8वें वेतन आयोग में कितना बढ़ेगा फिटमेंट फैक्टर? जानें NC-JCM की मांग और सैलरी का गणित
8वें वेतन आयोग के गठन के बीच फिटमेंट फैक्टर की चर्चा जोरों पर है। जानिए फिटमेंट फैक्टर क्या होता है, इसका आपकी बेसिक व ग्रॉस सैलरी पर क्या असर पड़ता है और 6वें-7वें वेतन आयोग में कितना बढ़ा था वेतन।
देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है. दूसरी ओर, आयोग अपनी सिफारिशों के खाके पर मंथन कर रहा है. कर्मचारी संगठन आयोग से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर तय करने की लगातार मांग कर रहे हैं.
कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था 'नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है. हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा फिटमेंट फैक्टर मिलना व्यावहारिक रूप से कठिन है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि आयोग 2.0 से 2.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय कर सकता है.
आसान भाषा में समझें तो फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) एक गणितीय गुणांक (Multiplier) होता है. इसका उपयोग वेतन आयोग द्वारा सरकारी कर्मचारियों के पुराने मूल वेतन (Basic Pay) और पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए किया जाता है.
इस गुणांक का सीधा गुणा कर्मचारी की बेसिक सैलरी से किया जाता है. यानी यह नंबर जितना अधिक होगा, बेसिक पे में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी. इसका मुख्य लाभ यह है कि इससे सभी पे-लेवल के कर्मचारियों के वेतन में एक समान रूप से वृद्धि करना आसान हो जाता है.
इस सवाल का सीधा जवाब है— 'नहीं'.
आमतौर पर कर्मचारियों में यह धारणा होती है कि यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया है, तो उनकी कुल ग्रॉस सैलरी में भी 157% की सीधी बढ़ोतरी हो जाएगी. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. फिटमेंट फैक्टर केवल बेसिक पे को बढ़ाता है, जबकि किसी कर्मचारी की इन-हैंड या ग्रॉस सैलरी में बेसिक पे के अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और अन्य भत्ते शामिल होते हैं.
पिछले वेतन आयोगों के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि उच्च फिटमेंट फैक्टर का अर्थ यह कतई नहीं है कि कुल ग्रॉस सैलरी में भी उतनी ही बड़ी वृद्धि होगी:
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7वां वेतन आयोग (7th CPC): इसमें फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू किया गया था. वित्तीय संस्था 'BankBazaar' के विश्लेषण के अनुसार, इसके लागू होने पर कर्मचारियों की औसतन ग्रॉस सैलरी में लगभग 14.29% की ही बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
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6ठा वेतन आयोग (6th CPC): इसमें फिटमेंट फैक्टर केवल 1.86 था, फिर भी कर्मचारियों की कुल ग्रॉस सैलरी में औसतन 54% की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली थी.
6वें और 7वें वेतन आयोग में आए इस बड़े अंतर की मुख्य वजह उस समय लागू महंगाई भत्ता (DA) था. नीचे दी गई तालिका से इसे आसानी से समझा जा सकता है:
| वेतन आयोग (Pay Commission) | लागू फिटमेंट फैक्टर | लागू होने के समय DA का स्तर | औसतन ग्रॉस सैलरी वृद्धि |
| 6ठा वेतन आयोग (6th CPC) | 1.86 | मात्र 24% | ~54% |
| 7वां वेतन आयोग (7th CPC) | 2.57 | 125% (बेसिक में विलय) | ~14.29% |
| 8वां वेतन आयोग (अनुमानित) | 2.00 से 2.57 (प्रस्तावित) | 50%+ (शून्य/विलय पर निर्भर) | ~31% से 68% (संभावित) |
'ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन' (AINPSEF) के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के समय कर्मचारियों को पहले से 125% डीए मिल रहा था, जिसे नए वेतन ढांचे में मर्ज (विलय) कर दिया गया था. यही कारण था कि 2.57 फिटमेंट फैक्टर के बावजूद कुल सैलरी में उछाल सीमित रहा. वहीं 6वें वेतन आयोग के समय डीए केवल 24% था, जिससे 1.86 के गुणांक का असर कुल सैलरी पर ज्यादा दिखाई दिया.
वित्तीय विश्लेषण एजेंसी 'BankBazaar' के अनुमान के अनुसार, यदि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.0 से 2.57 के बीच मंजूर किया जाता है, तो पे-लेवल 11 से लेवल 18 तक के अधिकारियों व कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में लगभग 31% से 68% तक का इजाफा देखा जा सकता है.
हालांकि यह आंकड़ा अनुमानित है. कर्मचारियों की जेब में अंतिम रूप से कितनी बढ़ोतरी आएगी, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार किस फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है और उस समय तात्कालिक महंगाई भत्ते (DA) की स्थिति क्या रहती है.
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