियोजना के मुख्य मापदंड | आधिकारिक सांख्यिकी व डेटा | चार्जिंग स्टेशन एवं तकनीकी क्षमता |
| कुल आवंटित बसें | 100 इलेक्ट्रिक बसें (पीएम ई-बस सेवा) | कुल चार्जिंग स्टेशन: शहर में 3 स्थानों पर बनेंगे. |
| प्रथम चरण की खेप | 20 हाइटेक इलेक्ट्रिक बसें | कठौंदा स्टेशन क्षमता: 16 चार्जिंग पॉइंट्स तैयार. |
| यात्री उपलब्धता समय | हर 10 से 15 मिनट में प्रत्येक रूट पर | मल्टी-चार्जिंग: 1 पॉइंट से एक साथ 2 बसें होंगी चार्ज. |
| दैनिक परिचालन क्षमता | लगभग 180 किलोमीटर (प्रति बस/प्रतिदिन) | फुल चार्जिंग समय: 2 घंटे 30 मिनट में 1 बस पूर्ण चार्ज. |
| संचालन मॉडल | ग्रॉस कॉस्ट मॉडल (Gross Cost Model) | संचालक एजेंसी: ग्रीन सेल मोबिलिटी कंपनी. |
सुविधाओं और यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से ये बसें पूरी तरह से अत्याधुनिक और 100% डिजिटल तकनीक से लैस होंगी. इन बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, आपातकालीन पैनिक बटन (Panic Button) और जीपीएस (GPS) लाइव ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है.
यात्रियों के सुगम सफर के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम (कंडक्टर रहित/डिजिटल टिकट सुविधा), डिजिटल पेमेंट गेटवे, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और रियल-टाइम इंफॉर्मेशन डिस्प्ले बोर्ड जैसी प्रीमियम सुविधाएं मौजूद रहेंगी. सिंगल और अपॉर्च्युनिटी चार्जिंग तकनीक के कारण ये बसें बिना किसी बाधा के दिन भर सेवाएं दे सकेंगी. बसों का परिचालन जेसीटीएसएल की सख्त निगरानी में निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित 'ग्रीन सेल मोबिलिटी' कंपनी द्वारा किया जाएगा.
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए ई-बसें गेमचेंजर साबित होंगी. इससे ईंधन की भारी बचत होने के साथ-साथ शहर के वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी.
प्रशासन का दावा है कि इन बसों के सड़कों पर उतरते ही संस्कारधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुविधाजनक, पर्यावरण-हितैषी, सुरक्षित और समयबद्ध बन जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी.
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