MP में यूनिवर्सिटी के लिए 20 नहीं सिर्फ 10 हेक्टेयर जमीन की जरूरत; विधानसभा में बिल पास

मध्य प्रदेश विधानसभा में निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 पारित हुआ। अब राज्य में 20 की जगह मात्र 10 हेक्टेयर भूमि पर निजी यूनिवर्सिटी खोली जा सकेगी। जानिए नए नियम, डिपॉजिट राशि और एडमिशन कैलेंडर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

Jul 22, 2026 - 16:11
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MP में यूनिवर्सिटी के लिए 20 नहीं सिर्फ 10 हेक्टेयर जमीन की जरूरत; विधानसभा में बिल पास

भोपाल। मध्य प्रदेश में नया निजी विश्वविद्यालय (Private University) स्थापित करना अब काफी आसान हो गया है. राज्य सरकार ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए भूमि की अनिवार्य उपलब्धता को आधा कर दिया है. अब नए निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केवल 10 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी.

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा में 'निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक 2026' को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है.

विधानसभा में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन की सीमा कम करने से शिक्षण की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार करना और नए निजी संस्थानों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है.

निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए संशोधित नियमों में केवल भूमि की बाध्यता ही कम नहीं की गई है, बल्कि वित्तीय और सुरक्षा संबंधी अन्य कड़े प्रावधान भी जोड़े गए हैं ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे.

  • भूमि सीमा में छूट: पूर्व में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए कम से कम 20 हेक्टेयर भूमि की अनिवार्यता थी, जिसे घटाकर अब 10 हेक्टेयर कर दिया गया है.

  • निर्मित क्षेत्र (Built-up Area): नए विश्वविद्यालय परिसर में कम से कम 2,500 वर्ग मीटर का निर्मित क्षेत्र होना आवश्यक है.

  • सुरक्षा निधि (Security Deposit): संस्थान के संचालक को सरकार के पास ₹5 करोड़ की राशि सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा करनी होगी.

  • छात्रों के हितों की सुरक्षा: यदि कोई संस्थान डिफ़ॉल्ट करता है, तो उसके द्वारा जमा की गई डिपॉजिट राशि का उपयोग विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए किया जाएगा.

संशोधन विधेयक के तहत हुए बदलावों का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

मापदंड / नियम पूर्व व्यवस्था (पुराना नियम) वर्तमान व्यवस्था (संशोधित नियम 2026)
अनिवार्य भूमि सीमा 20 हेक्टेयर 10 हेक्टेयर
निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) पूर्व निर्धारित मानकों के अनुसार 2,500 वर्ग मीटर
सिक्योरिटी डिपॉजिट पूर्व नियमों के अनुसार ₹5 करोड़
संसाधनों में छूट सामान्य मानक मेडिकल/अन्य विशेषज्ञता में संसाधनों से कोई समझौता नहीं

संशोधन विधेयक पर जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन को आश्वस्त किया कि नए नियमों से अकादमिक गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी.

उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश की कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं:

  • 31 जुलाई तक एडमिशन: प्रदेश के सभी शासकीय व अशासकीय कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया 31 जुलाई तक अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाएगी.

  • सख्त एकेडमिक कैलेंडर: शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो और परीक्षाएं समय पर आयोजित हों, इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को एकेडमिक कैलेंडर का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.

  • सार्थक ऐप से अटेंडेंस: शिक्षकों और प्रोफेसरों की कॉलेज में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'सार्थक ऐप' (Sarthak App) के जरिए डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है.

  • डिजिटल वैल्यूएशन: उत्तर पुस्तिकाओं के त्वरित और पारदर्शी मूल्यांकन के लिए 'डिजिटल वैल्यूएशन' प्रणाली अपनाई जा रही है ताकि समय पर परीक्षा परिणाम घोषित किए जा सकें.

  • रिक्त पदों की भर्ती: विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है; तब तक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रोफेसरों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर भेजा जा रहा है.

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