परासिया कफ सिरप कांड के 7 महीने बाद भी सिविल अस्पताल में नहीं मिला चाइल्ड स्पेशलिस्ट
छिंदवाड़ा के परासिया में अक्टूबर 2025 के जहरीले कफ सिरप कांड के बाद सस्पेंड हुए डॉक्टर की जगह अब तक नए चाइल्ड स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वादों के बावजूद पद खाली होने से परिजन महंगे इलाज के लिए मजबूर हैं।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में अक्टूबर 2025 में जहरीले कफ सिरप पीने के कारण हुई मासूम बच्चों की मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. इस भीषण त्रासदी के केंद्र में परासिया सिविल अस्पताल में पदस्थ चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रवीण सोनी थे, जिन्होंने अपने निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान बच्चों को वह जहरीला कफ सिरप लिखा था.
कफ सिरप के सेवन से बच्चों की किडनियां खराब होने लगीं और 20 से ज्यादा मासूमों की जान चली गई. मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद सरकार ने डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया था. हालांकि, इस घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी सिविल अस्पताल परासिया में अब तक नए चाइल्ड स्पेशलिस्ट की स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है.
अक्टूबर 2025 में सर्दी-जुकाम का इलाज कराने जो भी बच्चा डॉक्टर के पास पहुंच रहा था, जहरीली दवा के कारण उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी. मौतों का आंकड़ा बढ़ने के बाद सरकार हरकत में आई और डॉक्टर सहित दवा निर्माता कंपनी के मालिकों को जेल भेजा गया.
लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासनिक संवेदनहीनता की स्थिति यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र के सिविल अस्पताल में पिछले 7 महीनों से बच्चों के इलाज के लिए एक भी चाइल्ड स्पेशलिस्ट तैनात नहीं किया गया है.
जब अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी को लेकर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने उग्र प्रदर्शन किया था, तब सीएमएचओ (CMHO) डॉ. नरेश गोन्नाने ने एक महीने के भीतर स्थायी नियुक्ति का आश्वासन दिया था.
प्रशासन ने दावा किया था कि जब तक नई नियुक्ति नहीं होती, तब तक हफ्ते में तीन दिन छिंदवाड़ा जिला अस्पताल से चाइल्ड स्पेशलिस्ट परासिया आकर सेवाएं देंगे. हालांकि, हकीकत में यह व्यवस्था भी ठप पड़ गई. समाजसेवी विनय जोशी का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी डॉक्टर की तैनाती न होना शासन और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है.
अस्पताल की स्थिति और घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदुओं का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| पहलू / घटनाक्रम | वर्तमान स्थिति एवं विवरण |
| मुख्य घटना | अक्टूबर 2025 (जहरीले कफ सिरप से 20+ बच्चों की मौत) |
| दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई | डॉ. प्रवीण सोनी गिरफ्तार एवं तत्काल प्रभाव से निलंबित |
| प्रशासनिक आश्वासन | 1 महीने के भीतर नए चाइल्ड स्पेशलिस्ट की नियुक्ति का दावा |
| वर्तमान स्थिति (2026) | 7 महीने बाद भी सिविल अस्पताल में डॉक्टर का पद रिक्त |
| जनता पर प्रभाव | महंगे निजी अस्पतालों या छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय जाने की मजबूरी |
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं के न होने से परिजनों को अपने बच्चों के इलाज के लिए या तो महंगे निजी डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है या फिर जिला मुख्यालय छिंदवाड़ा तक की दौड़ लगानी पड़ रही है.
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