800 साल पुराना बजरंगगढ़ मंदिर और 'दुहाई सरकार'; जानें गुना जिले के इन 5 सिद्ध हनुमान स्थलों की खासियत
गुना जिले में स्थित 5 अति प्राचीन और चमत्कारी हनुमान मंदिरों का बड़ा धार्मिक महत्व है। महाभारत कालीन टेकरी सरकार से लेकर 800 साल पुराने बजरंगगढ़ हनुमान मंदिर तक, पढ़ें इन सभी 5 सिद्ध धामों की पूरी जानकारी।
गुना। मध्य प्रदेश का गुना जिला धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध माना जाता है. यहां 5 ऐसे अति प्राचीन और चमत्कारी हनुमान मंदिर स्थित हैं, जो लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र हैं. इनमें से किसी मंदिर का संबंध महाभारत काल से है, तो कोई 800 साल पुराना ऐतिहासिक धरोहर संजोए हुए है. इन मंदिरों में प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और कई श्रद्धालुओं के दिन की शुरुआत ही हनुमान जी का नाम स्मरण करके होती है.
गुना शहर से कुछ ही दूरी पर एक सुरम्य पहाड़ी पर स्थित 'श्री प्राचीन हनुमान मंदिर टेकरी सरकार' पूरे संभाग में प्रसिद्ध है. मंदिर में स्वयंभू श्री दक्षिण मुखी हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर महाभारत काल का है.
तपोभूमि और सिद्ध पीठ:
इस पवित्र पहाड़ी पर प्राचीन काल से कई साधु-संतों और तपस्वियों ने कठिन तपस्या की है. इसी कारण इस स्थान को अत्यंत सिद्ध स्थल माना जाता है. यहां प्रतिदिन तड़के से ही हजारों श्रद्धालु टेकरी सरकार के दर्शन हेतु शीश झुकाने पहुंचते हैं.
गुना से 7 किलोमीटर दूर आरोन बायपास पर स्थित 'मारुति राज बालाजी मंदिर' करीब 118 वर्ष पुराना है. इस मंदिर का निर्माण झांसी के लक्ष्मी नारायण द्वारा कराया गया था. इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि यहां हनुमान जी महाराज की दो प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं को पहले युवा स्वरूप और फिर बाल स्वरूप के दर्शन कराती हैं.
वहीं, गुना से 15 किलोमीटर दूर आरोन रोड पर स्थित 'मंशापूर्ण बालाजी मंदिर' भी एक सिद्ध पीठ है. यहां हनुमान जी की प्रतिमा स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है. मनोकामनाएं पूरी करने वाले देवता होने के कारण इन्हें 'मंशापूर्ण बालाजी' और 'दुहाई सरकार' के नाम से जाना जाता है.
गुना से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक बजरंगगढ़ किला परिसर में 12वीं शताब्दी का यानी करीब 800 वर्ष पुराना प्राचीन हनुमान मंदिर स्थित है. इस मंदिर में स्थापित बालाजी की प्रतिमा का मुख तिरछा है.
इतिहास और किंवदंतियों के अनुसार, तत्कालीन राजा जयसिंह राजपूत हनुमान जी के अनन्य भक्त थे. उनकी कठिन पूजा-अर्चना और भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिए थे. यह मंदिर स्थापत्य और अध्यात्म का अद्भुत संगम है.
गुना जिले के इन पांचों सिद्ध हनुमान स्थलों का मुख्य ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| मंदिर का नाम | स्थान / दूरी | मुख्य विशेषता व प्राचीनता |
| श्री टेकरी सरकार | गुना शहर के पास पहाड़ी पर | स्वयंभू दक्षिण मुखी प्रतिमा, महाभारत कालीन सिद्ध स्थल |
| मारुति राज बालाजी | आरोन बायपास (7 किमी) | 118 साल पुराना, युवा व बाल स्वरूप में दो मूर्तियां |
| मंशापूर्ण बालाजी ('दुहाई सरकार') | आरोन रोड (15 किमी) | स्वयंभू प्रतिमा, मनोकामना पूर्ति हेतु प्रसिद्ध |
| बजरंगगढ़ किला हनुमान मंदिर | बजरंगगढ़ (7 किमी) | 12वीं सदी (800 वर्ष पुराना), तिरछे मुख वाले बालाजी |
| श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर | विवेक कॉलोनी, गुना | हनुमान जी के 5 दिव्य स्वरूपों के एक साथ दर्शन |
गुना शहर की विवेक कॉलोनी में स्थित 'श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर' शहर के सबसे सिद्ध और जाग्रत मंदिरों में से एक माना जाता है. इस मंदिर में हनुमान जी के 5 दिव्य स्वरूपों (श्री हनुमान, श्री हयग्रीव, श्री नरसिंह, श्री गरुड़ और श्री वराह) के एक साथ दर्शन मिलते हैं. विशेष पर्वों और हनुमान जयंती के अवसर पर यहां विशाल धार्मिक आयोजनों का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं.
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