भोपाल पदयात्रा पर निकले किसानों को प्रशासन ने रोका, संयुक्त किसान मोर्चा का सरकार के खिलाफ आक्रोश
नर्मदापुरम में मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी और अन्य मांगों को लेकर किसानों की भोपाल पदयात्रा को प्रशासन ने रोक दिया है। इसके विरोध में किसानों ने सेठानी घाट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
नर्मदापुरम: दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के कई अन्य हिस्सों में पिछले दिनों छात्रों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला था, जो अंततः 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शांत हुआ था। हालांकि, छात्रों का यह आंदोलन शांत ही हुआ था कि अब मध्य प्रदेश में किसानों का भारी गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। राज्य में समर्थन मूल्य पर मूंग की संपूर्ण खरीदी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर किसानों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। नर्मदापुरम जिले में 'संयुक्त किसान मोर्चा' से जुड़े करीब 13 विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने 27 जुलाई यानी आज सोमवार को सरकार के खिलाफ पैदल पदयात्रा निकालकर विरोध दर्ज कराने की पूरी तैयारी की थी।
किसान अपनी प्रमुख मांग—मूंग की पूरी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने—सहित अन्य मांगों को लेकर यह पदयात्रा निकालने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही जिला प्रशासन ने उन्हें रोक लिया।
🛑 पदयात्रा से पहले ही किसानों को रोका, सेठानी घाट पर शुरू हुआ धरना प्रदर्शन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न किसान संगठनों ने आज नर्मदापुरम से एक विशाल 'किसान पदयात्रा' की शुरुआत करने की योजना बनाई थी। इस तय कार्यक्रम के तहत पदयात्रा प्रसिद्ध सेठानी घाट से शुरू होनी थी। जब सभी किसान वहाँ इकट्ठा हुए और पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी वक्त प्रशासन और पुलिस बल ने मोर्चा संभालते हुए विभिन्न किसान संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर रोक लिया।
प्रशासनिक सख्ती के विरोध में किसानों ने तुरंत सेठानी घाट पर ही अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान संगठनों का मुख्य आरोप है कि इस साल मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद पोर्टल पर केवल 1 क्विंटल मूंग ही दिखाई जा रही है, जबकि किसानों की उपज का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा पोर्टल पर दर्ज ही नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
⚖️ मांगें पूरी न होने पर सेठानी घाट पर ही जारी रहेगा प्रदर्शन
किसानों को अन्य कई गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं तमाम व्यवस्थाओं के विरोध में 13 किसान संगठनों द्वारा सेठानी घाट पर विधि-विधान से मां नर्मदा का पूजन-अर्चन करने के बाद राजधानी भोपाल के लिए पदयात्रा निकाली जानी थी, लेकिन प्रशासन ने यात्रा शुरू होने से पहले ही संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके चलते सिवनी मालवा, पिपरिया, सोहागपुर, इटारसी और आसपास के अन्य ग्रामीण इलाकों से आने वाले किसानों को जिले की सीमाओं पर ही रोक दिया गया।
इसी दमनकारी कार्रवाई के विरोध में किसानों ने सेठानी घाट पर उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और पुलिस-प्रशासन द्वारा हिरासत में लिए गए संयुक्त किसान संगठनों के सभी पदाधिकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग की। किसान नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी जाती हैं, तो वे सेठानी घाट पर ही डटे रहेंगे और आंदोलन को तेज करेंगे।
👮♂️ पुलिस छावनी में तब्दील किया गया पूरा क्षेत्र और मार्ग
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान अपनी मुख्य मांगों—जिले में 100 प्रतिशत मूंग की सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने और खाद-बीज वितरण व्यवस्था में सुधार करने—को लेकर भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च निकालने की जिद पर अड़े थे। हालांकि, जिला प्रशासन ने इस यात्रा की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का हवाला देते हुए प्रशासन ने शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात कर कड़े बैरिकेडिंग कर दिए। नर्मदापुरम से लेकर बुधनी मार्ग तक के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया, ताकि किसान आगे न बढ़ सकें।
✊ हिरासत में लिए गए किसानों को छोड़ने की जोरदार मांग
किसान संगठन के जिला अध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने पहले बातचीत का झांसा देकर आंदोलन को भीतर से कमजोर करने की साजिश रची और रात के वक्त गांव-गांव जाकर किसानों को डराया-धमकाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने कई निर्दोष किसान नेताओं को जबरन अपनी हिरासत में ले लिया है।
सेठानी घाट पर चल रहे धरने के दौरान क्रांतिकारी किसान संगठन और अन्य किसान समूहों के नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि राष्ट्रीय किसान नेता लीलाधर राजपूत को तुरंत मौके पर लाया जाए। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
🌾 मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी और अन्य लंबित मांगें
किसानों की सबसे प्रमुख और मुख्य मांग यह है कि मध्य प्रदेश में उत्पादित मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, किसानों को खाद और बीज का वितरण सुगमता से हो, इसके लिए सीधे पोर्टल पर त्वरित पंजीयन की पारदर्शी सुविधा दी जाए, ताकि उन्हें तहसील और समितियों के चक्कर न काटने पड़ें। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन और किसानों के बीच कड़ा गतिरोध बना हुआ है और पूरे क्षेत्र की स्थिति पर पुलिस प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।
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