2014 के बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में इलाहाबाद HC का फैसला सुप्रीम कोर्ट में भी कायम, मनीषा बरी
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य दोषी पति पीयूष श्यामदासानी और सहयोगियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। जबलपुर के उद्योगपति की बेटी ज्योति की साल 2014 में कानपुर में योजनाबद्ध तरीके से चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।
जबलपुर । देश के बहुचर्चित और चर्चित ज्योति हत्याकांड में सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य दोषी पति पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू की अपीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व फैसले को सही ठहराते हुए तीनों दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. वहीं, मामले में आरोपी मनीषा मखीजा को हाई कोर्ट से मिली दोषमुक्ति (बरी होने) को भी पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा है.
यह पूरी वारदात 27 जुलाई 2014 की रात को कानपुर में घटी थी. पांडुनगर निवासी प्रमुख बिस्किट कारोबारी के बेटे पीयूष श्यामदासानी अपनी पत्नी ज्योति उर्फ पूजा के साथ स्वरूप नगर स्थित 'वरांडा होटल' में डिनर के लिए गया था. रात करीब 11:30 बजे पीयूष ने खुद पुलिस को झूठी सूचना दी कि बाइक सवार अज्ञात बदमाशों ने उसकी कार रोककर उसके साथ मारपीट की और उसकी पत्नी समेत कार लेकर फरार हो गए.
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कल्याणपुर-पनकी रोड पर लावारिस खड़ी कार से ज्योति का खून से लथपथ शव बरामद किया. पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच में यह बात साबित हुई कि ज्योति की किसी धारदार चाकू से ताबड़तोड़ गोदकर बेरहमी से हत्या की गई थी, जिसके बाद साजिश का भंडाफोड़ हुआ.
इस पूरे मुकदमे के कानूनी सफर और मुख्य पड़ाव को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| कानूनी चरण | तिथि / समय | अदालत का निर्णय व मुख्य घटनाक्रम |
| हत्याकांड की तिथि | 27 जुलाई 2014 | कानपुर के कल्याणपुर-पनकी रोड पर कार में मिला ज्योति का शव |
| सत्र न्यायालय (कानपुर) | 20 अक्टूबर 2022 | पति पीयूष समेत मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई |
| इलाहाबाद हाई कोर्ट | 29 नवंबर 2024 | 5 दोषियों की सजा बरकरार, मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देकर बरी किया |
| सुप्रीम कोर्ट (अंतिम निर्णय) | सर्वोच्च अदालत का फैसला | हाई कोर्ट का फैसला पूरी तरह बरकरार, पीयूष की अपील खारिज |
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि ज्योति की हत्या एक सोची-समझी और पूर्व नियोजित साजिश (Criminal Conspiracy) का परिणाम थी, जिसमें सभी आरोपियों की आपराधिक मंशा एक समान थी.
दूसरी ओर, अपीलकर्ताओं (पीयूष व अन्य) के वकीलों ने दावा किया कि उनके खिलाफ कोई ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं और पुलिस ने केवल मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) के आधार पर उन्हें साजिशकर्ता ठहराया है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जांच में उल्लेखित मोबाइल नंबर उनके नाम पर पंजीकृत नहीं थे. हालांकि, सभी पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने माना कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का बिल्कुल सही मूल्यांकन किया था, इसलिए निर्णय में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है.
मृतका ज्योति मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के जाने-माने उद्योगपति शंकर नाग्देव की बेटी थीं. उनका विवाह वर्ष 2012 में कानपुर के बिस्किट कारोबारी ओमप्रकाश श्यामदासानी के बेटे पीयूष श्यामदासानी के साथ धूमधाम से हुआ था. शादी के शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन बाद में पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते में मनीषा मखीजा की मौजूदगी और पीयूष के विवाहेतर संबंधों को लेकर लगातार विवाद पैदा होने लगा था, जिसके चलते अंततः इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया गया.
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