दमोह में लंच के दौरान खेलते समय पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबे दो मासूम छात्र, दर्दनाक मौत से पसरा मातम

दमोह के सेमरा गांव में स्कूल के बाहर खेलते समय गहरे गड्ढे में डूबने से दो मासूम छात्रों की मौत हो गई। वहीं ओंकारेश्वर में सेप्टिक टैंक में डूबने से बच्चे की जान गई।

Jul 28, 2026 - 11:34
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दमोह में लंच के दौरान खेलते समय पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबे दो मासूम छात्र, दर्दनाक मौत से पसरा मातम

मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां रजपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेमरा गांव में स्कूल के लंच ब्रेक के दौरान खेलते-खेलते पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।

मृतक बच्चों की पहचान 10 वर्षीय सोनू यादव और 11 वर्षीय भविष्य यादव के रूप में हुई है। ये दोनों मासूम दोपहर के समय अपने स्कूल के ठीक सामने खेल रहे थे, तभी अचानक खेलते-खेलते वे सड़क के पास बने एक खुले और गहरे गड्ढे के करीब जा पहुंचे, जहां पैर फिसलने या गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे पानी में डूब गए। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोनू स्कूल में पांचवीं कक्षा का छात्र था, जबकि भविष्य छठवीं कक्षा में पढ़ाई करता था। इसके अलावा, एक अन्य दर्दनाक घटना में खंडवा जिले के तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में भी एक तीन साल के मासूम की सेप्टिक टैंक में डूबने से जान चली गई।

⚠️ दो साल से खुला पड़ा था मौत का यह गड्ढा, किसी ने नहीं दी सुध

इस हृदयविदारक दुर्घटना की सूचना मिलते ही दोनों मासूम बच्चों के परिवारों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। आनन-फानन में ग्रामीण, परिजन और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद दोनों बच्चों के शवों को पानी से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया।

इस दौरान मृत बच्चों के परिजनों और आक्रोशित ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि स्कूल के ठीक सामने पिछले करीब दो सालों से यह खतरनाक गड्ढा खुदा हुआ था, लेकिन जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों या निर्माणकर्ताओं ने कभी भी इसे भरवाने की जहमत नहीं उठाई, और अंततः इसी लापरवाही की वजह से यह बड़ा हादसा हो गया।

🏗️ निर्माण कार्य और पेट्रोल पंप के लिए खोदा गया था गड्ढा

ग्रामीणों का कहना है कि यहां किसी व्यावसायिक निर्माण कार्य या पेट्रोल पंप के लिए करीब 2 साल पहले यह बड़ा गड्ढा खुदवाया गया था, जिसे काम बंद होने के बाद वैसे ही खुला छोड़ दिया गया। बारिश और अन्य कारणों से इस गड्ढे में 10 फीट से अधिक गहरा पानी भर गया था, जिससे यह स्थल पूरी तरह से एक 'मौत का कुआं' बन चुका था।

स्थानीय लोगों ने कई बार खुदाई करवाने वाले जिम्मेदारों से इसे भरवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन किसी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन या संबंधित एजेंसी द्वारा इस गड्ढे को बंद करवा दिया जाता, तो आज इन दो मासूम बच्चों की असमय जान नहीं जाती।

👀 बच्चों ने डूबते देखा लेकिन कोई बचा नहीं पाया

परिजनों ने रोते हुए बताया कि दोनों बच्चे रोज की तरह सामान्य रूप से स्कूल गए थे। दोपहर करीब 1:30 बजे लंच के समय वे स्कूल परिसर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक खेलते-खेलते दोनों बच्चे पानी से भरे इस गहरे गड्ढे में जा गिरे।

वहां आसपास मौजूद अन्य बच्चों और राहगीरों ने जब उन्हें पानी में डूबते हुए देखा, तो उन्होंने जोर-जोर से शोर मचाकर मदद बुलाई, लेकिन गहराई अधिक होने और पानी भरा होने के कारण कोई भी समय पर आगे बढ़कर उनकी जान नहीं बचा सका।

👮‍♂️ पुलिस जांच शुरू, दोषियों के खिलाफ होगी सख्त वैधानिक कार्रवाई

घटना की सूचना मिलने के बाद रजपुरा थाने की पुलिस दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। एसडीओपी कृष्णपाल सिंह ने घटनास्थल का मुआयना कर पूरी स्थिति की जानकारी ली। थाना प्रभारी शिवनारायण यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यहां किसी पेट्रोल पंप के निर्माण के लिए यह गड्ढा खोदा गया था, जिसे बाद में खुला छोड़ दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर विधिवत जांच शुरू कर दी है और यह स्पष्ट किया है कि इस लापरवाही के लिए जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

🚼 ओंकारेश्वर में खुले सेप्टिक टैंक में डूबा मासूम, निगम अधिकारी सस्पेंड

दूसरी ओर, खंडवा जिले के पवित्र तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में एक खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से तीन साल के एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। मृत बच्चे की पहचान 3 साल के तनुश उसरेठे के रूप में हुई है, जो गत 24 जुलाई को अपने परिवार के साथ घूमने ओंकारेश्वर आया था।

जैसे ही परिवार ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में बस से नीचे उतरा, अंधेरे के कारण बच्चे ने अचानक दौड़ लगा दी और वहां खुले पड़े एक खतरनाक सेप्टिक टैंक में जा गिरा। हालांकि बच्चे के पिता ने तुरंत टैंक से उसे बाहर निकाल लिया था, लेकिन फेफड़ों में गंदा पानी भर जाने के कारण उसकी मौत हो गई। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की जांच के बाद नगर निगम के डिप्टी इंजीनियर सुरेश चंद्र पाटीदार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान इस सेप्टिक टैंक को खुला छोड़ दिया गया था, जो इस मासूम की अकाल मृत्यु का मुख्य कारण बना।

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