सऊदी अरब ने 14 देशों के नए समुद्री गठबंधन का किया ऐलान, लाल सागर में सुरक्षा होगी मजबूत

लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए सऊदी अरब ने 14 देशों के गठबंधन का ऐलान किया है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद अहम है।

Jul 31, 2026 - 18:16
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सऊदी अरब ने 14 देशों के नए समुद्री गठबंधन का किया ऐलान, लाल सागर में सुरक्षा होगी मजबूत

लाल सागर, बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और अदन की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को पूरी तरह मजबूत करने के लिए सऊदी अरब ने 14 देशों के एक नए गठबंधन का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस नए गठबंधन का मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले इन समुद्री मार्गों पर नेविगेशन की सुगमता को सुनिश्चित करना और आपसी समुद्री सुरक्षा सहयोग को अधिक मजबूत करना होगा।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी अपने एक बयान में स्पष्ट किया कि यह गठबंधन सामूहिक समुद्री रक्षा सहयोग के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा। इसमें शामिल सभी देश इन रणनीतिक समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने और वैश्विक व्यापार को किसी भी प्रकार की बाधा से बचाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।

🛡️ सऊदी अरब ने क्यों किया 14 देशों के इस नए गठबंधन का ऐलान?

यह बड़ा कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर केंद्रित हो गया है। इस रास्ते से दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, लेकिन अब इसके लगभग बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है। हाल ही में तनाव के और अधिक बढ़ने के साथ ही, यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी के मार्ग पर जहाजों पर बार-बार हमले किए हैं।

इस गठबंधन के गठन को लेकर आयोजित की गई उच्चस्तरीय बैठक में कुल 51 देशों को आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया था, जिसमें से 43 देशों ने इसमें हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की, कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन, मिस्र, पाकिस्तान, जिबूती, सोमालिया, बांग्लादेश, यमन, सूडान और कोमोरोस जैसे देश इस गठबंधन का हिस्सा बन चुके हैं या इसके सदस्य बनने जा रहे हैं। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान ने फिलहाल इस गठबंधन में शामिल होने के लिए हामी नहीं भरी है।

🤝 खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त ऑपरेशन पर रहेगा जोर

सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस गठबंधन के सदस्य देश आपसी समुद्री खतरों से निपटने के लिए एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा करेंगे, संयुक्त सैन्य ऑपरेशन चलाएंगे और नियमित रूप से सैन्य अभ्यास भी करेंगे। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन पूरी तरह से रक्षात्मक (Defensive) है और इसका उद्देश्य किसी भी विशेष देश को निशाना बनाना बिल्कुल नहीं है।

🇴मान और UAE ने इस गठबंधन से क्यों बनाई दूरी?
  • ओमान का रुख: ओमान लंबे समय से अपनी तटस्थ (Neutral) विदेश नीति के लिए जाना जाता है। वह अक्सर क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और उसके ईरान तथा सऊदी अरब दोनों के साथ बेहद अच्छे संबंध हैं। यमन संघर्ष के दौरान भी ओमान ने हमेशा बातचीत और शांति प्रयासों पर ही जोर दिया है।

  • UAE का रुख: संयुक्त अरब अमीरात पहले से ही अमेरिका, फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। वह सऊदी के नेतृत्व वाले नए सैन्य ढांचे की बजाय अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर ही भरोसा बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, सऊदी और UAE के बीच कुछ रणनीतिक मतभेद भी इसके पीछे की अहम वजहों में से एक हैं।

🌊 बाब अल-मंदेब स्ट्रेट रणनीतिक रूप से इतना अहम क्यों है?

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से आपस में जोड़ता है। दुनिया का करीब 10 से 12 प्रतिशत समुद्री व्यापार और हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल इसी प्रमुख मार्ग से होकर गुजरता है।

यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 29 किलोमीटर चौड़ा है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या छोटी सी रुकावट भी वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई से लेकर तेल और एलएनजी (LNG) की कीमतों पर सीधा असर डाल सकती है।

🛢️ सऊदी अरब के लिए यह रास्ता क्यों है अत्यंत महत्वपूर्ण?

होर्मुज स्ट्रेट में लगातार बढ़ते तनाव के बाद अब सऊदी अरब अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' के जरिए सीधे लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक तेल पहुँचा रहा है। इसके बाद तेल के वैश्विक निर्यात के लिए जहाजों को बाब अल-मंदेब से होकर ही आगे जाना पड़ता है। लेकिन अब जिस तरह से हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है, उसने सऊदी प्रशासन की चिंताएं और अधिक बढ़ा दी हैं।

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