12 साल के संघर्ष के बाद बने असिस्टेंट प्रोफेसर; सागर के सौरव सिंह ने MPPSC में पाई 6ठीं रैंक
सागर जिले के खुरई निवासी सौरव सिंह ठाकुर ने 12 साल के कठिन संघर्ष और असफलताओं के बाद MPPSC में इतिहास विषय से प्रदेश में 6ठीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट प्रोफेसर का पद प्राप्त किया है। पढ़ें पूरी प्रेरणादायक कहानी।
सागर। यदि किसी लक्ष्य को पाने के लिए पूरी लगन, अटूट निष्ठा और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता अवश्य मिलती है. इस बात को साबित कर दिखाया है सागर जिले की खुरई तहसील के छोटे से गांव 'गूलर' के रहने वाले सौरव सिंह ठाकुर ने.
सौरव सिंह ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में इतिहास विषय (History Subject) से संपूर्ण मध्य प्रदेश में 6ठीं रैंक (6th Rank) हासिल की है और असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित हुए हैं. सौरव ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपनी मां, बहनों और मित्रों को दिया है.
सौरव सिंह ठाकुर बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लगातार 12 सालों तक कठोर परिश्रम किया है. इस दौरान उन्होंने कई बार मुख्य परीक्षा (Mains Exam) पास की तो कई बार वे साक्षात्कार (Interview) के अंतिम चरण तक पहुंचे, लेकिन सफलता हाथ से फिसल जाती थी.
MPPSC के साथ-साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षाएं भी कई बार दीं. कई बार अंतिम पायदान पर असफल होने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास जारी रखा.
सौरव की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है. बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई. आर्थिक स्थिति इतनी जर्जर थी कि सौरव को पढ़ाने के लिए उनकी बहनों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी.
बहनों ने खुद त्याग करके सौरव को हमेशा आगे बढ़ने और पढ़ने के लिए प्रेरित किया. कठिन से कठिन आर्थिक तंगी में भी परिवार का संबल सौरव को हमेशा मिलता रहा.
सौरव सिंह ठाकुर के चयन और संघर्ष का संक्षिप्त ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | महत्वपूर्ण जानकारी |
| नाम व निवास | सौरव सिंह ठाकुर (गांव: गूलर, खुरई, जिला सागर) |
| चयनित पद | असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास - History) |
| प्रदेश में रैंक | MPPSC में 6th Rank (छठी रैंक) |
| संघर्ष अवधि | 12 वर्ष का निरंतर अध्ययन व प्रयास |
| आगामी लक्ष्य | MPPSC उत्तीर्ण कर 'डिप्टी कलेक्टर' (DSP/SDM) बनना |
सौरव बचपन से ही अत्यंत प्रतिभाशाली रहे हैं. उन्होंने न केवल खुद मेहनत की, बल्कि अपने साथ पढ़ने वाले साथियों का भी हमेशा मार्गदर्शन किया. कोरोना काल के दौरान उन्होंने अपनी कोचिंग क्लासेज ऑनलाइन शुरू की और बाद में इंदौर रहकर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई.
कोचिंग में पढ़ाकर अपना खर्च निकालने के बाद भी वे खुद प्रतिदिन 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई करते थे. आज उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई छात्र देश के अलग-अलग शहरों में उच्च पदों पर सेवारत हैं.
असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद भी सौरव का सफर यहीं नहीं थमा है. उनका अंतिम सपना मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा में जाकर अधिकारी बनना है.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)