बिना बिल बीजों का खेल और 5G कपास की धड़ल्ले से बिक्री! मंदसौर से खरगोन तक दोबारा बोवनी मजबूर
मालवा-निमाड़ में बारिश की खेंच और अमानक बीजों के कारण खरीफ फसलें संकट में हैं। धार, खरगोन, खंडवा, रतलाम, शाजापुर और मंदसौर में खराब अंकुरण और बिना पक्के बिल के बीज बिक्री से किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।
इंदौर। मालवा-निमाड़ अंचल में खरीफ का यह सीजन इस बार अन्नदाताओं के लिए दोहरी चुनौती लेकर आया है. एक ओर जुलाई माह में बारिश की लंबी खेंच के कारण फसलें सूखने की कगार पर हैं, तो दूसरी ओर अमानक (नकली) बीज, खराब अंकुरण, प्रतिबंधित बीजों की अवैध बिक्री और बिना पक्के बिल के कृषि आदान (बीज व दवाइयां) बेचे जाने के मामलों ने किसानों की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं. क्षेत्र के कई जिलों में कृषि विभाग द्वारा लिए गए बीजों के नमूने जांच में अमानक पाए गए हैं, वहीं घटिया बीज और प्रभावहीन दवाइयों के चलते किसान भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं.
धार जिले के कानवन क्षेत्र के दत्तीगारा गांव में 10 बीघा खेत में सोयाबीन की बोवनी करने वाले एक किसान ने बेहतर अंकुरण के दावे वाली दवा का छिड़काव किया था. इसके बावजूद बीज अंकुरित नहीं हुए और पूरी फसल चौपट हो गई. इस भारी आर्थिक नुकसान से परेशान होकर पीड़ित किसान ने उसी कृषि आदान विक्रेता की दुकान पर पहुंचकर कीटनाशक पी लिया. गनीमत यह रही कि समय रहते अस्पताल पहुंचाने से किसान की जान बच गई. पुलिस ने आरोपी बीज विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भी सोयाबीन का अंकुरण न होने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं.
खरगोन जिले में प्रतिबंधित 5G (एचटी बीटी) कपास के बीजों की अवैध बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से जारी है. इसके अलावा, कसरावद क्षेत्र के 13 किसानों की 20 हेक्टेयर में लगी मक्के की फसल में भुट्टों के अंदर केवल 30 से 35 प्रतिशत दाने ही विकसित हो पाए. किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग द्वारा की गई जांच में मामला सही पाया गया, जिसके बाद संबंधित बीज किस्म के विक्रय पर जिले भर में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है.
खंडवा जिले में पहले अत्यधिक बारिश और फिर लंबे समय तक सूखा रहने से फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. इसी बीच चार निजी कंपनियों के बीज जांच प्रयोगशाला में अमानक (फेल) पाए गए, लेकिन विडंबना यह रही कि जांच रिपोर्ट बोवनी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आई. प्रतिबंध के बावजूद बाजार में 5G कपास के बीज बिना किसी वैध बिल के बेचे जाने की गंभीर शिकायतें भी सामने आई हैं.
विभिन्न जिलों में बीजों की गुणवत्ता और फसलों की मौजूदा स्थिति का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| जिला | मुख्य समस्या / स्थिति | प्रशासनिक कदम व वर्तमान स्थिति |
| धार | सोयाबीन का शून्य अंकुरण, किसान द्वारा जहर खाने की घटना | विक्रेता पर FIR दर्ज, अन्य बीजों के सैंपल लिए गए |
| खरगोन | मक्के के भुट्टों में दाने न बनना, 5G कपास की बिक्री | संबंधित मक्का बीज किस्म पर प्रतिबंध |
| खंडवा | अमानक बीजों की रिपोर्ट देर से आना, मौसम की मार | 4 कंपनियों के बीजों की रिपोर्ट अमानक घोषित |
| रतलाम | बिना पक्के बिल के कीटनाशक और बीजों की बिक्री | विक्रेताओं को पक्का बिल देने के निर्देश जारी |
| शाजापुर | सोयाबीन और मक्का के 5 से अधिक लॉट अमानक | बीजों के लॉट पर प्रतिबंध, दुकानों की जांच |
| मंदसौर | बारिश न होने से 3.20 लाख हेक्टेयर में अंकुरण प्रभावित | मूंगफली व सोयाबीन की 2-3 बार बोवनी मजबूर |
रतलाम और शाजापुर जिलों में संदिग्ध गुणवत्ता वाले बीजों और कीटनाशकों की बिना बिल बिक्री किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट बन रही है. फसल खराब होने या बीज न जमने की स्थिति में किसानों के पास कृषि विभाग में शिकायत करने या मुआवजे का दावा करने का कोई वैधानिक आधार नहीं बचता. कृषि विभाग लगातार किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पक्का बिल लेकर खरीदारी करने की अपील कर रहा है. शाजापुर में सोयाबीन और मक्के के 5 से अधिक लॉट अमानक पाए जाने के बाद उन पर रोक लगाई गई है.
मंदसौर जिले में बीते दो सप्ताह से पर्याप्त बारिश न होने के कारण खेतों में बोए गए बीज सूख गए हैं. 3.20 लाख हेक्टेयर खरीफ रकबे वाले इस जिले में किसानों को दूसरी और तीसरी बार बोवनी का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है. सोयाबीन के अलावा मूंगफली के बीजों के अंकुरण में आ रही दिक्कतों की शिकायतें भी कृषि अधिकारियों तक पहुंची हैं.
-
अमानक बीजों की भरमार: बाजार में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों के मामले तेजी से बढ़े हैं.
-
प्रतिबंधित बीजों की बिक्री: बैन के बावजूद 5G कपास जैसे गैर-प्रमाणित बीजों का बेधड़क व्यापार.
-
खराब अंकुरण का संकट: बोवनी के बाद बीज न जमने से किसानों का पूरा पैसा पानी में बह गया.
-
कच्चे बिल का खेल: बिना पक्के बिल के कृषि सामग्री बेचने से शिकायत का आधार खत्म होना.
-
दोबारा बोवनी का वित्तीय बोझ: लगातार दो-तीन बार बोवनी करने से लागत दोगुनी हो गई है.
-
मानसून का धोखा: जुलाई में बारिश की लंबी खेंच से कुल उत्पादन घटने का बड़ा खतरा.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)