50 मीटर FTL दायरे में अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं, प्रशासन को तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
भोज वेटलैंड और कलियासोत डैम क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक भोज वेटलैंड के साथ-साथ कलियासोत और केरवा डैम क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध अतिक्रमणों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधिकरण ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि जल स्रोतों के 50 मीटर एफटीएल (FTL - फुल टैंक लेवल) के दायरे में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या कब्जा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खास बात यह है कि एनजीटी ने इस बार जिला प्रशासन, एसडीएम और तहसीलदार की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए आगामी तीन सप्ताह के भीतर सख्त कार्रवाई का शपथ पत्र सहित एक विस्तृत प्रतिवेदन (रिपोर्ट) पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
📐 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई
मामले की पैरवी करने वाले एडवोकेट हर्षवर्धन तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''बीते 29 जुलाई 2026 को पारित एक महत्वपूर्ण आदेश में एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने भोज वेटलैंड के संरक्षण से जुड़े कुल चार मामलों की एक साथ संयुक्त सुनवाई की।''
इस सुनवाई के दौरान अदालत को यह अवगत कराया गया कि सात अलग-अलग गांवों में कराए गए सर्वे के दौरान 50 मीटर एफटीएल के दायरे में कुल 117 अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 68 अतिक्रमण सरकारी (शासकीय) भूमि पर हैं, जबकि 49 अतिक्रमण निजी जमीनों पर पाए गए हैं। प्रशासन द्वारा अब तक इनमें से 45 अतिक्रमणों को पूरी तरह से हटा दिया गया है, जबकि शेष 72 स्थानों पर हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है।
🌿 वेटलैंड संरक्षण को लेकर एनजीटी के कड़े और स्पष्ट निर्देश
एनजीटी ने सुनवाई के दौरान यह बात पूरी तरह साफ कर दी है कि यह मामला केवल कागजी तौर पर अतिक्रमण हटाने भर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर वेटलैंड (आर्द्रभूमि) नियमों के कड़ाई से पालन, तालाबों का वैज्ञानिक सीमांकन (Demarcation), तालाबों में गिरने वाले गंदे और अनुपचारित (Untreated) पानी के प्रवाह को रोकने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने से जुड़ा हुआ है।
इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने केरवा और कलियासोत डैम सहित बड़े तालाब की वैज्ञानिक सीमा तय करने, कृषि क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण पाने तथा प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन क्षेत्र के संरक्षण के संबंध में भी विशेष निर्देश दिए हैं।
⚖️ प्रशासनिक अधिकारियों की तय की गई व्यक्तिगत जवाबदेही
एनजीटी ने संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिए हैं कि वे एफटीएल क्षेत्र, वेटलैंड के नियमों और मास्टर प्लान का खुला उल्लंघन करके खड़े किए गए सभी अवैध निर्माणों की एक स्पष्ट सूची तैयार करें और नियमानुसार उन पर बुलडोजर चलाएं।
इसके अलावा भोपाल कलेक्टर को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस निगरानी समिति में शामिल करें, ताकि मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस बल या सुरक्षा की कोई कमी बाधा न बन सके।
🛑 पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली अवैध गतिविधियों पर भी सख्ती
सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से न्यायाधिकरण को यह भी जानकारी दी गई कि वेटलैंड और कैचमेंट क्षेत्र में अवैध रूप से 'मड रैली' और खतरनाक वाहन रेसिंग करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस थानों में एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है।
इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी भी लगाई गई है। एनजीटी ने सभी पक्षों को सुनते हुए तीन सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करने के निर्देश दिए हैं और इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 31 अगस्त 2026 तय की है।
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