कुणाल चौधरी का बीजेपी सरकार पर हमला, कहा- सीएम और कृषि मंत्री की खींचतान से पिस रहा किसान

मध्य प्रदेश में मूंग की कम खरीदी को लेकर कांग्रेस ने राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कुणाल चौधरी ने कहा कि आपसी खींचतान के कारण किसानों को नुकसान हो रहा है।

Jul 27, 2026 - 17:39
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कुणाल चौधरी का बीजेपी सरकार पर हमला, कहा- सीएम और कृषि मंत्री की खींचतान से पिस रहा किसान

भोपाल: मध्य प्रदेश में किसानों की मूंग फसल की पूरी खरीदी न किए जाने को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय सचिव और विधायक कुणाल चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच चल रही अंदरूनी राजनीतिक खींचतान का खामियाजा अंततः प्रदेश के अन्नदाता किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

उन्होंने आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि इस साल प्रदेश में कुल 20 लाख मीट्रिक टन मूंग का बंपर उत्पादन हुआ है। इसके बावजूद सरकार ने लक्ष्य का महज 25 प्रतिशत यानी 4.5 लाख मीट्रिक टन खरीदी का ही प्रावधान रखा था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही समर्थन मूल्य पर किसानों की पूरी मूंग नहीं खरीदी, तो केंद्रीय कृषि मंत्री सहित प्रदेश के तमाम मंत्रियों के बंगलों का जोरदार घेराव किया जाएगा।

🌾 मध्य प्रदेश में इस साल हुआ है बंपर मूंग का उत्पादन

कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने सरकार को घेरते हुए कहा, ''एक तरफ तो प्रदेश सरकार 'किसान कल्याण वर्ष' मनाने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर प्रदेश का किसान बुरी तरह प्रताड़ित हो रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री और देश के केंद्रीय कृषि मंत्री के बीच चल रही आपसी और अंदरूनी खींचतान का सीधा नुकसान अब हमारे किसानों को उठाना पड़ रहा है। इस वर्ष प्रदेश के खेतों में रिकॉर्ड 20 लाख मीट्रिक टन मूंग का बंपर उत्पादन हुआ है, लेकिन किसानों की इस मेहनत का उचित मूल्य उन्हें नहीं मिल पा रहा है।''

📉 सरकार ने रखा 25% का लक्ष्य, लेकिन अब तक सिर्फ 2% ही हो सकी खरीदी

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने कुल उत्पादन का 25 फीसदी मूंग खरीदने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन सुस्त व्यवस्था के चलते अब तक केवल 2 प्रतिशत मूंग ही खरीदी जा सकी है। सरकारी खरीदी की बेहद धीमी रफ्तार के कारण मजबूरन किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर खुले बाजार में व्यापारियों को बेचने पड़ रही है।

कुणाल चौधरी ने यह भी याद दिलाया कि गेहूं खरीदी के दौरान भी बिल्कुल यही लचर स्थिति देखने को मिली थी। पीसीसी (PCC) अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा पहले ही केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाकर 40 प्रतिशत किए जाने का आग्रह किया गया था, लेकिन इसके जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार तो अभी तक आवंटित कोटे की खरीदी भी पूरी तरह से नहीं कर पाई है, ऐसे में कोटा बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। केंद्र और राज्य सरकारों की इसी आपसी खींचतान का भारी नुकसान आज प्रदेश के किसानों को झेलना पड़ रहा है।

⚖️ कांग्रेस का आरोप- बीजेपी शासित राज्यों की तुलना में एमपी के किसानों के साथ हो रहा भेदभाव

कुणाल चौधरी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब राज्य में बीजेपी का एक भी लोकसभा सांसद नहीं होने के बावजूद वहां की करीब 90 प्रतिशत फसल सरकार द्वारा खरीदी जा रही है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य राजस्थान में किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है, जबकि इसके विपरीत मध्य प्रदेश के किसानों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार और भेदभाव किया जा रहा है।

उन्होंने फसल बीमा योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी तरह की वित्तीय गड़बड़ियां फसल बीमा योजना में भी चल रही हैं। पिछले 5 वर्षों के दौरान फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों से कुल 16 हजार 517 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रीमियम वसूला गया, लेकिन इसके एवज में किसानों को मुआवजे के रूप में कुल भुगतान मात्र 7 हजार 190 करोड़ रुपये का ही किया गया। इस प्रकार बीमा कंपनियों को करोड़ों-अरबों रुपये का भारी मुनाफा पहुंचाया गया है।

✉️ मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री के बीच हुआ था पत्राचार

गौरतलब है कि प्रदेश में किसानों की मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाए जाने को लेकर हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक आधिकारिक पत्र लिखा गया था। इसके जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया था कि मध्य प्रदेश में आगामी 16 जुलाई तक केवल 7 हजार 947 मीट्रिक टन मूंग की ही खरीदी की जा सकी है, जो कुल अनुमानित खरीदी का मात्र 2 प्रतिशत है।

केंद्र सरकार ने तब राज्य सरकार से साफ कहा था कि पहले स्वीकृत मात्रा के अनुसार मूंग की पूरी खरीदी की जाए, उसके बाद ही कोटा बढ़ाए जाने के किसी भी नए प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल इस सियासी बयानबाजी और पत्राचार के बीच प्रदेश का किसान पिसने को मजबूर है।

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