बैगा आदिवासियों में बच्चों की मौत के बाद एक्शन, बालाघाट में 67 नए डॉक्टरों की हुई पदस्थापना

बालाघाट के बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत के बाद 67 नए चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दिए सख्त निर्देश।

Sep 14, 2026 - 11:24
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बैगा आदिवासियों में बच्चों की मौत के बाद एक्शन, बालाघाट में 67 नए डॉक्टरों की हुई पदस्थापना

भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के दुर्गम बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण, खसरा और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के कारण 26 मासूम बच्चों की असामयिक मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से बालाघाट जिले में 67 नए चिकित्सा अधिकारियों (Medical Officers) की पदस्थापना कर दी है, ताकि ग्रामीण और जनजातीय अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा सके।

💉 शत-प्रतिशत टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच के कड़े निर्देश: डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने की समीक्षा

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) राजेंद्र शुक्ल ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की।

समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जिले में शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन कर नियमित स्वास्थ्य जांच की जाए। विशेष रूप से उच्च जोखिम (High-Risk) वाली गर्भवती महिलाओं का लगातार फॉलोअप करने और उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में तुरंत इलाज व सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के आदेश दिए गए हैं।

🏥 संस्थागत प्रसव और डॉक्टरों की मैदानी उपस्थिति पर जोर: लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

उप मुख्यमंत्री ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) सुनिश्चित करने के साथ-साथ जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय रहते अस्पतालों में भर्ती कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुदूर और दुर्गम आदिवासी इलाकों में 'प्रसव प्रतीक्षा गृह' (Birth Waiting Homes) की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने मैदानी स्वास्थ्य अमले और डॉक्टरों को अनिवार्य रूप से अपने पदस्थापना स्थल पर उपस्थित रहने के कड़े निर्देश दिए। शुक्ल ने वरिष्ठ अधिकारियों से खुद क्षेत्रों का दौरा कर स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यप्रणाली की निगरानी करने, टीकाकरण के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने और अति-कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास केंद्र भेजने के निर्देश जारी किए।

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