पन्ना और बांधवगढ़ में तेजी से बढ़ रहे हैं बाघ, महिलाओं की भागीदारी और स्थानीय सहयोग से बचाए जा रहे हैं जंगल

मध्य प्रदेश 'टाइगर स्टेट' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहाँ सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय आजीविका पर आधारित वन संरक्षण मॉडल देश और दुनिया में एक मिसाल बन गया है।

Jul 29, 2026 - 11:00
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पन्ना और बांधवगढ़ में तेजी से बढ़ रहे हैं बाघ, महिलाओं की भागीदारी और स्थानीय सहयोग से बचाए जा रहे हैं जंगल

भोपाल : 'टाइगर स्टेट' के रूप में अपनी खास पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब पूरे देश और दुनिया के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है। यह राज्य अब केवल देश में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या होने के लिए ही नहीं जाना जा रहा है, बल्कि अपने एक अनूठे और प्रभावी 'सामुदायिक भागीदारी पर आधारित वन संरक्षण मॉडल' के लिए भी वैश्विक स्तर पर मशहूर हो रहा है। एक ओर जहां प्रदेश में सर्वाधिक 785 टाइगर्स मौजूद हैं, तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को साथ लेकर जंगलों को बचाने का यह तरीका एक नई इबारत लिख रहा है।

🐅 टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश का अनोखा और सफल मॉडल

हाल ही में आयोजित मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक में टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक और पर्यटन सचिव डॉ. इलैयाराजा टी ने विस्तार से बताया कि कैसे टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश स्थानीय समुदायों की सीधी भागीदारी के साथ जंगलों और वन्यजीवों का संरक्षण कर रहा है।

उन्होंने कहा, ''हमारा मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन संरक्षण के इस पूरे अभियान में स्थानीय समुदायों को प्रमुख रूप से सहभागी बनाया जाए। जब टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीण लोग ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, सफारी संचालन और अन्य व्यावसायिक माध्यमों से अपनी आजीविका प्राप्त करने लगते हैं, तब इन जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करना उनके लिए कोई मजबूरी नहीं बल्कि उनकी अपनी स्वाभाविक जिम्मेदारी और सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है।''

🌳 जंगल के साथ-साथ सामुदायिक विकास का बेहतरीन तालमेल

पर्यटन सचिव डॉ. इलैयाराजा टी ने आगे बताया कि मध्य प्रदेश में वन संरक्षण की प्रक्रिया को स्थानीय आजीविका, महिला सशक्तिकरण, इको-टूरिज्म, ग्रामीण उद्यमिता और पर्यावरण प्रबंधन के साथ खूबसूरती से जोड़ा गया है। इससे एक ऐसा शानदार मॉडल तैयार हुआ है, जिसमें जंगल का दायरा और सामुदायिक विकास दोनों एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बांधवगढ़, कान्हा, सतपुड़ा, पेंच और पन्ना जैसे देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व्स के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासी और आदिवासी अब वन व टाइगर संरक्षण के 'एक्टिव मेंबर' (सक्रिय सदस्य) बन चुके हैं। इससे उन्हें रोजगार के बेहतरीन अवसर मिले हैं, जिसके चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिली है और उनका टाइगर्स तथा जंगलों से भावनात्मक जुड़ाव और अधिक गहरा हो गया है।

जब भी मध्य प्रदेश में बाघों की बात होती है, तो बांधवगढ़ और कान्हा का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन अन्य टाइगर रिजर्व्स में भी बाघों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ रही है। वन विभाग के अमले के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों का सकारात्मक असर यहां साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व इसका सबसे जीवंत और बड़ा उदाहरण है। आज से करीब 17 साल पहले यानी वर्ष 2009 में पन्ना के जंगलों से बाघ पूरी तरह विलुप्त हो चुके थे, लेकिन सामुदायिक भागीदारी, वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रभावी संरक्षण के अथक प्रयासों के दम पर आज यहाँ बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 80 तक पहुँच चुकी है।

📈 बढ़े जंगल, बढ़े टाइगर्स और बढ़ी ग्रामीणों की आमदनी

मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के आधिकारिक आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व्स के आसपास के इलाकों में लगभग 95 रजिस्टर्ड होम-स्टे सफलतापूक चलाए जा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक कान्हा टाइगर रिजर्व के पास 31, बांधवगढ़ में 24, पन्ना में 16, पेंच में 13 और मढ़ई-सतपुड़ा क्षेत्र में 11 होम-स्टे सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।

इन होम-स्टे के जरिए ग्रामीण और स्थानीय समुदायों को बहुत अच्छी खासी कमाई हो रही है, और दूसरी तरफ वन विभाग तथा मध्य प्रदेश के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। टाइगर रिजर्व्स के पास बनाए गए इन होम-स्टे में ठहरने वाले पर्यटक स्थानीय कलाओं जैसे गोंड पेंटिंग, बांस शिल्प और टेराकोटा कला की वस्तुएं सीधे स्थानीय कारीगरों से ही खरीदते हैं। इससे शिल्पकारों को उनकी मेहनत का पूरा और सीधा मुनाफा मिलता है तथा बीच के बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाती है।

👩‍🦰 वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में महिलाओं की निभा रही हैं अहम भूमिका

मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अनुसार, राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की एक अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिल रही है। विशेष तौर पर टाइगर रिजर्व्स के भीतर महिला टूर गाइड और महिला जिप्सी ड्राइवरों की शानदार कार्यशैली को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

महिलाओं के सीधे तौर पर इन साहसिक कार्यों से जुड़ने से जहाँ एक तरफ वन संरक्षण के इस अभियान को एक नई और मजबूत ताकत मिली है, वहीं दूसरी तरफ पर्यटन गतिविधियों से आर्थिक रूप से जुड़कर महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। इस प्रकार, सामुदायिक भागीदारी पर आधारित यह वन संरक्षण मॉडल न केवल टाइगर्स और घने जंगलों को सुरक्षित रख रहा है, बल्कि अवैध शिकार को रोकने, वन्यजीव गलियारों (वाइल्डलाइफ कॉरिडोर) की सुरक्षा करने और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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