सीधी में जल संरक्षण अभियान बना जन आंदोलन, सोन और गोपद नदी के पुनर्जीवन पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में सीधी जिले में जल संरक्षण और खेत तालाब निर्माण के कार्यों की खुलकर सराहना की है।

Jul 27, 2026 - 17:33
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सीधी में जल संरक्षण अभियान बना जन आंदोलन, सोन और गोपद नदी के पुनर्जीवन पर चर्चा

सीधी: देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड के दौरान मध्य प्रदेश के सीधी जिले में किए गए अभूतपूर्व जल संरक्षण कार्यों की खुलकर और दिल खोलकर सराहना की है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ''कैच द रेन'' (Catch the Rain) अभियान अब देश भर में एक विशाल जन आंदोलन का रूप ले चुका है, और सीधी जिले में जनभागीदारी के बलबूते बनाए गए लगभग 1500 खेत तालाब इस अभियान की असाधारण सफलता का एक बेहतरीन और जीवंत उदाहरण हैं।

🎙️ 'मन की बात' में छाया सीधी जिला, पीएम मोदी ने की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के दौरान देश को संबोधित करते हुए कहा, ''गत 4 जुलाई से पूरे देश में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत बारिश के अनमोल पानी का संचयन, भूजल स्तर (Groundwater) को रिचार्ज करने, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी ताकत आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है, और इस मामले में हमारा सीधी जिला एक उत्कृष्ट और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर पूरे देश के सामने उभरा है।''

💧 जिले में पूरे हुए 12 हजार से अधिक जल संरक्षण और 1489 खेत तालाबों का निर्माण

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, सीधी जिले में अब तक कुल 12 हजार 983 से अधिक जल संरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। इनमें से विशेष रूप से 1 हजार 489 नए खेत तालाबों का निर्माण कराया गया है, जिससे किसानों को सिंचाई में भारी मदद मिल रही है। इसके अतिरिक्त, जिले के पुराने और विलुप्त हो रहे तालाबों व अन्य पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार तथा वर्षा जल के संचयन से जुड़े कई अन्य रचनात्मक कार्य भी इसमें शामिल हैं।

इसके साथ ही, जिले की जीवनदायिनी नदियां—सोन नदी, गोपद नदी और बनास नदी जैसी प्रमुख नदियों के संरक्षण, गहरीकरण और साफ-सफाई के लिए भी स्थानीय स्तर पर एक व्यापक अभियान चलाया गया है, जिससे क्षेत्र के जल संसाधनों को और अधिक मजबूत व टिकाऊ बनाने में बहुत बड़ी मदद मिली है।

🏆 'सीधी मॉडल' को मिली राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान

यह पूरा जल संरक्षण अभियान केवल किसी कागजी सरकारी योजना या आदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने धरातल पर एक सशक्त जन आंदोलन का रूप ले लिया। इसमें जिले की तमाम ग्राम पंचायतों, विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों, अन्नदाता किसानों और ग्रामीण नागरिकों ने आगे बढ़कर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। इन सभी के सामूहिक और ईमानदार प्रयासों का ही सुखद परिणाम है कि आज सीधी जिले का यह अनूठा 'जल संरक्षण मॉडल' पूरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।

🌟 प्रधानमंत्री द्वारा सीधी का उल्लेख पूरे जिले के लिए गर्व का विषय

इस पूरे गौरवशाली घटनाक्रम को लेकर सीधी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, ''माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 'मन की बात' में विशेष रूप से सीधी जिले का उल्लेख किया जाना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान की बात है। जल संरक्षण के क्षेत्र में जनभागीदारी पर आधारित यह मॉडल अब देश के अन्य जिलों के लिए भी एक बड़ा प्रेरणास्रोत साबित होगा।''

वहीं, कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि यदि इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर आम जनता की सहभागिता लगातार बढ़ती रही, तो भविष्य में आने वाली जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों से बहुत ही प्रभावी और स्थायी रूप से निपटा जा सकता है।

🎉 प्रधानमंत्री के संबोधन से स्थानीय लोगों में दौड़ी उत्साह की लहर

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में सीधी जिले की इस उपलब्धि का जिक्र किए जाने के बाद से स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों में भारी उत्साह का माहौल है। जहां एक ओर ग्रामीण इसे अपनी वर्षों की कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रयासों का सबसे बड़ा सम्मान मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन इसे भविष्य में जल संरक्षण के क्षेत्र में और अधिक उत्कृष्ट कार्य करने की एक नई ऊर्जा और प्रेरणा के रूप में देख रहा है।

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