4 लाख हेक्टेयर में मक्का और विदेश तक सप्लाई! छिंदवाड़ा में ₹40 का भुट्टा बना रहा लखपति
'कॉर्न सिटी' छिंदवाड़ा में मक्के की खेती किसानों के साथ-साथ बेरोजगारों की तकदीर बदल रही है। बीसापुर की मनीषा कहार हाइवे पर भुट्टा बेचकर हर महीने 1.5 से 2 लाख रुपये कमा रही हैं। यहां का स्वीट कॉर्न नेपाल और बांग्लादेश तक सप्लाई हो रहा है।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले को 'कॉर्न सिटी' (Corn City) का तमगा ऐसे ही हासिल नहीं हुआ है. यहां मक्के की बंपर खेती से न केवल किसान मालामाल हो रहे हैं, बल्कि यह फसल स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार का एक बड़ा जरिया बन चुकी है. छिंदवाड़ा शहर के प्रमुख चौराहों और हाईवे के किनारे इन दिनों भुट्टे (Roasted Corn) बेचने वालों की दुकानें सजी हुई हैं, जहां हर दिन हजारों लोग कॉर्न के लजीज स्वाद का आनंद लेने पहुंच रहे हैं.
छिंदवाड़ा के पास बीसापुर की रहने वाली मनीषा कहार पहले घर के काम-काज के बाद बेरोजगार ही रहा करती थीं. फिर उन्होंने हिम्मत जुटाकर हाईवे के किनारे एक चौक पर भुट्टे की दुकान लगाना शुरू किया. आज यही छोटी सी दुकान उनकी जिंदगी बदल चुकी है. मनीषा अब इस दुकान से प्रति माह 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं.
दुकानदार मनीषा कहार का वक्तव्य:
"हम रोजाना करीब ₹5,000 तक के भुट्टे आसानी से बेच लेते हैं. इससे हमें बेहतरीन आमदनी हो जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि भुट्टे की पैदावार हमारे छिंदवाड़ा में ही होती है, इसलिए स्थानीय मंडी से ताजा भुट्टा खरीदकर व्यापार करना बहुत आसान और किफायती रहता है."
छिंदवाड़ा के चौक-चौराहे इन दिनों केवल व्यापार केंद्र ही नहीं, बल्कि 'पिकनिक स्पॉट्स' में तब्दील हो चुके हैं. शाम ढलते ही स्थानीय निवासियों के साथ-साथ हाईवे से गुजरने वाले पर्यटक और मुसाफिर यहां खास तौर पर रुकते हैं.
परिवार के साथ पहुंचे स्थानीय निवासी नीलेश घोगरे बताते हैं कि वे अक्सर अपने दोस्तों और परिवार के साथ भुट्टे का आनंद लेने आते हैं. छिंदवाड़ा से होकर गुजरने वाले यात्री अपनी गाड़ियां कतार में खड़ी करके गर्म-गर्म भुट्टों का स्वाद लेते हैं, जिससे हाईवे के किनारे मेला सा माहौल बन जाता है.
छिंदवाड़ा में इन दिनों एक भुट्टे की कीमत ₹30 से लेकर ₹40 तक है, जिसमें सबसे ज्यादा मांग 'स्वीट कॉर्न' (Sweet Corn) की है.
छिंदवाड़ा जिले में अकेले स्वीट कॉर्न की खेती लगभग 10,000 हेक्टेयर रकबे में की जाती है, जो ज्यादातर शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में होती है. वहीं, स्वीट कॉर्न और सामान्य मक्के को मिलाकर कुल 4 लाख हेक्टेयर में मक्के की फसल बोई जाती है. यही कारण है कि यह जिला पूरे मध्य प्रदेश में मक्के का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.
छिंदवाड़ा के मक्का और स्वीट कॉर्न कारोबार का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक जानकारी व आंकड़े |
| जिले का कुल मक्का रकबा | 4 लाख हेक्टेयर |
| स्वीट कॉर्न की खेती | लगभग 10,000 हेक्टेयर |
| प्रति भुट्टा बाजार मूल्य | ₹30 से ₹40 (रिटेल) |
| स्थानीय विक्रेताओं की बिक्री | ₹5,000 प्रति दिन (औसत) |
| सप्लाई / निर्यात क्षेत्र | यूपी, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, नेपाल, भूटान व बांग्लादेश |
छिंदवाड़ा के भुट्टे की मांग सिर्फ मध्य प्रदेश या भारत के अन्य राज्यों (उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र) तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का मक्का नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक निर्यात किया जाता है.
गर्मी के सीजन में अप्रैल महीने में ही किसान मक्के की बोवनी कर देते हैं ताकि उन्हें अगेती फसल के बेहतर दाम मिल सकें. बड़े व्यापारी और उनके एजेंट सीधे किसानों के खेतों में पहुंचकर फसल खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को मंडी तक परिवहन का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता.
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