59 में से 22 वर्किंग वूमन हॉस्टल का गैर-कानूनी इस्तेमाल; CAG की राज्य सरकार को फटकार
मध्य प्रदेश के वर्किंग वूमन हॉस्टल्स पर CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश के 59 में से 22 हॉस्टल्स का नियम विरुद्ध व्यावसायिक इस्तेमाल और किराया वसूली सामने आई है। पढ़ें सीएजी ऑडिट की पूरी रिपोर्ट।
भोपाल। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में दूर-दराज से आकर शहरों में नौकरी व कामकाज करने वाली महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए 'वर्किंग वूमन हॉस्टल्स' का लाभ जरूरतमंद महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है. हाल ही में जारी हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका सनसनीखेज खुलासा हुआ है.
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 59 वर्किंग वूमन हॉस्टल स्वीकृत हैं, जिनमें से 22 हॉस्टल्स का उपयोग महिलाओं के लिए न होकर अन्य व्यावसायिक व प्रशासनिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. कैग ने इस पूरी योजना के क्रियान्वयन और प्रबंधन को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राज्य सरकार पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं.
सीएजी की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 34 जिलों में कुल 59 वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्मित हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,519 बिस्तरों (Beds) की है. हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 13 हॉस्टल ही वास्तव में कामकाजी महिलाओं के लिए संचालित हो रहे हैं.
इसका मतलब यह है कि योजना के तहत स्वीकृत कुल बिस्तरों में से महज 990 बिस्तरों की सुविधा ही महिलाओं को मिल पा रही है, जबकि 22 हॉस्टल्स को पूरी तरह से दूसरे कामों के लिए मोड़ दिया गया है.
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि केंद्र सरकार के फंड से निर्मित इन हॉस्टल्स से आर्थिक लाभ कमाने के लिए विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इन्हें अवैध रूप से किराए पर चढ़ा दिया:
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सीहोर: वर्ष 1989 में लगभग ₹60 लाख की लागत से बना हॉस्टल 2021 में 'आजीविका मिशन' को सौंप दिया गया, जो अब सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उपयोग हो रहा है.
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खरगोन: हॉस्टल का ग्राउंड फ्लोर जनवरी 2019 से लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को ₹23,575 प्रति माह किराए पर दिया गया है.
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धार: हॉस्टल भवन को नवंबर 1991 से 2011-12 तक खेल परियोजना विकास क्षेत्र को ₹5,300 प्रति माह पर किराए पर दिया गया.
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सिवनी: हॉस्टल के 14 कमरों को जुलाई 2019 से ₹9,000 मासिक किराए पर आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केंद्र के लिए दे दिया गया.
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छतरपुर (बिजावर): हॉस्टल का एक हिस्सा जुलाई 2017 से ₹3,000 प्रति माह और दूसरा हिस्सा ₹2,000 प्रति माह में दो अलग-अलग निजी स्कूलों को किराए पर दिया गया.
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जबलपुर (भेड़ाघाट) व निवाड़ी: भेड़ाघाट में बिना केंद्र सरकार के अनुमोदन के ऑडिटोरियम (सभागार) बना दिया गया, जबकि निवाड़ी का हॉस्टल 1989 से आज तक अधूरा पड़ा है.
सीएजी ऑडिट में उजागर हुए प्रमुख आंकड़ों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| पहलू / विवरण | स्थिति एवं आंकड़े |
| प्रदेश में स्वीकृत कुल हॉस्टल | 59 हॉस्टल (34 जिलों में) |
| स्वीकृत कुल बिस्तरों की संख्या | 3,519 बेड |
| वास्तविक रूप से संचालित हॉस्टल | मात्र 13 हॉस्टल (990 बेड) |
| अन्य कार्यों हेतु दुरुपयोग / किराए पर | 22 हॉस्टल |
| स्वीकृत एवं संचालित डे-केयर सेंटर | 11 स्वीकृत ( 0 संचालित ) |
सीएजी ने केंद्र सरकार के नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है. भारत सरकार के दिशानिर्देशों के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग बिना केंद्र की पूर्व अनुमति के इन भवनों का कोई अन्य उपयोग नहीं कर सकता था.
नियमों की शर्तों का उल्लंघन करने पर 10% वार्षिक दंडात्मक ब्याज के साथ केंद्र द्वारा दी गई पूरी अनुदान राशि की वसूली का प्रावधान है. कैग ने टिप्पणी की है कि यह राज्य शासन, जिला अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा योजना की खुलेआम अवहेलना को दर्शाता है.
ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत सभी 11 डे-केयर सेंटर (शिशु देखभाल केंद्र) बंद पाए गए, जिससे नौकरीपेशा माताओं को भारी परेशानी हो रही है.
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