छात्रों को सीएम मोहन यादव का भरोसा, 3 माह में निपटाए जाएंगे परीक्षा से जुड़े मामले
मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव का बड़ा फैसला। पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट। 3 महीने में होगा निपटारा।
भोपाल: शिक्षा के मुद्दे पर देश भर में छिड़े छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भरोसा दिलाया है कि युवाओं और विद्यार्थियों के कल्याण की चिंता करना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के फास्ट ट्रैक कोर्ट में न केवल पेपर लीक बल्कि परीक्षाओं से जुड़े अन्य (दीगर) मामलों के निपटारे भी तीन माह में कर लिए जाएंगे। यह टाइमलाइन तय कर ली गई है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के जरिए नीट परीक्षाओं में सुधार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए ये बातें कहीं।
⚖️ पहले मध्य प्रदेश के चार शहरों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, "मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा से जुड़े हर विषय पर बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से निर्णय ले रही है। निरंतर यह प्रयास किए जा रहे हैं कि सुधार हो। समय की यह मांग है कि नौजवानों से जुड़े न्यायिक फैसले जल्दी हों। इसी विचार के साथ मध्य प्रदेश के चार शहरों— भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। पेपर लीक से लेकर अन्य परीक्षाओं के मामले इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने के भीतर समाधान तक पहुंचाए जाएंगे।"
📝 नीट में गड़बड़ी ना हो इसलिए एसओपी तैयार होगी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नीट परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम मोदी विद्यार्थियों के प्रति बेहद सकारात्मक भाव रखते हैं। यही वजह है कि पेपर लीक के मामले सामने आने के साथ ही जांच के लिए सरकार ने तुरंत एसआईटी (SIT) गठित कर दी थी। इसके साथ ही देशभर में आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुई थीं। उन्होंने अपनी सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भी हमारा प्रयास है कि नीट परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हों, इसके लिए विशेष एसओपी (SOP) तैयार की जाएगी।
🎓 देश में सबसे पहले एनईपी यहीं लागू, फास्ट ट्रैक में भी नंबर वन
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एमपी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने वाला पहला राज्य है। इसके अलावा देश में सबसे पहले यहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू की गई थी। राज्य सरकार ने पिछले ढाई साल में तीन नए सरकारी विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी) शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में भी स्टूडेंट्स के कल्याण के निर्णय तेजी से लिए गए हैं। पूरे देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। पहले पूरे देश में 641 यूनिवर्सिटीज थीं, जिनकी संख्या अब 1400 हो गई है। मेडिकल की सीटें भी पचास हजार से बढ़कर एक लाख तक हो चुकी हैं।
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