मध्य प्रदेश में UCC बिल पास; लिव-इन नियमों पर भड़के कांग्रेस विधायक बरैया, BJP विधायक ने भी जताई असहमति
मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC बिल पास होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधानों पर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी विधायक उषा ठाकुर और कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने इन नियमों पर अपनी आपत्ति जताई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित हो गया है. इस ऐतिहासिक विधेयक में 'लिव-इन रिलेशनशिप' (Live-In Relationship) को लेकर कड़े कानूनी नियम और पंजीकरण के प्रावधान बनाए गए हैं. हालांकि, बिल पास होते ही इसमें शामिल लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों को लेकर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस—दोनों ही खेमों के विधायकों का विरोध और असंतोष खुलकर सामने आने लगा है.
विधानसभा में बिल पारित होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधानों को लेकर जनप्रतिनिधियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. जहां एक तरफ इसे आधुनिक समाज में महिलाओं और बच्चों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे भारतीय सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक ताने-बाने पर प्रहार बताकर विरोध जताया जा रहा है.
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने लिव-इन रिलेशनशिप के विचार पर अपनी निजी असहमति जताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से इसके समर्थन में नहीं हैं.
बीजेपी विधायक उषा ठाकुर का वक्तव्य:
"मैं व्यक्तिगत रूप से लिव-इन रिलेशनशिप की पक्षधर नहीं हूं, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति, संस्कार, चरित्र की पवित्रता और नैतिकता पर बल देती है. परंतु आधुनिक युग में समाज के अंदर जो विकार आए हैं, उन्हें व्यवस्थित और नियंत्रित करने के लिए सरकार यह कड़े कानूनी प्रावधान लेकर आई है. इसमें ऐसे कठोर नियम बनाए गए हैं, जिससे लिव-इन में रहने वाले जोड़ों से जन्म लेने वाले बच्चों और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार मिल सकें."
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने इस विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को दी गई वैधानिक व्यवस्था पर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुझाव लेने के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है.
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया की तीखी प्रतिक्रिया:
"हमारी भारतीय मान्यता 'मदर इंडिया' की अवधारणा से शुरू होती है, जहां पति-पत्नी, मां-बेटे और पिता-पुत्र का पवित्र रिश्ता होता है. इस बिल में तो लिव-इन में रहने वालों को मान्यता दी जा रही है और उससे पैदा होने वाले बच्चों को वैध ठहराया जा रहा है. यह कैसी संस्कृति लाई जा रही है? क्या नियम यह नहीं होना चाहिए कि पहले शादी हो? अब स्थिति यह होगी कि जब बच्चे की शादी होगी, उसी समय उसके माता-पिता की भी शादी हो रही होगी. हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं."
UCC बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नेताओं की प्रतिक्रियाओं और तर्कों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| पक्ष / नेता | लिव-इन प्रावधान पर रुख | मुख्य तर्क व वक्तव्य |
| उषा ठाकुर (बीजेपी विधायक) | व्यक्तिगत विरोध, परंतु कानून का समर्थन | भारतीय संस्कृति चरित्र पर जोर देती है; कानून से महिलाओं-बच्चों को हक मिलेगा. |
| फूल सिंह बरैया (कांग्रेस विधायक) | कड़ा विरोध व आपत्ति | बिना विवाह लिव-इन व बच्चों को मान्यता देना भारतीय सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है. |
| राज्य सरकार (विधेयक) | वैधानिक नियंत्रण व पंजीकरण | लिव-इन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, बच्चों को संपत्ति का अधिकार व संरक्षण देना. |
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने संवैधानिक पहलुओं को उठाते हुए कहा कि जब नागरिकों के लिए समान कानून बनाए जा रहे हैं, तो उसमें अन्य वर्गों के अधिकारों के साथ टकराव की स्थिति बन रही है. उन्होंने कहा कि संविधान के कई अनुच्छेद आपस में टकरा रहे हैं और इस बात पर विचार ही नहीं किया गया कि अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) और वंचितों को उनके अधिकार कैसे मिलेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के वाजिब विरोध और सुझावों को सुने बिना ही हंगामे और शोर-गुल के बीच बिल पास करा लिया गया.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)