उज्जैन में सावन महीने की शुरुआत, महाकाल मंदिर के पट तड़के 3 बजे खुले; उमड़ा भक्तों का जनसैलाब
उज्जैन में सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। महाकाल मंदिर में पहले दिन भस्म आरती और दिव्य श्रृंगार के साथ भक्तों का तांता लगा हुआ है।
उज्जैन: पवित्र श्रावण महीने की शुरुआत आज 30 जुलाई गुरुवार से हो गई है। श्रावण माह के इस पहले ही दिन धर्मनगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के धाम के पट तड़के 3 बजे पूरी भव्यता के साथ खोले गए, जिसके बाद भगवान के पूजन और पारंपरिक भस्म आरती का पावन क्रम शुरू हुआ। सावन के पहले ही दिन दर्शन के लिए देश-विदेश से पहुँचे भक्तों का भारी जनसैलाब श्री महाकाल मंदिर में उमड़ना शुरू हो गया। मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले भगवान वीरभद्र, चांदी द्वार, मानभद्र, नंदी, गणेश जी सहित पूरे शिव परिवार और भगवान के सभी गणों का विधिवत पूजन संपन्न हुआ।
🌸 बाबा महाकाल का हुआ अलौकिक और दिव्य श्रृंगार
मंदिर में नियमित रूप से आने वाले दर्शनार्थियों ने 'हरि ॐ जल' से भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात कपूर आरती उतारी गई और पुजारी-पुरोहितों द्वारा षोडशोपचार पंचाभिषेक कर भव्य भस्म आरती संपन्न कराई गई।
इसके बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन, सुंदर पुष्पों और सूखे मेवे से मनमोहक श्रृंगार किया गया। भगवान ने दिव्य रजत मुकुट, मुंडमाला, नाग, चंद्रमा, त्रिशूल और विभिन्न आभूषण धारण कर सभी श्रद्धालुओं को अपने इस अलौकिक रूप में दर्शन लाभ दिए। समूचे मंदिर परिसर में लगातार 'ॐ नमः शिवाय' और 'जय श्री महाकाल' की गूंज गूँजती रही। करीब 2 घंटे तक चली भस्म आरती के बाद भगवान को मिष्ठान और अन्य व्यंजनों का महाभोग लगाया गया।
🚶♂️ सुचारू रूप से शुरू हुआ सामान्य दर्शन का सिलसिला
सुबह लगभग 5:30 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए सामान्य दर्शन का क्रम शुरू हो गया, जो अब देर शाम शयन आरती तक अनवरत जारी रहेगा। हालांकि, भस्म आरती के दौरान जिन दर्शनार्थियों की बुकिंग ऑनलाइन या ऑफलाइन नहीं हो पाई थी, उनके लिए चलित दर्शन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चालू रखी गई।
विशेष परंपरा के अनुसार, इस पूरे श्रावण और भादौ महीने में अब प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इन विशेष दिनों में भक्त उपवास रखेंगे और सबसे खास बात यह रहेगी कि सोमवार के दिन भगवान महाकाल के धाम के कपाट आम दिनों से आधे घंटे पहले यानी तड़के 2:30 बजे ही खोल दिए जाएंगे।
🌿 शिव भक्ति में अन्न-जल का त्याग कर कठिन संकल्प लेते हैं भक्त
मंदिर के पुजारी महेश पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया, ''भगवान महाकाल का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्पना से भी परे है। आज सावन के पहले दिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया है। उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है, और यह पूरा महीना देवाधिदेव महादेव का ही है।''
उन्होंने आगे बताया कि भक्त अपना तन, मन और धन सब कुछ न्योछावर करने के लिए बाबा महाकाल की सेवा में खिंचे चले आते हैं। इस दौरान श्रद्धालु बेहद कठिन संकल्प लेते हैं; कई भक्त पूरे महीने अन्न और जल का त्याग कर देते हैं, चप्पल पहनना छोड़ देते हैं और कठोर तप, तपस्या व पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा सवा लाख बेलपत्र भगवान को अर्पित करना, हजारों लीटर दूध से अभिषेक करना और पार्थिव शिवलिंग की पूजा जैसे कई कठिन संकल्प भक्त लेते हैं और उन्हें पूरा करते हैं। जो लोग किन्हीं कारणों से ऐसे कठिन संकल्प नहीं ले पाते, वे यदि सावन महीने के नियमित अनुष्ठान और दर्शन कर लें, तो उन्हें भी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
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