1 घंटे पहले पेपर लीक और नकल के आरोप! नागदा के छात्रों ने कुलसचिव से की शिकायत
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से संबद्ध नागदा के शासकीय कॉलेजों के बीकॉम विद्यार्थियों को बिजनेस स्टेटिस्टिक्स में शून्य अंक मिलने पर हंगामा हो गया। छात्रों ने नकल, पेपर लीक और पक्षपात के आरोप लगाए।
उज्जैन। नागदा के शासकीय स्वामी विवेकानंद कॉलेज और जीडीसी कॉलेज (GDC College) के बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन में धांधली को लेकर मोर्चा खोल दिया है. 'बिजनेस स्टेटिस्टिक्स' विषय में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शून्य (0) अंक दिए जाने से आक्रोशित छात्र-छात्राएं बुधवार को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन पहुंचे और कुलसचिव के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई.
विद्यार्थियों ने मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी, परीक्षा हॉल में खुलेआम नकल कराने, मोबाइल ले जाने की छूट, परीक्षा से 1 घंटे पहले पेपर लीक करने और निजी कॉलेजों के छात्रों को विशेष सुविधा (स्पेशल ट्रीटमेंट) देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
छात्र-छात्राओं ने चर्चा में बताया कि शासकीय स्वामी विवेकानंद कॉलेज के बीकॉम इंग्लिश मीडियम के कुल 44 विद्यार्थियों में से 30 को बिजनेस स्टेटिस्टिक्स सब्जेक्ट में शून्य अंक दिए गए हैं, जिससे उन्हें सप्लीमेंट्री परीक्षा देनी पड़ेगी और केवल 14 छात्र ही उत्तीर्ण हो सके हैं.
इसी तरह जीडीसी कॉलेज की 25 छात्राओं में से 17 को इसी विषय में 0 अंक मिले हैं. विद्यार्थियों का आरोप है कि जब उन्होंने इस संबंध में शिकायत की, तो प्रबंधन की ओर से कहा गया कि "आप नियमित (रेगुलर) कॉलेज नहीं आते हैं, इसलिए शून्य अंक दिए गए हैं."
छात्रा खुशी वर्मा ने परीक्षा व्यवस्था में हो रहे भेदभाव को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि जब निजी कॉलेजों के छात्र शासकीय कॉलेज में परीक्षा देने आते हैं, तो उन्हें विशेष प्राथमिकता दी जाती है.
खुशी वर्मा के अनुसार, शासकीय कॉलेज के छात्र-छात्राओं को जमीन पर नीचे बैठाकर परीक्षा दिलाई जाती है, जबकि निजी कॉलेज के विद्यार्थियों को बेंच पर बैठाया जाता है. इतना ही नहीं, निजी कॉलेज के छात्रों को परीक्षा के दौरान ऑब्जेक्टिव प्रश्नों के उत्तर बताए जाते हैं और परीक्षा शुरू होने से 1 घंटे पहले ही प्रश्नपत्र की जानकारी उपलब्ध करा दी जाती है.
छात्रों के विरोध और विश्वविद्यालय में दर्ज शिकायत से जुड़े मुख्य ब्योरे का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक स्थिति एवं छात्रों के आरोप |
| विश्वविद्यालय | सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन |
| प्रभावित कॉलेज | शासकीय स्वामी विवेकानंद कॉलेज एवं जीडीसी कॉलेज, नागदा |
| विषय | B.Com द्वितीय वर्ष - बिजनेस स्टेटिस्टिक्स (Business Statistics) |
| परिणाम | विवेकानंद कॉलेज के 44 में से 30 और GDC की 25 में से 17 छात्राओं को 0 अंक |
| मुख्य आरोप | 1 घंटे पहले पेपर लीक, नकल की छूट, प्राइवेट कॉलेज छात्रों को स्पेशल ट्रीटमेंट |
| प्रशासनिक कदम | कुलसचिव द्वारा दोनों कॉलेजों के प्राचार्यों से रिपोर्ट तलब, जांच जारी |
छात्रा पायल राठौर ने बताया कि उन्होंने इस अन्यायी मूल्यांकन की शिकायत सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर दर्ज कराई थी. इसके बाद संबंधित विभाग से देवेंद्र कुमार नामक व्यक्ति का फोन आया, जिन्होंने कहा कि "आपके शून्य अंक हैं, इसलिए सप्लीमेंट्री परीक्षा ही दें. रिवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) कराने से भी कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि उसमें भी 0 अंक ही मिलेंगे." साथ ही नियमित कॉलेज न आने का बहाना बनाया गया.
वहीं छात्रा रिया मिथवा ने परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा दावों की पोल खोलते हुए कहा कि परीक्षा हॉल में खुलेआम नकल कराई जाती है. कई छात्र मोबाइल फोन लेकर अंदर जाते हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डालते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती. इसके उनके पास पुख्ता प्रमाण भी मौजूद हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि विद्यार्थियों की शिकायतों को दर्ज कर लिया गया है.
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