कन्हरगांव और कांगला समेत कई जलाशयों का हाल बेहाल, आने वाले दिनों में पेयजल संकट के मंडरा रहे हैं खतरे
छिंदवाड़ा में कम बारिश के चलते 67 स्टॉप डैम और जलाशयों का जलस्तर शून्य पर पहुंच गया है। इससे आने वाले समय में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
छिन्दवाड़ा : रुक-रुक कर हो रही छिटपुट बारिश ने एक तरफ जहाँ अन्नदाता किसानों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ आने वाले समय में शहर और गांवों के लिए भीषण पेयजल संकट का खतरा भी खड़ा हो सकता है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में करीब 67 छोटे स्टॉप डैम ऐसे हैं, जिनमें पानी अभी 'लो सिल्ट लेवल' (LSL) तक भी नहीं भर पाया है। लो सिल्ट लेवल डैम में उस न्यूनतम स्तर को कहा जाता है, जिसके नीचे केवल मिट्टी, बालू या कीचड़ ही बचता है। ऐसे में इस स्तर तक भी पानी का न पहुँचना आने वाले दिनों में पानी के विकराल संकट की स्पष्ट चेतावनी दे रहा है।
🌧️ छिंदवाड़ा में अब तक हुई केवल 40 फीसदी बारिश, जलाशयों का हाल बेहाल
जिले में अब तक कुल मिलाकर 420 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो जिले की कुल औसत वर्षा का महज लगभग 40 प्रतिशत ही है। इस कम बारिश का सीधा और बुरा असर छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले के तमाम छोटे-बड़े जलाशयों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
दोनों जिलों के कुल 147 जलाशयों या स्टॉप डैमों में से 67 ऐसे हैं, जिनका जल स्तर पूरी तरह से एलएसएल (लो सिल्ट लेवल) यानी शून्य पर पहुँच चुका है। इसके अलावा 60 से अधिक डैम ऐसे हैं, जिनमें अब तक बमुश्किल 25 फीसदी तक ही पानी पहुँच पाया है। इससे अधिक भरने वाले डैमों की संख्या तो केवल सिंगल डिजिट में सिमट कर रह गई है, जबकि कुल 4 बड़े बांध ही 50 प्रतिशत तक भर पाए हैं। मानसून के सीजन का डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, और अब बाकी बचे दिनों में अच्छी और झमाझम बारिश की सख्त दरकार है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आगामी रबी फसल के सीजन के साथ-साथ पीने के पानी के लिए भी गंभीर संकट की स्थिति बन सकती है।
🏞️ छिंदवाड़ा और मोहखेड़ ब्लॉक के तालाबों और डैमों की स्थिति सबसे खराब
छिंदवाड़ा और मोहखेड़ क्षेत्र के तालाबों में पानी की सबसे अधिक कमी देखी जा रही है, जिसके चलते छिंदवाड़ा अभी भी पानी की समस्या से लगातार जूझ रहा है। थांवड़ी डैम को छोड़कर बाकी के 15 स्टॉप डैम अब भी एलएसएल के स्तर से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं।
मोहखेड़ के 18 तालाबों की स्थिति भी कमोवेश ऐसी ही बनी हुई है, जहाँ अब तक हुई कम बारिश का पानी जलाशयों तक नहीं पहुँच सका है। हालांकि, चौरई ब्लॉक का सीताझिर डैम जरूर 61 प्रतिशत तक भर चुका है, लेकिन यहाँ के बाकी तालाबों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
⚠️ पीने के पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों का घटता स्तर बना चिंता का विषय
जल संसाधन विभाग की कार्यपालन यंत्री कुमकुम कौरव पटेल ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, ''मोहखेड़ के कन्हरगांव जलाशय से छिंदवाड़ा नगर निगम शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए 7 एमसीएम (MCM) पानी लेता है, लेकिन वर्तमान में यह जलाशय मात्र 9 प्रतिशत ही भर पाया है। ऐसे में यहाँ भारी बारिश की बहुत आवश्यकता है।''
उन्होंने आगे बताया कि पांढुर्णा का जुनेवानी जलाशय पांढुर्णा शहर को साल भर में 2.63 एमसीएम पेयजल देता है, जो अब तक की बारिश में 73 फीसदी तक भर चुका है। वहीं, कांगला जलाशय से दमुआ नगर को पानी मिलता है, जहाँ कुल 0.668 एमसीएम पानी आरक्षित है, लेकिन डैम अभी केवल 19 फीसदी ही भरा है, जिससे कुल 0.29 एमसीएम पानी ही इकट्ठा हो पाया है।
कार्यपालन यंत्री ने यह भी जानकारी दी कि अमरवाड़ा नगर में जलापूर्ति करने वाले तवा और हरनभटा जलाशय की हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि सकरवाड़ा जलाशय 62 फीसदी भर चुका है, लेकिन हर्रई नगर को पेयजल सप्लाई करने वाले हर्रई जलाशय का गिरता जल स्तर भी भविष्य के लिए गहरी चिंता का विषय बन सकता है, जहाँ से कुल 1.37 एमसीएम पानी शहर में सप्लाई किया जाता है।
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