ट्रैफिक डायवर्जन बना मुसीबत, कटारा हिल्स से एमपी नगर तक रेंगती नजर आईं गाड़ियां; आम जनता परेशान

मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए निकले किसानों के प्रदर्शन के चलते भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। होशंगाबाद रोड पर 6 घंटे तक लंबा जाम लगा रहा।

Jul 29, 2026 - 10:57
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ट्रैफिक डायवर्जन बना मुसीबत, कटारा हिल्स से एमपी नगर तक रेंगती नजर आईं गाड़ियां; आम जनता परेशान

भोपाल । मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद और खाद वितरण की व्यवस्था में सुधार की प्रमुख मांगों को लेकर मंगलवार को करीब दो हजार किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतरे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आरआरएल तिराहा के पास बैरिकेड्स लगाए, लेकिन इस एक बड़े फैसले के बाद पूरी राजधानी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई, जिसके परिणामस्वरूप शहर के चारों ओर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

🚗 6 घंटे तक होशंगाबाद रोड पर फंसे रहे लोग

दोपहर करीब 3 बजे से शुरू हुई यह परेशानी रात के 10 बजे तक लगातार बनी रही। करीब 6 घंटे तक आम लोग अपने वाहनों के साथ होशंगाबाद रोड सहित शहर के कई अन्य प्रमुख मार्गों पर बुरी तरह फंसे रहे।

इस आंदोलन का सबसे अधिक और बुरा असर होशंगाबाद रोड के किनारे बसी करीब 150 से ज्यादा कॉलोनियों के रहवासियों को भुगतना पड़ा। अपने दफ्तरों से शाम को घर लौट रहे लोग घंटों तक सड़क पर अटके रहे, जबकि कई लोगों को तो अपनी मजबूरी में गाड़ियां गलियों में ही छोड़कर पैदल अपने घरों की ओर जाना पड़ा।

🏥 अस्पतालों के आसपास बनी बेहद संवेदनशील स्थिति

इस भीषण जाम के दौरान सबसे संवेदनशील और चिंताजनक स्थिति नर्मदापुरम रोड पर स्थित विभिन्न बड़े अस्पतालों के आसपास देखने को मिली।

वहां मरीजों के परिजन जरूरी दवाइयां और मेडिकल सामान लेकर अस्पताल पहुंचने के लिए बुरी तरह जूझते रहे, लेकिन हर तरफ लगे इस बेकाबू जाम ने उनकी हर कोशिश और राहत को पूरी तरह नाकाम कर दिया।

🚧 किसानों ने तोड़े बैरिकेड्स और बनाए नए रास्ते

प्रशासन के पास किसानों के इस प्रस्तावित आंदोलन की जानकारी पहले से मौजूद थी। इसके बावजूद ग्यारह मील, मिसरोद और बाग सेवनिया के पास लगाए गए पुलिस के तमाम बैरिकेड्स किसानों के जोश और संख्या के आगे टिक नहीं सके।

किसानों ने एक के बाद एक सभी बैरिकेड्स को रास्ते से हटाते हुए सीधे आरआरएल तिराहा तक अपना रास्ता बना लिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, हालांकि गनीमत यह रही कि पुलिस को कोई बल प्रयोग नहीं करना पड़ा।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब स्थानीय पुलिस और प्रशासन को आंदोलन की पूर्व सूचना थी, तो समय रहते सही रूट डायवर्जन की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई?

🔄 गलत ट्रैफिक डायवर्जन ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत

जैसे ही स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई, पुलिस ने आनन-फानन में यातायात को डायवर्ट करना शुरू किया, लेकिन यह कदम राहत देने के बजाय लोगों के लिए नई आफत बन गया। आरआरएल तिराहे से होशंगाबाद की तरफ जाने वाले वाहनों को एम्स के रास्ते होते हुए बाग सेवनिया, मिसरोद और कटारा हिल्स की ओर मोड़ दिया गया।

इस व्यवस्था के कारण कटारा हिल्स रोड पर करीब पांच किलोमीटर लंबा महा-जाम लग गया। इसके अलावा, मंडीदीप जाने वाले यात्री भी कटारा हिल्स और बंगरसिया के रास्ते डायवर्ट किए गए वाहनों के कारण जगह-जगह फंसे नजर आए।

उधर, एमपी नगर पुलिस स्टेशन से जीजी फ्लाईओवर होते हुए होशंगाबाद रोड जाने वाले मार्ग को अचानक बंद करने से पूरा एमपी नगर व्यावसायिक क्षेत्र भी बुरी तरह से जाम की चपेट में आ गया।

😠 पुलिस की कार्यप्रणाली पर फूटा आम जनता का गुस्सा

इस भारी अव्यवस्था के चलते शहरवासियों में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर खासा आक्रोश और नाराजगी देखने को मिली। आम नागरिकों का कहना है कि शहर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली सिर्फ नाम के लिए बनी हुई है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई भी ठोस और प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आते।

कमिश्नरी के भीतर एक अलग गुप्तचर शाखा (इंटेलिजेंस) होने के बावजूद पुलिस समय रहते जमीनी हालात को भांपने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई, जिसका खामियाजा आखिरकार आम जनता को भुगतना पड़ा।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) बसंत कौल ने बताया कि आरआरएल तिराहे से ट्रैफिक को एम्स के रास्ते डायवर्ट किया गया था, जबकि बाग सेवनिया से शहर की तरफ आने वाले वाहनों की आवाजाही को सामान्य रखा गया था। उन्होंने यह स्वीकार किया कि मंडीदीप की ओर जाने वाले यात्रियों को इस दौरान असुविधा का सामना करना पड़ा। स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के लिए देर शाम तक भारी पुलिस बल तैनात रखा गया था।

🗣️ जनता की जुबानी: जाम का दर्द
  • ''मैं सुबह अपने घर से दफ्तर आया था, लेकिन जब शाम को वापस लौटने लगा तो भीषण जाम मिल गया। मुझे भेल से निकलकर एम्स के रास्ते कटारा हिल्स जाना था, लेकिन इस भयंकर जाम के कारण मैं आगे ही नहीं बढ़ पाया। कमिश्नरी प्रणाली होने के बाद भी कोई उचित इंतजाम नजर नहीं आता।''

  • ''मेरे ससुर जी इस समय अस्पताल में भर्ती हैं, और मुझे उन्हें समय पर जरूरी दवा देने पहुंचना था, लेकिन मेरी कार बीच सड़क पर जाम में फंसकर रह गई। जब प्रशासन को पहले से ही इस आंदोलन का पूरा पता था, तो रूट को समय रहते क्यों नहीं डायवर्ट किया गया?''

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