शहडोल के झिरिया गांव में मुरम खरीदी का अजीब मामला, पोर्टल पर बिल अपलोड होने से खुली पोल
शहडोल जिले में बिना किसी स्वीकृत खदान के ही मुरम के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर बिल अपलोड होने से घोटाले की पोल खुली है।
शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक के बाद एक कई अजब-गजब और हैरान करने वाले घोटाले सामने आ रहे हैं। अभी जिले में ड्राई फ्रूट्स और सरकारी स्कूलों में पेंटिंग जैसे चर्चित घोटालों के मामले ठंडे भी नहीं हुए थे कि अब एक और नया 'मुरम घोटाला' खुलकर सामने आ गया है। इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि जिला खनिज विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शहडोल जिले में मुरम की एक भी खदान स्वीकृत नहीं है, इसके बावजूद पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में इसके इस्तेमाल और परिवहन के नाम पर सरकारी खजाने से ताबड़तोड़ लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
🔍 शहडोल में एक और नए घोटाले का हुआ बड़ा पर्दाफाश
शहडोल में सामने आए इस नए मुरम घोटाले ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत विभाग में हड़कंप मचा दिया है। 'पंचायत दर्पण' पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किए गए कुछ सरकारी बिलों ने इस पूरे मुरम कांड की पोल खोलकर रख दी है। जनपद पंचायत सोहागपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत झिरिया से जुड़े दो ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने सबको चौंका दिया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए गए ये दोनों बिल ही इस पूरे मामले के केंद्र में हैं।
पहला बिल 28 जनवरी 2026 का है, जिसमें प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्र के पास पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य के लिए 'एस.एन. हार्डवेयर' के नाम पर 16 मात्रा मुरम की कीमत 27 हजार 200 रुपये और पानी के टैंकर सहित कुल 31 हजार 400 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
💰 बिना खदान के ही मुरम के लिए स्वीकृत हो गए हजारों रुपये के बिल
इसी तरह से सामने आया दूसरा बिल 28 जुलाई 2025 का है, जिसमें मेसर्स कमल शर्मा द्वारा सीसी रोड (सीमेंटेड सड़क) निर्माण कार्य के लिए 66 हजार रुपये की मुरूम और 20 हजार 400 रुपये की गिट्टी सहित कुल 90 हजार 720 रुपये का भारी-भरकम बिल बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इन दोनों ही बिलों पर आधिकारिक भुगतान संबंधी स्वीकृति और संबंधित पंचायत अधिकारियों के हस्ताक्षर भी स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।
❓ सरकारी भुगतान और खदानों की वैधता पर खड़े हुए गंभीर सवाल
नियमों के मुताबिक पंचायत स्तर पर बनने वाली सड़कें, भवन, सीसी रोड और अन्य विभिन्न निर्माण कार्यों में मुरम का उपयोग दर्शाया जाता है, जिसके लिए खनिज नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन जिला खनिज विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान में शहडोल जिले के भीतर मुरम की एक भी वैध या स्वीकृत खदान मौजूद नहीं है। ऐसे में बिना किसी स्वीकृत खदान के सरकारी कार्यों में मुरम का उपयोग कैसे हुआ और कागजों पर इसका इतना बड़ा भुगतान कैसे कर दिया गया, इसने व्यवस्था और सामग्री की भौतिक उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
⛏️ जिला खनिज अधिकारी बोले- जिले में एक भी मुरम खदान सैंक्शन नहीं है
इस पूरे मामले को लेकर जब जिला खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य से बात की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया, ''वर्तमान समय में शहडोल जिले में मुरम की एक भी खदान स्वीकृत नहीं है, हालांकि कुछ प्रस्ताव प्रक्रियारत जरूर हैं और भविष्य में कुछ खदानें सैंक्शन हो सकती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक विभाग द्वारा एक भी मुरम खदान सैंक्शन नहीं की गई है।''
जांच के बाद ही स्थिति होगी पूरी तरह स्पष्ट: संयुक्त आयुक्त
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त आयुक्त विकास एवं ग्रामीण विभाग (जॉइंट कमिश्नर) एमपी सिंह ने कहा, ''ग्राम पंचायत स्तर पर जो भी कार्य कराए जा रहे हैं, हो सकता है कि उन प्रोजेक्ट्स के इस्टीमेट या प्रावधान में मुरम का उपयोग शामिल हो। यदि वहां वास्तव में मुरम डलवाई जा रही है और उसके एवज में सरकारी भुगतान भी किए जा रहे हैं, तो यह जांच का विषय है कि आखिर वह मुरम आ कहाँ से रही है और उसका किस तरह से उपयोग किया जा रहा है। हम इस पूरे मामले की गहराई से जांच-पड़ताल करवा लेते हैं, जिसके बाद ही पूरी और स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी।''
गौरतलब है कि इससे पहले भी शहडोल जिला कई तरह के प्रशासनिक विवादों का केंद्र रह चुका है। हाल ही में जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान एक अत्यंत अल्पकालिक कार्यक्रम में ड्राई फ्रूट्स, दूध और चाय पर असामान्य रूप से भारी-भरकम खर्च के बिल सामने आए थे। इसके बाद सरकारी स्कूलों में मामूली पेंटिंग के छोटे-मोटे कार्यों के लिए कागजों पर बड़ी संख्या में मजदूरों और राजमिस्त्रियों को दिखाकर भुगतान कराने का मामला भी काफी चर्चा का विषय रहा था। अब एक बार फिर मुरम की अवैध या कागजी उपलब्धता और उसके भारी-भरकम भुगतान को लेकर उठे सवालों ने इलाके में एक नई राजनीतिक और प्रशासनिक बहस छेड़ दी है।
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