शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई है। कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और एनसीटीई को नोटिस जारी किया है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के विभिन्न प्रावधानों को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है, और इस संबंध में हाईकोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। 'ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन' की ओर से दायर इस महत्वपूर्ण याचिका में 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE Act) की धारा 23(2) की संवैधानिक वैधता को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है।
📋 निर्धारित अवधि में योग्यता हासिल करने के प्रावधान पर सवाल
याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया है कि उक्त अधिनियम की धारा 23(2) के तहत शिक्षकों को नौकरी या नियुक्ति मिलने के बाद एक निश्चित निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं हासिल करने का जो प्रावधान किया गया है, वह सीधे तौर पर शिक्षकों के मौलिक अधिकारों और उनकी सेवा शर्तों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
⚖️ कोर्ट ने केंद्र, राज्य और एनसीटीई को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
याचिकाकर्ता संगठन ने इस विवादित प्रावधान को चुनौती देते हुए अदालत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को औपचारिक रूप से नोटिस जारी करते हुए इस पूरे मामले पर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
⏳ दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश
अदालत ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को निर्धारित प्रक्रिया शुल्क (Process Fee) जमा करने के निर्देश दिए हैं और साथ ही स्पष्ट किया है कि वे अगले दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने की प्रक्रिया की शुरुआत करें।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद्र घिल्डियाल और अधिवक्ता वरिजा घिल्डियाल ने अदालत में बेहद प्रभावी ढंग से पैरवी की।
📅 अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख मुकर्रर
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से अधिवक्ता अर्नव तिवारी के साथ मिलकर अपना पक्ष रखा। वहीं, मध्य प्रदेश शासन (राज्य सरकार) की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव अदालत में उपस्थित हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी 31 अगस्त की तारीख निर्धारित कर दी है।
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