अवमानना मामले में IAS विवेक पोरवाल और संदीप जीआर को हाईकोर्ट का समन, 21 सितंबर को होना होगा पेश

जबलपुर हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर 2 आईएएस अधिकारियों विवेक पोरवाल और संदीप जीआर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। पढ़ें पूरा मामला।

Sep 15, 2026 - 10:47
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अवमानना मामले में IAS विवेक पोरवाल और संदीप जीआर को हाईकोर्ट का समन, 21 सितंबर को होना होगा पेश

जबलपुर। न्यायालय के आदेश का समय पर पालन न करने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायधीश न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने राज्य के तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को आगामी 21 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश कराने के निर्देश जारी किए हैं।

अदालत ने जारी जमानती वारंट की तामीली की सीधी जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपी है। यह पूरा मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सेक्शन ऑफिसर शीला सेन के नियमितीकरण (Regularization) के दावे से जुड़ा हुआ है।

📜 90 दिनों में निराकरण का था स्पष्ट आदेश: समय-सीमा बीतने पर दायर हुई अवमानना याचिका

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में 19 मार्च 2025 को राज्य शासन और सागर कलेक्टर को याचिकाकर्ता शीला सेन के नियमितीकरण संबंधी दावे का 90 दिनों की भीतर वैधानिक निराकरण करने का स्पष्ट आदेश दिया था।

निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद जब हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तब याचिकाकर्ता शीला सेन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कविता गुप्ता ने मजबूती से पक्ष रखा।

🏛️ प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति पर टिप्पणी: हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोनों जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस की तामीली होने के बावजूद अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

रिकॉर्ड के अनुसार, सागर कलेक्टर ने 3 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट रजिस्ट्री को एक पत्र भेजकर केवल तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की सूचना दी थी, लेकिन न तो कोर्ट में शासकीय अधिवक्ता नियुक्त किया गया और न ही आदेश की अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की गई।

हाईकोर्ट ने इस पूरी कार्यप्रणाली को प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति करार देते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की और दोनों अधिकारियों की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश सुनाया।

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