'युवाओं के भविष्य से खिलवाड़!' नीट विवाद पर विधानसभा में तीखी बहस; विपक्ष का हंगामा
मध्य प्रदेश विधानसभा में नीट परीक्षा और राज्य की भर्ती धांधलियों को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के स्थगन प्रस्ताव को अध्यक्ष द्वारा खारिज किए जाने के बाद कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
भोपाल। दिल्ली में नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज मध्य प्रदेश विधानसभा में भी पुरजोर तरीके से सुनाई दी. नीट परीक्षा के साथ-साथ मध्य प्रदेश की विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं पर सदन में तुरंत चर्चा कराने की मांग को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई.
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नीट परीक्षा में धांधली पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया. प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हुए भारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.
दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह विषय सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से भी सीधा जुड़ा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश की कई भर्ती परीक्षाओं में भी लगातार धांधली और अराजकता का माहौल देखा गया है, जिससे युवाओं का भविष्य गर्त में जा रहा है.
उमंग सिंघार ने सवाल उठाया, "क्या सदन इतने गंभीर विषय पर चर्चा नहीं कराएगा? पूर्व में भी देश और प्रदेश से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं पर सदन में चर्चाएं होती रही हैं. यदि सरकार आज इस पर चर्चा नहीं करना चाहती, तो कल का समय तय कर दे."
विपक्ष की मांग का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राकेश सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा के नियमों के तहत सुबह 9 बजे के बाद दी जाने वाली सूचनाओं को अगले दिन के लिए माना जाता है.
मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि नियम के अनुसार स्थगन प्रस्ताव केवल उन्हीं विषयों पर लाया जा सकता है जो पूर्णतः मध्य प्रदेश सरकार के क्षेत्राधिकार में आते हों. चूंकि नीट परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार के अधीन आता है, इसलिए राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा का कोई औचित्य ही नहीं बनता.
सदन में चले इस पूरे घटनाक्रम का संक्षिप्त ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विषय / मापदंड | विवरण एवं आधिकारिक स्थिति |
| मुद्दा | NEET परीक्षा धांधली एवं MP भर्ती परीक्षा अनियमितताएं |
| प्रस्ताव प्रकार | स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) - नेता प्रतिपक्ष द्वारा पेश |
| सत्तापक्ष का पक्ष | केंद्रीय विषय होने के कारण राज्य विधानसभा में चर्चा अमान्य |
| अध्यक्षीय व्यवस्था | विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्थगन प्रस्ताव खारिज किया |
| कार्रवाई पर प्रभाव | हंगामे के चलते सदन 15 मिनट के लिए स्थगित |
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बाद विपक्ष के विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया.
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मंत्री विश्वास सारंग: "जब विधानसभा अध्यक्ष ने एक बार स्पष्ट व्यवस्था दे दी है, तो विपक्ष को पीठ के आदेश का सम्मान करना चाहिए. सदन में अन्य जनहित के मुद्दों पर भी चर्चा होनी है."
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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार: "सरकार एक तरफ ढोंग रचते हुए 'युवा वर्ष' मनाने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ जब युवाओं के भविष्य और भर्ती घोटालों पर बात करने की बारी आती है, तो चर्चा से भाग खड़ी होती है."
विपक्ष के लगातार बढ़ते हंगामे और नारेबाजी को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.
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