भारत में चांदी का आयात 96% गिरा; नई लाइसेंसिंग नीति से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे प्रीमियम दाम
भारत में नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के कारण चांदी का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जून में आयात घटकर मात्र 29 टन रह गया, जिससे लोकल प्रीमियम 2019 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जानिए आगामी त्योहारों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
केंद्र सरकार की नई लाइसेंसिंग व्यवस्था और कड़े प्रतिबंधों की वजह से भारत में चांदी का आयात (Silver Import) अत्यधिक कम हो गया है. यही मुख्य कारण है कि भारतीय बाजार में चांदी का लोकल प्रीमियम कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.
मामले से जुड़े जानकारों के अनुसार, अधिकांश बैंकों और अधिकृत आयातकों को अभी तक इस कीमती सफेद धातु के आयात के लिए जरूरी परमिट नहीं मिल सके हैं और वे वाणिज्य मंत्रालय व सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है, जहां गहनों, चांदी के बर्तनों, औद्योगिक इस्तेमाल, त्योहारों और शादियों के दौरान इसकी भारी मांग रहती है.
वैश्विक रिसर्च कंसल्टेंसी 'मेटल्स फोकस' (Metals Focus) के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के उद्देश्य से सरकार ने मई में चांदी के आयात के लिए लाइसेंसिंग की अनिवार्य शर्तें लागू की थीं. इसके चलते जून में भारत का चांदी शिपमेंट गिरकर अनुमानित 29 टन रह गया, जो जनवरी में 747 टन दर्ज किया गया था.
जून का यह आंकड़ा देश की सालाना चांदी मांग के 1 प्रतिशत से भी कम माना जा रहा है. 'मेटल्स फोकस' के प्रिंसिपल कंसल्टेंट हर्षल बारोट के अनुसार, सप्लाई में आई इस भारी किल्लत के कारण अनुमानित 30-दिवसीय औसत प्रीमियम वर्ष 2019 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आयात लाइसेंस को मंजूरी देने वाली अंतर-मंत्रालयी समिति महीने में केवल एक या दो बार ही बैठक करती है, जिससे परमिट जारी होने में भारी देरी हो रही है.
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों से चांदी के अत्यधिक आयात को रोकना है, जिनके साथ भारत के मुक्त-व्यापार समझौते (Free Trade Agreements) हैं. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अब चांदी 'प्रतिबंधित आयात' (Restricted Import) श्रेणी में आती है और सभी अनुरोधों पर नियमों के तहत कड़ाई से कार्रवाई की जा रही है.
आयात में आई गिरावट और बाजार पर पड़े प्रभाव का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक व बाजार आंकड़े |
| जनवरी में चांदी आयात | 747 टन |
| जून में अनुमानित आयात | 29 टन (सालाना मांग का <1%) |
| प्रीमियम स्थिति | वर्ष 2019 के बाद से सबसे उच्चतम स्तर पर |
| मुख्य कारण | नई लाइसेंसिंग प्रणाली, 'प्रतिबंधित' श्रेणी व FTA अंकुश |
| नया अनिवार्य दस्तावेज | 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' (Certificate of Origin) |
मुंबई स्थित प्रमुख बुलियन ट्रेडिंग फर्म 'ऑगमॉन्ट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Augmont Enterprises) की रिसर्च हेड रेनीशा चैनानी ने बताया कि आयात ठप होने से घरेलू बाजार में फिजिकल चांदी की किल्लत हो गई है, जबकि औद्योगिक और उपभोक्ता मांग स्थिर बनी हुई है.
नई प्रणाली से व्यापारी काफी भ्रमित हैं, क्योंकि कोटा आवंटन के मानकों और उनके समाप्त होने पर क्या प्रक्रिया होगी, इस पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है. इसके अलावा, सरकार ने 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' (उत्पत्ति का प्रमाण-पत्र) जमा कराना भी अनिवार्य कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी ऊर्जा लागतों और रुपए की गिरावट को रोकने के लिए सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई थी. अब आयात रुकने से भारत के पीक शॉपिंग सीजन से पहले संकट और गहरा सकता है.
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