कमानिया और मछरहाई क्षेत्र में लगातार ढह रही हैं पुरानी इमारतें, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर के मछरहाई इलाके में 50 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिर गया। हादसे से ठीक पहले 7 मजदूर बाहर निकल आए थे, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

Jul 29, 2026 - 17:42
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कमानिया और मछरहाई क्षेत्र में लगातार ढह रही हैं पुरानी इमारतें, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर : शहर के घनी आबादी वाले मछरहाई इलाके में बुधवार को उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब करीब 50 साल पुराना एक दो मंजिला मकान देखते ही देखते भरभराकर जमीन पर धराशायी हो गया। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह भयानक हादसा हुआ, उस समय मकान के भीतर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। इस बड़े हादसे से कुछ ही समय पहले मकान के अंदर रिपेयरिंग (मरम्मत) का काम कर रहे सभी 7 मजदूर समझदारी दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकल आए थे, क्योंकि मजदूरों को पहले ही इस बात का आभास हो गया था कि यह जर्जर इमारत कभी भी गिर सकती है।

🏚️ जर्जर और खाली मकान में चल रहा था रिपेयरिंग का काम

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी संजय जैन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, ''यह मकान यतीश जैन नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। कुछ दिनों पहले ही यतीश जैन का निधन हो गया था, जिसके बाद से यह मकान पूरी तरह से खाली पड़ा हुआ था। उनके रिश्तेदारों की ओर से इस खाली मकान में मरम्मत और रिपेयरिंग का काम कराया जा रहा था।''

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मकान के दोनों तरफ से रास्ते (सड़क) थे और इसके भूतल (नीचे) पर दुकानें भी बनी हुई थीं। मकान काफी ज्यादा पुराना होने के कारण इसकी संरचना अंदर से बेहद कमजोर और जर्जर हो चुकी थी। रिपेयरिंग कार्य के दौरान ही वहां काम कर रहे मजदूरों को इस इमारत के किसी भी वक्त ढह जाने का अंदेशा हो गया था।

👷‍♂️ मजदूरों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, सभी सुरक्षित

इस पूरी घटना की जानकारी देते हुए मकान में रिपेयरिंग का काम कर रहे मजदूर दौलतराम ने बताया, ''कामकाज के दौरान इमारत की दयनीय स्थिति को देखकर ऐसा साफ लग रहा था कि यह कभी भी नीचे आ सकती है। इसी खतरे को भांपते हुए सभी मजदूरों ने आपसी सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते मकान से बाहर निकलने का सही फैसला किया।''

उन्होंने बताया कि जिस वक्त मकान गिरा, उससे कुछ ही मिनट पहले तक 7 मजदूर इस इमारत के भीतर काम में जुटे हुए थे। गनीमत यह रही कि समय रहते सब बाहर आ गए, जिससे सभी मजदूर पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस भीषण हादसे में किसी को भी खरोंচ तक नहीं आई है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँच गई। थाने के प्रधान आरक्षक राजेंद्र सिलावट ने बताया, ''जब मकान गिरा, उस समय इमारत के अंदर कोई नहीं था। हादसे के तुरंत बाद नगर निगम और बिजली कंपनी को इसकी सूचना दी गई, क्योंकि मकान गिरने के मलबे से बिजली के कई तार भी टूटकर नीचे गिर गए थे। करंट फैलने के खतरे को भांपते हुए पुलिस ने तुरंत ऐतिहात के तौर पर मकान के दोनों तरफ सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) बना दिया है।''

🏗️ कमानिया और आसपास के इलाकों में लगातार गिर रहीं पुरानी इमारतें

भले ही जबलपुर शहर में इस समय बहुत अधिक या मूसलाधार बारिश नहीं हो रही है, लेकिन इसके बावजूद कमानिया और उसके आसपास के पुराने इलाकों में जर्जर और पुरानी इमारतों के गिरने का सिलसिला लगातार जारी है।

मछरहाई में यह दो मंजिला मकान गिरने से ठीक पहले कमानिया गेट के ठीक सामने एक अन्य 5 मंजिला पुरानी इमारत भी इसी तरह भरभराकर जमींदोज हो चुकी है। इसके अलावा, इस घटना से महज दो दिन पहले कोतवाली थाने के ठीक पास भी एक पुरानी इमारत अचानक गिर गई थी।

सबसे अच्छी बात यह रही कि अब तक हुए इन सभी हादसों में किसी भी तरह की कोई जनहानि (जान-माल का नुकसान) नहीं हुई है। हालांकि, लगातार गिर रही इन पुरानी इमारतों ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि कमानिया और उससे लगे हुए क्षेत्र जबलपुर शहर के सबसे पुराने ऐतिहासिक हिस्सों में गिने जाते हैं।

🕰️ 100 साल से ज्यादा पुरानी हैं इस इलाके की कई इमारतें

विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे पुराने इलाके में कई मकान और इमारतें तो ऐसी हैं जो 100 साल से भी अधिक पुरानी हैं। इनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण उस दौर में हुआ था जब आधुनिक निर्माण तकनीक, इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता था।

इस घनी आबादी वाले इलाके की एक और सबसे बड़ी और गंभीर समस्या यह है कि यहाँ ज्यादातर पुरानी इमारतें एक-दूसरे से बिल्कुल सटी हुई हैं। ऐसे में यदि इनमें से कोई एक भी कमजोर इमारत अचानक गिरती है या ढहती है, तो उसके आसपास की अन्य पुरानी इमारतों पर भी खतरा कई गुना और अधिक बढ़ जाता है।

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