सागर की बेटी अंजलि चौरसिया बनीं नेशनल चेस ऑर्बिटर, सीमित संसाधनों से तय किया राष्ट्रीय खिलाड़ी तक का सफर
सागर की अंजलि चौरसिया ने संघर्षों को पार कर राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी और सीनियर नेशनल ऑर्बिटर बनने का गौरव हासिल किया है। अब वे अन्य बेटियों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं।
सागर : कभी अपने घर में मां और भाई को शतरंज (Chess) की जटिल चालें चलते देख उत्सुक रहने वाली अंजलि चौरसिया आज शह और मात के इस बौद्धिक खेल की जानी-मानी राष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुकी हैं। इतना ही नहीं, अब वे केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सीनियर नेशनल ऑर्बिटर (निर्णायक) की महत्वपूर्ण भूमिका भी सफलतापूर्वक निभा रही हैं। अंजलि की यह संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक यात्रा यह पूरी तरह साबित करती है कि यदि किसी की प्रतिभा को सही दिशा और मार्गदर्शन मिल जाए, तो अभाव या संसाधनों की कमी कभी भी रास्ते की रुकावट नहीं बनती। सीमित संसाधनों के बीच रहकर भी बड़े सपने देखने वाली तमाम बेटियों के लिए आज अंजलि चौरसिया एक आदर्श (रोल मॉडल) बन चुकी हैं।
♟️ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में दिखाया अपने खेल का हुनर
राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचकर शानदार तरीके से चेस खेलने वाली अंजलि चौरसिया की इस अद्भुत प्रतिभा को 'लक्ष्य प्रोजेक्ट' ने और अधिक निखारने का काम किया। स्कूल स्तर से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं तक में उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया।
इसी के दम पर उन्होंने महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय की तरफ से खेलते हुए दो बार अंतर-विश्वविद्यालयीन (Inter-University) शतरंज प्रतियोगिताओं में अपनी यूनिवर्सिटी का शानदार प्रतिनिधित्व किया। अपनी बेहतरीन रणनीतिक सोच और खेल के दौरान गजब के संयम के दम पर वे आज मध्य प्रदेश की सबसे उभरती हुई और प्रतिभाशाली महिला शतरंज खिलाड़ियों में शुमार हो चुकी हैं।
🏆 खिलाड़ी से लेकर राष्ट्रीय स्तर की शतरंज प्रतियोगिता में ऑर्बिटर बनीं अंजलि
वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में आयोजित 51वीं वूमेन नेशनल शतरंज चैंपियनशिप में अंजलि ने मध्य प्रदेश की पूरी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवाया। इसके बाद झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 39वीं जूनियर वूमेन नेशनल शतरंज स्पर्धा में भी उन्होंने राज्य की तरफ से खेलते हुए राष्ट्रीय स्तर का एक बेहद महत्वपूर्ण और यादगार अनुभव प्राप्त किया।
एक खिलाड़ी के रूप में ढेरों उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी अंजलि यहीं नहीं रुकीं; उन्होंने आगे बढ़कर 'सीनियर नेशनल ऑर्बिटर' की कठिन परीक्षा को सफलताપवूर्क उत्तीर्ण किया। अब वर्तमान स्थिति यह है कि वे देश भर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की बड़ी शतरंज प्रतियोगिताओं में एक जिम्मेदार ऑर्बिटर (रेफरी/निर्णायक) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
👨👩👧 परिवार बना सबसे बड़ी ताकत, गांव की बेटियों को दे रही हैं मुफ्त ट्रेनिंग
अंजलि की इस शानदार सफलता के पीछे उनके परिवार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। घर के अंदर पहले से ही शतरंज का एक सकारात्मक माहौल होने की वजह से उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही। उनकी अपनी बहन अमृता चौरसिया भी एक राष्ट्रीय स्तर की बेहतरीन शतरंज खिलाड़ी हैं।
इन दोनों बहनों ने अपनी कड़ी मेहनत और प्रदर्शन से यह साबित कर दिखाया है कि यदि परिवार का पूरा प्रोत्साहन और साथ मिले, तो ग्रामीण परिवेश में पलने-बढ़ने वाली बेटियां भी देश के बड़े से बड़े मंचों पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।
अपनी इन तमाम उपलब्धियों को केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रखने के बजाय, अंजलि आज के समय में अपने गांव की अन्य जरूरतमंद बेटियों को बिल्कुल निःशुल्क शतरंज का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक बेटियों को इस बौद्धिक खेल से जोड़ना और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाकर आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ाना है। वे अपनी इस पूरी सफलता का पूरा श्रेय समन्वय मंच, प्रोजेक्ट लक्ष्य और अपने मार्गदर्शक प्रशिक्षक जफर खान को देती हैं।
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