सरकारी स्कूल की क्लास में अचानक निकला गोह, बच्चों और शिक्षकों में मची अफरा-तफरी; जर्जर भवन की खुली पोल

अशोकनगर के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में क्लास के बीच गोह निकलने से हड़कंप मच गया। स्कूल की जर्जर हालत और गंदगी को देखकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण किया।

Jul 29, 2026 - 15:07
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सरकारी स्कूल की क्लास में अचानक निकला गोह, बच्चों और शिक्षकों में मची अफरा-तफरी; जर्जर भवन की खुली पोल

अशोकनगर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 में बच्चों की क्लास चल रही थी और अचानक उसी दौरान वहां एक बड़ा गोहेरा (गोयरा या गोह) निकल आया। इस जीव को अचानक सामने देखकर मासूम बच्चे डर के मारे कांप उठे और अपने शिक्षकों के साथ चीखते-पुकारते हुए क्लास छोड़कर बाहर भाग खड़े हुए। गनीमत यह रही कि गोह ने किसी भी बच्चे या शिक्षक पर कोई हमला नहीं किया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद तुरंत एक स्नेक कैचर (सेंप पकड़ने वाले) को बुलवाया गया, जिसकी मदद से बड़ी मशक्कत के बाद उस गोह को पकड़कर बाहर भगाया गया। इस घटना की जानकारी जैसे ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक पहुँची, उसके कुछ ही घंटों के भीतर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) राहुल शर्मा समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर जा पहुंचे, जहाँ उन्होंने स्कूल की बदहाली और चारों तरफ फैले गंदगी के अंबार को देखकर स्कूल के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी नाराजगी जताई और सख्ती बरती।

🏫 पूरी तरह जर्जर हो चुका है स्कूल का भवन और छतें

शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की मौजूदा स्थिति बेहद दयनीय और खतरनाक बनी हुई है। इस स्कूल की कई कक्षाएं पूरी तरह से जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। जिन कमरों में छोटे-छोटे छात्र अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, उन क्लासरूम की छतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि उनका प्लास्टर लगातार नीचे झड़ रहा है।

प्लास्टर उखड़ने के कारण छत के अंदर से लोहे के जंग लगे सरिए पूरी तरह बाहर निकल आए हैं। ऐसे में देश का भविष्य कहे जाने वाले इन मासूम छात्रों की जान हमेशा खतरे में नजर आती है। इसके अलावा, विद्यालय की दूसरी मंजिल के छज्जे भी पूरी तरह से कमजोर और जर्जर हो चुके हैं, जो कभी भी अचानक टूटकर नीचे गिर सकते हैं और किसी बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं।

🚽 गंदगी से अटे पड़े हैं शौचालय, महिला शिक्षकों व छात्राओं को परेशानी

स्कूल परिसर में साफ-सफाई और शौचालयों की उचित व्यवस्था न होने के कारण यहां की महिला शिक्षकों और अध्ययनरत छात्राओं को रोजमर्रा के जीवन में बहुत बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

विद्यालय परिसर में शौचालय तो बने हुए हैं, लेकिन उनकी देखभाल न होने के कारण उनमें इतनी अधिक गंदगी फैली हुई है कि वे उपयोग करने लायक ही नहीं बचे हैं। इसके अलावा, स्कूल भवन के ठीक आसपास बड़ी-बड़ी और घनी घास उग आई है, जिसके कारण आए दिन वहां जहरीले जीव-जंतुओं और सांप-बिच्छुओं का डेरा लगा रहता है।

🧹 स्कूल में नहीं बचा कोई हेल्पर, चपरासी को किया गया है अटैच

नियमों के मुताबिक शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 में शुरू से ही एक चपरासी (हेल्पर) की नियुक्ति की गई थी, लेकिन हाल ही में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) के कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।

इसी वजह से वर्तमान में स्कूल में साफ-सफाई या अन्य कामों के लिए कोई भी हेल्पर मौजूद नहीं है। विडंबना यह है कि इस शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-02 के ठीक पास में ही डीपीसी और बीईओ का मुख्य कार्यालय भी स्थित है, इसके बावजूद इस स्कूल में गंदगी और बदहाली की समस्या लगातार बनी हुई है।

💰 डीपीसी राहुल शर्मा ने दिए कंटीजेंसी राशि से साफ-सफाई कराने के निर्देश

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीसी राहुल शर्मा अपने तकनीकी इंजीनियरों के दल के साथ खुद विद्यालय पहुंचे। वहां पहुँचते ही उन्होंने सबसे पहले स्कूल की प्राध्यापिका रजनी शाक्यवार से स्कूल में मिलने वाली 'कंटीजेंसी राशि' (आकस्मिक निधि) के बारे में पूरी जानकारी ली।

उन्होंने स्कूल प्रबंधन को सलाह दी कि वे इसी कंटीजेंसी राशि का उपयोग करके तत्काल प्रभाव से अस्थाई तौर पर साफ-सफाई के लिए कुछ कर्मचारियों को रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि, ''विद्यालय के रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए लगभग 75 हजार से 1 लाख रुपए तक की राशि मिलती है, जिसे खर्च करके स्कूल परिसर की साफ-सफाई कराई जा सकती है।'' इसके साथ ही, उन्होंने अपने साथ आए इंजीनियरों को निर्देश दिए कि वे तुरंत विद्यालय के जर्जर हिस्सों की मरम्मत के लिए एक नया प्रस्ताव तैयार करें और युद्ध स्तर पर कार्य शुरू करवाएं।

📋 कोर्ट के स्टे के कारण रुकी है बड़ी राशि, प्रस्ताव भेजा गया शासन को

इस संबंध में डीपीसी राहुल शर्मा ने आगे स्पष्ट करते हुए बताया, ''यह विद्यालय पहले 'सीएम राइज' योजना के तहत मर्ज किया जा रहा था, लेकिन बाद में इस पर माननीय न्यायालय (कोर्ट) की तरफ से स्टे (स्थगन आदेश) आ गया, जिसके चलते इस विद्यालय के खाते में कोई विशेष बड़ी राशि नहीं आ पाई है।''

उन्होंने बताया कि स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए पहले भी कई बार उच्चाधिकारियों और शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं। एक बार फिर से नया प्रस्ताव शिक्षण संचालनालय को भेजा जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत का काम पूरा कराया जा सके। इसके अलावा, विद्यालय को पूर्व में जो भी कंटीजेंसी राशि प्राप्त हुई थी, उसके खर्च और उपयोग की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

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