इंदौर, भोपाल और उज्जैन विकास प्राधिकरणों को मिले बड़े अधिकार; अब मंत्रालय की मंजूरी की जरूरत नहीं
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन इलाकों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब IDA जैसी संस्थाओं को बिना मंत्रालय की अनुमति के विकास योजनाएं बनाने के सीधे अधिकार होंगे।
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय प्रशासन और विकास के नियमों में किए गए ऐतिहासिक संशोधनों के बाद इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन (महानगरीय) इलाकों में विकास योजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में बहुत बड़ा बदलाव आया है. इस नए नीतिगत निर्णय के तहत अब इन शहरों के स्थानीय विकास प्राधिकरणों (जैसे इंदौर विकास प्राधिकरण - IDA) को अपने क्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए नई योजनाएं बनाने के लिए सीधे अधिकार दे दिए गए हैं. अब इन्हें भोपाल स्थित मंत्रालय की औपचारिक अनुमति का इंतजार नहीं करना होगा.
हाल ही में इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम से मिले इन विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए शहर में कई टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS) भी प्रभावी ढंग से लागू कर दी हैं. इसी तर्ज पर अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भी विकास कार्यों को गति दी जाएगी. इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर इंदौर, भोपाल, शाजापुर, देवास, धार, उज्जैन, रायसेन और सीहोर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों पर पड़ेगा, जहां अब बड़े बुनियादी ढांचागत (इन्फ्रास्ट्रक्चर) कार्यों को बिना समय गंवाए तेजी से पूरा किया जा सकेगा.
नए नियमों के लागू होने के बाद जमीनों के वर्गीकरण (लैंड यूज) और विकास योजनाओं को लेकर कड़े और पारदर्शी मापदंड तय किए गए हैं, जिन्हें नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| विकास योजना के मापदंड | निर्धारित नियम व शुल्क | प्रशासनिक प्रक्रिया |
| न्यूनतम भूमि सीमा | केवल 40 हेक्टेयर से ऊपर की जमीन पर | इसके दायरे में आने वाली जमीनों का ही लैंड यूज बदला जा सकेगा. |
| प्रशासनिक शुल्क (प्रति हेक्टेयर) | ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) फीस | लैंड यूज में बदलाव के लिए अथॉरिटी को अग्रिम भुगतान करना होगा. |
| गाइडलाइन के अनुसार शुल्क | कुल मूल्य का 15 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क | इलाके की सरकारी गाइडलाइन दरों के आधार पर देय होगा. |
| सार्वजनिक पारदर्शिता | विज्ञापन के जरिए सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित करना | कोई भी योजना लागू करने से पहले जनता की राय लेना अनिवार्य. |
मेट्रोपॉलिटन शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या को नियंत्रित करने के लिए इंदौर-उज्जैन और भोपाल में एक उच्च स्तरीय 'मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी' का गठन किया जाएगा. इस विशेष विंग में यातायात, पुलिस, नगर निगम और विकास प्राधिकरणों के कई बड़े और तकनीकी रूप से सक्षम अधिकारी शामिल होंगे. यह संयुक्त अथॉरिटी मिलकर पूरे महानगरीय क्षेत्र के लिए आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, सुगम लोक परिवहन और सुव्यवस्थित रूट व्यवस्था के लिए कंक्रीट योजनाएं तैयार करेगी.
इस व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त और पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए नियमों में कड़े अनुशासनात्मक प्रावधान भी जोड़े गए हैं. सरकार ने साफ कर दिया है कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण का मतलब जवाबदेही से बचना नहीं है.
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