हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के सभी फाइनल रिजल्ट अदालत में तलब
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विवादों पर हाईकोर्ट ने सभी फाइनल रिजल्ट तलब किए हैं और मामलों के निपटारे के लिए नई रणनीति बनाई है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की बहुप्रतीक्षित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई वर्षों पुराने और जटिल विवादों पर आखिरकार हाईकोर्ट की तरफ से एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने पिछले विभिन्न वर्षों में आयोजित हुई चयन प्रक्रियाओं के सभी फाइनल रिजल्ट्स को सीधे अदालत में तलब कर लिया है। अदालत ने आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन सभी चयन परिणामों को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विकास शर्मा के समक्ष तुरंत प्रस्तुत किया जाए।
📑 सालों से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए हाईकोर्ट की विशेष रणनीति
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अनगिनत याचिकाओं के अंबार और लंबे समय से पेंडिंग पड़े मामलों का तेजी से और पारदर्शी तरीके से निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट ने एक बेहद खास और व्यवस्थित रणनीति तैयार की है। कोर्ट ने इन सभी लंबित याचिकाओं को मुख्य रूप से 5 अलग-अलग श्रेणियों (कैटैगरी) में बांटकर इनकी सुनवाई करने की योजना बनाई है, जो इस प्रकार हैं:
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जनभागीदारी अतिथि विद्वानों का विवाद
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संबद्ध विषय (Subject Relevance) की योग्यता से जुड़े मामले
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न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्तें
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अर्हकारी (Qualifying) परीक्षा से जुड़ी शर्तें
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आयु सीमा में छूट से जुड़े विभिन्न मामले
इसके अलावा, चयन प्रक्रिया से बाहर हो चुके या किन्हीं कारणों से वंचित रहे अभ्यर्थियों की तमाम याचिकाओं को एक अलग श्रेणी में रखकर उन पर भी पृथक से सुनवाई की जाएगी।
👥 जनभागीदारी विद्वानों की प्रमुख मांग और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान जनभागीदारी के तहत कार्य कर रहे गेस्ट फैकल्टी (अतिथि विद्वानों) ने मुख्य रूप से 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने और आयु सीमा में 10 साल की विशेष छूट दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों का मुख्य तर्क यह है कि जब वे अन्य नियमित शिक्षकों के समान ही शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और समान रूप से कार्य भी कर रहे हैं, तो उन्हें इन जरूरी लाभों से वंचित रखना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। अपनी इन दलीलों को मजबूती देने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बेहद चर्चित और ऐतिहासिक 'मनीष गुप्ता मामले' के फैसले का हवाला भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
↩️ सुनवाई के दौरान दो याचिकाएं औपचारिक रूप से वापस ली गईं
मामले की आज हुई सुनवाई के दौरान माननीय कोर्ट ने दो याचिकाकर्ताओं को अपनी-अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति भी प्रदान कर दी। अब जैसे ही मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा सभी संबंधित परिणाम अदालत में जमा करा दिए जाएंगे, वैसे ही इन सभी पांचों श्रेणियों के मामलों पर सिलसिलेवार और तीव्र गति से सुनवाई शुरू कर दी जाएगी।
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