मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र से पहले UCC पर सियासी रार; कन्हैया कुमार ने भोपाल में उठाए गंभीर सवाल
भोपाल में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान में कन्हैया कुमार ने यूसीसी (UCC) को 'सेलेक्टेड सिविल कोड' बताते हुए केंद्र और डॉ. मोहन यादव सरकार पर पेपर लीक और किसान मुद्दों को लेकर तीखा निशाना साधा।
भोपाल। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के फायरब्रांड सदस्य कन्हैया कुमार रविवार को कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी "छात्रों की गूंज" अभियान के तहत भोपाल पहुंचे. राजधानी के ऐतिहासिक इतवारा चौराहे पर आयोजित विशाल 'युवा संवाद' कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की. मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक लाए जाने की अटकलों के बीच, कन्हैया कुमार ने यूसीसी के बहाने केंद्र की मोदी सरकार और मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य कन्हैया कुमार ने भोपाल के इतवारा चौराहे पर मीडिया से बातचीत में मध्य प्रदेश में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि यह वास्तव में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' नहीं, बल्कि भाजपा का "सेलेक्टेड सिविल कोड (SCC)" है.
कन्हैया ने तर्क दिया कि यदि कोई कानून सचमुच 'यूनिफॉर्म' यानी समान है, तो वह देश के सभी नागरिकों पर पूरी तरह और समान रूप से लागू होना चाहिए, लेकिन भाजपा अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ऐसा नहीं कर रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद भी धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा. इसके विपरीत, आदिवासियों की जमीनों पर कब्जे की कोशिशें तेज हो गई हैं, और आने वाले समय में मध्य प्रदेश में भी ऐसे ही विनाशकारी हालात पैदा होने की आशंका है.
जब कन्हैया कुमार से सवाल किया गया कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कांग्रेस सदन (विधानसभा/संसद) के भीतर एकजुट होकर सरकार को क्यों नहीं घेर पाती, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देते हुए केवल इतना कहा कि कांग्रेस का देशव्यापी संघर्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में मजबूती से जारी रहेगा. इसी दौरान मंच पर मौजूद स्थानीय कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी को लेकर आक्रामक रुख अपनाया और कहा कि सरकार चाहे कोई भी कानून ले आए, हम उसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे.
युवा संवाद कार्यक्रम में उठाए गए प्रमुख मुद्दों और प्रशासनिक विफलताओं के आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| राष्ट्रीय व प्रांतीय मुद्दे | कन्हैया कुमार द्वारा किया गया दावा | प्रभावित वर्ग व प्रशासनिक स्थिति |
| यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) | इसे 'सेलेक्टेड सिविल कोड' (SCC) करार दिया | आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन छिनने की आशंका व्यक्त की. |
| पेपर लीक घोटाले | देश में अब तक रिकॉर्ड 192 पेपर लीक हो चुके हैं | लाखों छात्र मानसिक तनाव में; शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग. |
| आर्थिक और कृषि संकट | किसान कर्ज और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से परेशान | सरकार द्वारा मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप. |
| कानून व्यवस्था (MP) | राम मंदिर में चोरी की घटना का विशेष उल्लेख किया | डॉ. मोहन यादव सरकार से कानून व्यवस्था पर जवाबदेही मांगी. |
इतवारा चौराहे पर उमड़े युवाओं और छात्रों के हुजूम को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने देश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं के भविष्य के साथ लगातार क्रूर खिलवाड़ किया जा रहा है.
कन्हैया कुमार ने अपने संबोधन में युवाओं के साथ-साथ अन्नदाताओं की बदहाली का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि आज देश का किसान गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है, युवाओं को डिग्री होने के बाद भी रोजगार नहीं मिल रहा है और घरेलू महंगाई आसमान छू रही है. इन बुनियादी जनहित के मुद्दों पर संसद या विधानसभा में जवाब देने के बजाय सरकार केवल भावनात्मक मुद्दे उछालकर लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है.
उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नाम लेते हुए सीधे निशाना साधा और कहा कि सूबे की भाजपा सरकार शिक्षा, रोजगार और किसानों के मुद्दों को लेकर रत्ती भर भी गंभीर नहीं है. कन्हैया ने मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए राम मंदिर में हुई चोरी की हालिया घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि जो सरकार धार्मिक स्थलों को सुरक्षा नहीं दे पा रही, उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. अंत में उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर एकजुट हों और सड़क से लेकर सदन तक सरकार से अपने अधिकारों का हिसाब मांगें.
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