कान्हा टाइगर रिजर्व में 29 जुलाई की भव्य तैयारियां; स्कूलों और चौपालों में रैलियां व फिल्में जारी
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) से पहले कान्हा टाइगर रिजर्व में 15 से 29 जुलाई तक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मंडला और बालाघाट के स्कूलों व गांवों में 'बाघ हैं तो हम हैं' के संदेश के साथ रैलियां व कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
मंडला। विश्व भर में हर साल 29 जुलाई को 'अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस' (International Tiger Day) मनाया जाता है. वहीं 'टाइगर स्टेट' मध्य प्रदेश में इस खास दिवस को मनाने की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो चुकी हैं. कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) प्रबंधन द्वारा 15 जुलाई से 29 जुलाई तक एक विशेष 15-दिवसीय जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस व्यापक अभियान के माध्यम से कान्हा प्रबंधन हर नागरिक को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की मुहिम से सीधे जोड़ने का प्रयास कर रहा है.
कान्हा टाइगर रिजर्व प्रशासन इस अभियान के जरिए स्कूलों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक लोगों को बाघों के पर्यावरणीय महत्व और जंगलों की सुरक्षा का संदेश दे रहा है. मंडला और बालाघाट जिले के स्कूलों में चित्रकला, निबंध, संवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
इन कार्यक्रमों में वन विभाग के अधिकारी स्वयं बच्चों से रूबरू होकर उन्हें जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और खाद्य चक्र में बाघों की केंद्रीय भूमिका के बारे में जानकारी दे रहे हैं. इसका मुख्य मकसद यह है कि बच्चे केवल किताबों तक सीमित न रहकर अपने आसपास के जंगलों और वन्यजीवों की अहमियत को व्यवहार में समझें.
इसके अलावा, कान्हा प्रबंधन द्वारा शाम के समय गांवों में विशेष बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों, ईको-डेवलपमेंट समितियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है. इन चौपालों में वन्यजीव संरक्षण पर आधारित प्रेरक फिल्में और वृत्तचित्र दिखाए जा रहे हैं.
संरक्षण और आजीविका का संदेश:
बैठकों में ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो बाघ सुरक्षित रहेंगे, और यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत होंगी.
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान द्वारा संचालित इस 15-दिवसीय अभियान की प्रमुख गतिविधियों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक जानकारी व आयोजन का ब्योरा |
| मुख्य अवसर | अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) |
| अभियान की अवधि | 15 जुलाई से 29 जुलाई (15-दिवसीय विशेष अभियान) |
| प्रभावी क्षेत्र | कान्हा टाइगर रिजर्व से लगे मंडला और बालाघाट जिले |
| मुख्य गतिविधियां | चित्रकला प्रतियोगिता, जागरूकता रैलियां, वृत्तचित्र प्रदर्शन |
| लक्ष्य समूह | स्कूली छात्र, ईको-डेवलपमेंट समितियां, ग्रामीण व पर्यटक |
अभियान का संदेश एकदम स्पष्ट है—एक समय देश में बाघों की संख्या चिंताजनक स्तर तक घट गई थी, लेकिन निरंतर संरक्षण प्रयासों और जनभागीदारी के बल पर आज भारत दुनिया में सबसे अधिक बाघों की आबादी वाला देश बन चुका है. बाघों का स्वर्णिम भविष्य केवल जंगलों के अंदर नहीं, बल्कि जन-सामान्य की सोच और सहभागिता में सुरक्षित है.
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