रतलाम में मंडराया भीषण सूखे का संकट; माही, चंबल, मलेनी नदियां सूखीं, रबी फसलों की सिंचाई पर संकट

रतलाम जिले में औसत से 14 इंच कम बारिश के कारण धोलावाड़ डैम और नदियां खाली पड़ी हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार आगामी रबी सीजन में पानी संकट गहरा सकता है।

Sep 18, 2026 - 21:38
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रतलाम में मंडराया भीषण सूखे का संकट; माही, चंबल, मलेनी नदियां सूखीं, रबी फसलों की सिंचाई पर संकट

रतलाम। मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई का समय नजदीक आ गया है, लेकिन पश्चिम मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में इस साल बेहद कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की भारी कमी की वजह से जिले की नदियां और जल स्रोत समय से पहले ही खाली नजर आने लगे हैं। मलेनी, कुड़ैल और जामड़ जैसी मौसमी नदियों में पानी का प्रवाह लगभग थम सा गया है, जबकि माही और चंबल जैसी सदाबहार बड़ी नदियों में भी जलस्तर असामान्य रूप से घट गया है। जिले के प्रमुख जलाशय—धोलावाड़, कनेरी, डेरी और कुंडाल डैम अपनी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं, जिससे आने वाले महीनों में जिले में भीषण सूखे जैसे हालात बनने की आशंका बढ़ गई है।

📉 अल-नीनो के प्रभाव से 14 इंच कम बरसे बादल: माही और चंबल का घटा जलप्रवाह

इस वर्ष अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव से सर्वाधिक प्रभावित जिलों की सूची में रतलाम भी शामिल है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रतलाम जिले में कुल 22 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जो कि जिले की औसत 36.5 इंच बारिश की तुलना में करीब 14 इंच कम है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आधी बारिश भी नहीं हुई है। मानसून के चरम सीजन में लबालब रहने वाली माही और चंबल नदियों के किनारे अभी से सूखे पड़े हैं।

वहीं, मलेनी, कुड़ैल, जामड़, रोजड़ और पिंगला नदियों की जलधाराएं टूटने की कगार पर पहुंच गई हैं। गुणावद में मलेनी नदी का प्रवाह लगभग पूरी तरह रुक गया है और नदी के बीचों-बीच चट्टानें व रेत के टीले टापू की तरह दिखाई देने लगे हैं। पिपलोदा की रोजड़ और रिंगनोद की पिंगला नदी में इस बार एक बार भी उफान नहीं आया है।

🌊 धोलावाड़ डैम औसत क्षमता से 5.5 मीटर खाली: सिंचाई के लिए नहीं मिल पाएगा पानी

बारिश की कमी के कारण नदी-नालों से जलाशयों में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हो सकी है।

सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) एन.पी. देव ने बताया, "इस साल बारिश बहुत कम होने से सभी प्रमुख जलाशयों में जल संचय बेहद कम हुआ है। रतलाम का मुख्य जलाशय धोलावाड़ डैम अपनी औसत क्षमता (395 मीटर) से करीब 5.5 मीटर खाली है। इसके चलते इस वर्ष किसानों को रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी दे पाना संभव नहीं होगा। इस डैम का जल केवल रतलाम शहर के लिए पेयजल आपूर्ति हेतु ही सुरक्षित रखा जा सकेगा।" इसके अलावा डेरी, कुंडाल और कनेरी डैम भी अधूरे भरे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ेगी।

📊 जिले के 102 तालाबों में बचा केवल 31% पानी: प्रमुख ग्रामीण तालाब भी पड़े सूखे

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रतलाम जिले में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 102 तालाब और 23 बैराज मौजूद हैं।

वर्तमान स्थिति में इन जल संरचनाओं में महज 31.31 प्रतिशत ही जल भराव हो पाया है। जिले के करमदी, जड़वासा, सैलाना, कालूखेड़ा, केरवास, आंबा और शिवगढ़ जैसे प्रमुख ग्रामीण तालाबों में भी पर्याप्त पानी का संचय नहीं हो सका है, जिससे मवेशियों और निस्तार के लिए भी संकट पैदा हो सकता है।

🌾 आगामी रबी सीजन की फसलों पर संकट: अब केवल मानसून के अंतिम दौर से उम्मीदें

कम बारिश के कारण सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी प्रमुख जलाशय अपनी क्षमता से 50 से 75 प्रतिशत ही भर पाए हैं।

कार्यपालन यंत्री एन.पी. देव के अनुसार, पानी की इस भारी कमी के कारण आगामी रबी सीजन (गेहूं, चना आदि) के लिए किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। अब पूरी उम्मीदें केवल मानसून के जाते-जाते अंतिम दौर में होने वाली किसी संभावित अच्छी बारिश पर ही टिकी हैं, अन्यथा रतलाम जिले को इस वर्ष गंभीर जल संकट और सूखे का सामना करना पड़ सकता है।

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