एम्बुलेंस न मिलने पर प्राइवेट वाहन से पहुंची प्रसूता, तड़पती रही महिला लेकिन स्टाफ ने नहीं ली सुध
छतरपुर जिला अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने पर महिला ने लिफ्ट के बाहर गैलरी में बच्चों को जन्म दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
छतरपुर: मध्य प्रदेश के शासकीय स्वास्थ्य सिस्टम की पोल एक बार फिर छतरपुर जिले में पूरी तरह से खुल गई है। यहाँ एक प्रसूता महिला को अस्पताल पहुँचने से लेकर इलाज मिलने तक भारी संघर्ष करना पड़ा। स्थिति यह रही कि पहले तो प्रसूता को समय पर सरकारी एम्बुलेंस के लिए दर-दर भटकना पड़ा, और जब एम्बुलेंस नहीं मिली तो परिजन उसे किसी तरह एक प्राइवेट गाड़ी से जिला अस्पताल लेकर पहुँचे। लेकिन अस्पताल के भीतर भी हालात इतने बदतर थे कि समय पर कोई डॉक्टर या इलाज नहीं मिला, जिसके बाद दर्द से तड़पती हुई मजबूर महिला को आखिरकार जिला अस्पताल की लिफ्ट के ठीक बाहर गैलरी में ही दो बच्चों को जन्म देना पड़ा। इस अमानवीय घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने जिला अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम की कलई खोल दी है।
🏥 लिफ्ट के बगल में गैलरी में प्रसव कराने को मजबूर हुई महिला
छतरपुर जिला अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की बदहाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर के भीतर एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से लगातार तड़पती रही, पास से कई डॉक्टर और नर्सें गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी उस महिला की सुध लेने की जरा भी जहमत नहीं उठाई।
मजबूरी में प्रसूता को अस्पताल की लिफ्ट के बगल में बनी गैलरी में ही बच्चों को जन्म देना पड़ा। दरअसल, यह पूरा मामला छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रतापपुरा गांव का है। यहाँ अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने से परेशान महिला को पहले तो सरकारी एम्बुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा और काफी परेशान होना पड़ा। जब काफी कोशिशों के बाद भी एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुँची, तो परिजनों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर प्राइवेट गाड़ी से प्रसूता को जिला अस्पताल लाना पड़ा, जहाँ पहुँचने के बाद भी उसे समय पर कोई चिकित्सीय सहायता नहीं मिल सकी।
🗣️ परिजनों के गंभीर आरोप: "डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही से हुई यह घटना"
महिला के रिश्तेदार और परिजन रोहित अवस्थी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, ''अस्पताल के लापरवाह स्टाफ के कारण ही प्रसूता महिला अरुण यादव (पत्नी बाबू लाल यादव) को अस्पताल की लिफ्ट के पास बनी आम गैलरी में ही बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा।''
उन्होंने बताया कि वे लोग बहुत उम्मीद के साथ मरीज को निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुँचे थे। अस्पताल के अंदर पहुँचने के बाद वे डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की तलाश में यहाँ-वहाँ भटकते रहे, लेकिन समय पर किसी ने भी उनकी कोई सहायता नहीं की। प्रसूता की हालत बेहद गंभीर थी, इसके बावजूद उसे तुरंत न तो कोई वार्ड दिया गया और न ही कोई बेड उपलब्ध कराया गया। महिला लगातार दर्द से कराह रही थी और परिजन पूरी तरह असहाय थे, और तभी देखते ही देखते महिला का प्रसव लिफ्ट के पास ही हो गया।
📢 हंगामे के बाद जागा प्रशासन, सिविल सर्जन ने दी सफाई
इस अमानवीय घटना के ठीक बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर के भीतर ही जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और अस्पताल प्रबंधन तथा ड्यूटी पर तैनात स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अचानक हुए इस हंगामे को देखकर अस्पताल प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद आनन-फानन में प्रसूता और नवजात शिशुओं को तुरंत वार्ड में भर्ती कराकर उनका उपचार शुरू किया गया। इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए छतरपुर जिला हॉस्पिटल में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने मीडिया से कहा, ''प्रसूता महिला अस्पताल आई हुई थी और दुर्भाग्यवश गैलरी में ही डिलीवरी हो गई। मरीजों को नीचे से ऊपर वार्ड तक जाने में थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन अस्पताल के इस पूरे सिस्टम में सुधार किया जा रहा है।''
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