426% तक का रिटर्न! इनवेस्को, एडेलवाइस से लेकर निप्पॉन तक, देखें 10 साल की पूरी लिस्ट

पिछले 10 वर्षों में 20 मिडकैप म्यूचुअल फंड्स ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। इनवेस्को, एडेलवाइस और निप्पॉन इंडिया जैसे फंड्स की 10 साल की पूरी परफॉर्मेंस लिस्ट देखें।

Sep 14, 2026 - 16:46
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426% तक का रिटर्न! इनवेस्को, एडेलवाइस से लेकर निप्पॉन तक, देखें 10 साल की पूरी लिस्ट

20 मिडकैप म्यूचुअल फंड, 20 मल्टीबैगर! पिछले एक दशक में 10 साल का लगातार ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाली मिडकैप स्कीमों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले फंड ने भी लगभग 238% का एब्सोल्यूट रिटर्न दिया है, जबकि सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली स्कीम में 426% की भारी बढ़त देखने को मिली है।

इस पूरी कैटेगरी का 10 साल का औसत रिटर्न 324% रहा है, यानी इसमें लगाया गया हर ₹1 लाख औसतन ₹4.24 लाख बन चुका है। यही वजह है कि मिडकैप फंड्स भारतीय इक्विटी मार्केट में वेल्थ क्रिएशन (धन सृजन) के लिए सबसे भरोसेमंद सेक्टर के रूप में उभरे हैं।

🏆 इनवेस्को, एडेलवाइस और निप्पॉन सबसे आगे: 10 साल में 9 फंड्स ने दिया 350% से अधिक रिटर्न

426% के एब्सोल्यूट रिटर्न के साथ ‘इनवेस्को इंडिया मिडकैप फंड’ (Invesco India Midcap Fund) इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इसके बाद ‘एडेलवाइस मिडकैप फंड’ (409%) और ‘निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड’ (403%) का स्थान आता है।

कैटेगरी की 20 में से 9 स्कीमों ने 350% से ज्यादा का रिटर्न दिया है, जबकि 11 स्कीमों ने 300% से अधिक का रिटर्न डिलीवर किया है। दूसरी ओर, 10 साल के ग्रुप में सबसे नीचे पायदान पर रहने वाले ‘आदित्य बिड़ला सन लाइफ मिडकैप फंड’ ने भी 238% का शानदार रिटर्न दिया है।

‘एसबीआई मिडकैप फंड’ ने 247%, ‘यूटीआई मिड कैप फंड’ ने 250% और ‘डीएसपी मिडकैप फंड’ ने 255% का रिटर्न दिया है। 10 साल में 238% का रिटर्न सालाना आधार पर लगभग 13% CAGR के बराबर है, जबकि 426% का रिटर्न लगभग 18% CAGR के बराबर बैठता है। कैटेगरी का औसत 324% रिटर्न सालाना लगभग 15.5% की दर से बढ़ा है। यह अंतर सालाना आधार पर भले छोटा दिखे, लेकिन एक दशक में यह वेल्थ में बड़ा अंतर पैदा करता है: ₹1 लाख का निवेश सबसे कम रिटर्न वाली स्कीम में ₹3.38 लाख बना, वहीं टॉप स्कीम में बढ़कर ₹5.26 लाख हो गया।

फाइंडॉक ग्रुप के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर हेमंत सूद ईटी (ET) की रिपोर्ट में मिडकैप कैटेगरी के इस असाधारण प्रदर्शन का श्रेय तीन मुख्य कारणों को देते हैं: कंपनियों की अर्निंग्स में ग्रोथ (Earnings Growth), वैल्यूएशन री-रेटिंग (Valuation Re-rating) और निवेशकों का लगातार आता इनफ्लो।

📊 बीते 10 साल में 20 मिडकैप फंड्स की परफॉर्मेंस (लिस्ट)
मिडकैप फंड का नाम 10 साल का रिटर्न (%) ₹1 लाख का निवेश अब कितना बना?
इनवेस्को इंडिया मिडकैप फंड 426% ₹5.26 लाख
एडेलवाइस मिड कैप फंड 409% ₹5.09 लाख
निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिड कैप फंड 403% ₹5.03 लाख
क्वांट मिड कैप फंड 375% ₹4.75 लाख
एचएसबीसी मिडकैप फंड 373% ₹4.73 लाख
कोटक मिड कैप फंड 369% ₹4.69 लाख
एचडीएफसी मिड कैप फंड 369% ₹4.69 लाख
एक्सिस मिडकैप फंड 357% ₹4.57 लाख
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मिड कैप फंड 350% ₹4.50 लाख
मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड 350% ₹4.50 लाख
टाटा मिड कैप फंड 321% ₹4.21 लाख
पीजीआईएम इंडिया मिडकैप फंड 296% ₹3.96 लाख
बड़ौदा बीएनपी पारिबा मिड कैप फंड 295% ₹3.95 लाख
टॉरस मिड कैप फंड 271% ₹3.71 लाख
सुंदरम मिड कैप फंड 270% ₹3.70 लाख
फ्रैंकलिन इंडिया मिड कैप फंड 259% ₹3.59 लाख
डीएसपी मिडकैप फंड 255% ₹3.55 लाख
यूटीआई मिड कैप फंड 250% ₹3.50 लाख
एसबीआई मिडकैप फंड 247% ₹3.47 लाख
आदित्य बिड़ला सन लाइफ मिडकैप फंड 238% ₹3.38 लाख
💡 क्यों और कैसे मिला मिडकैप्स को यह बड़ा फायदा?

मिडकैप कंपनियां भारत की कॉर्पोरेट लाइफसाइकिल के सबसे फायदेमंद चरण में आती हैं। इस सेगमेंट की कई कंपनियां पहले ही ऐसे स्तर पर पहुंच चुकी हैं जहां उनका बिजनेस मॉडल स्मॉलकैप्स की तुलना में अधिक मजबूत होता है, साथ ही लार्जकैप्स की तुलना में उनके पास तेजी से बढ़ने की अपार संभावनाएं होती हैं।

हेमंत सूद के अनुसार, पिछले दशक में इस सेगमेंट को भारतीय अर्थव्यवस्था के फॉर्मलाइजेशन, कैपेक्स और मैन्युफैक्चरिंग साइकिल, पीएलआई (PLI) स्कीमों और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बेहतर होने से ऑपरेटिंग लेवरेज का बड़ा फायदा मिला। इसके अलावा, बढ़ती वैल्यूएशन ने भी रिटर्न को बढ़ावा दिया, यानी इन्वेस्टर्स मिडकैप कंपनियों की प्रति ₹1 अर्निंग के लिए ज्यादा प्रीमियम देने को तैयार रहे।

🚀 'दोनों दुनिया का सबसे अच्छा मिश्रण': क्या कहते हैं बाजार के दिग्गज?

बजाज कैपिटल के रिसर्च हेड सौविक बिस्वास भी इस स्ट्रक्चरल फायदे को स्वीकार करते हैं। मिडकैप कंपनियां पहले से स्थापित हैं और लगातार विस्तार कर रही हैं, जिससे अर्निंग्स मोमेंटम बना रहता है। स्मॉलकैप कैटेगरी से तेजी से ग्रो करने वाली कंपनियों का समय-समय पर इसमें अपग्रेड होना नए अवसर पैदा करता है। यह संयोजन ग्रोथ, वैल्यू, मोमेंटम और कॉन्ट्रा जैसी विविध स्ट्रेटेजी अपनाने वाले फंड मैनेजरों को आकर्षित करता है, जिससे लिक्विडिटी बनी रहती है।

ZFunds के सह-संस्थापक और सीईओ मनीष कोठारी का कहना है कि मिडकैप्स निवेशकों को "दोनों दुनिया का सबसे बेहतरीन अनुभव" (Best of both worlds) देते हैं—जिसमें लार्जकैप जैसी बिजनेस मजबूती और स्मॉलकैप जैसी तेज ग्रोथ क्षमता शामिल है। अर्निंग्स ग्रोथ और वैल्यूएशन री-रेटिंग का यह डबल इंजन इस सेगमेंट को मजबूती दे रहा है।

⚠️ क्या अगले 10 साल में दोहराया जा सकेगा यही शानदार रिटर्न? जानिए एक्सपर्ट्स की चेतावनी

क्या मिडकैप फंड्स अगले दशक में भी यही 15.5% का औसत रिटर्न दोहरा पाएंगे? बाजार विशेषज्ञों की राय थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह देती है।

हेमंत सूद सलाह देते हैं कि पिछले 10 साल के 15.5% CAGR रिटर्न को भविष्य का स्थायी पैमाना न माना जाए। चूंकि मौजूदा वैल्यूएशन पहले से ही काफी हाई (महंगे) हैं, इसलिए री-रेटिंग का जो फायदा पिछले दशक में मिला था, उसे दोहराना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, जैसे-जैसे फंड्स का एसेट साइज (AUM) बढ़ता है, बड़े मिडकैप फंड्स के लिए शेयरों की खरीद-बिक्री में लिक्विडिटी की चुनौतियां आती हैं। भविष्य में रिटर्न मुख्य रूप से वास्तविक अर्निंग्स ग्रोथ पर निर्भर करेंगे, और बेस्ट व वर्स्ट फंड्स के बीच का अंतर और बढ़ सकता है।

सौविक बिस्वास के अनुसार, हाई वैल्यूएशन और वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) दो सबसे बड़े जोखिम हैं। नए निवेशकों को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग में 15%+ के बजाय 10% से 12% सालाना रिटर्न (CAGR) का ही यथार्थवादी अनुमान लगाकर आगे बढ़ना चाहिए।

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