मध्य प्रदेश में लागू हुआ अग्निशमन विधेयक 2026; बनेंगे 36 नए फायर स्टेशन और बनेगी हाई-टेक फायर अकादमी
मध्य प्रदेश में 'अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026' लागू हो गया है। प्रदेश में 36 नए फायर स्टेशन और अत्याधुनिक फायर अकादमी बनेगी। बिना एनओसी इमारतों और झूठी सूचना पर भारी जुर्माने का प्रावधान।
भोपाल। मध्य प्रदेश में आगजनी और भीषण हादसों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मोहन सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य में 'अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026' पूरी तरह लागू कर दिया गया है.
इसके तहत आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ऑफिसर्स के अधिकारों में बड़ी वृद्धि की गई है. साथ ही प्रदेश में बचाव दल को आधुनिक ट्रेनिंग देने के लिए एक अत्याधुनिक फायर अकादमी खोलने और 36 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है.
विगत वर्षों में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में हुई भीषण आगजनी की घटनाओं के दौरान उन्नत संसाधनों की कमी महसूस की गई थी. कई बार राहत कार्य के लिए सेना, एयरपोर्ट अथॉरिटी या निजी उद्योगों के संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था.
इस स्थिति से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने स्वयं का अग्निशमन ढांचा मजबूत करने का फैसला किया है. प्रदेश भर में जल्द ही 36 नए अत्याधुनिक फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें सघन आबादी और बहुमंजिला इमारतों (High-Rise Buildings) तक आसानी से पहुंचने वाले आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा.
नए कानून के तहत फायर ब्रिगेड अधिकारियों को आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं. आग पर काबू पाने के लिए जरूरी होने पर फायर ऑफिसर किसी भी परिसर में प्रवेश कर सकेंगे और वहां आवश्यक तोड़फोड़ कर सकेंगे.
इसके अलावा, आग बुझाने के लिए किसी भी निजी या सार्वजनिक जल स्रोत (Water Source) पर तत्काल नियंत्रण हासिल कर सकेंगे. यदि कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसे हिरासत में लिया जा सकेगा और उस पर ₹15,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
नियमों का उल्लंघन करने, लापरवाही बरतने या फर्जी सूचना देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान किए गए हैं:
| उल्लंघन का प्रकार / स्थिति | निर्धारित जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई |
| आग की झूठी सूचना (Fake Fire Call) देना | ₹20,000 तक का जुर्माना |
| राहत कार्य या जल स्रोत उपयोग में बाधा डालना | ₹15,000 तक का जुर्माना |
| पंडाल / परिसरों में सुरक्षा इंतजाम न करना | ₹50,000 जुर्माना (+ ₹5,000 प्रति दिन) |
| बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) इमारत चलाना | ₹1,00,000 तक जुर्माना (+ ₹5,000 प्रति दिन) |
| सील की गई खतरनाक इमारत का इस्तेमाल करना | ₹5,00,000 तक का भारी जुर्माना |
नए कानून के तहत सभी बहुमंजिला और व्यावसायिक इमारतों के स्वामियों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना सर्टिफिकेट इमारत का संचालन करने पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगेगा, जो सुधार न होने पर ₹5,000 प्रति दिन के हिसाब से बढ़ता रहेगा.
यदि किसी भवन या परिसर को अग्निसुरक्षा के लिहाज से खतरनाक घोषित कर सील किया जाता है, तो सक्षम अधिकारी को उसे तुरंत खाली कराने का अधिकार होगा. यदि कोई व्यक्ति अनाधिकृत रूप से सील भवन को खोलता है, तो उस पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
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