स्पेन के स्यूटा शहर में हजारों प्रवासियों की अवैध घुसपैठ, नेशनल इमरजेंसी की मांग से मचा हड़कंप
स्पेन के स्वायत्त शहर स्यूटा में हजारों प्रवासियों के दाखिल होने से बड़ा माइग्रेशन संकट खड़ा हो गया है। स्थिति से निपटने के लिए स्पेन सरकार ने सेना तैनात कर दी है।
यूरोप एक बार फिर से एक बहुत बड़े माइग्रेशन संकट (Migration Crisis) का सामना कर रहा है। उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन के स्वायत्त शहर स्यूटा (Ceuta) में मोरक्को की ओर से हजारों प्रवासी अचानक समुद्र और सीमा के कड़े अवरोधों को पार करके यूरोपीय संघ (EU) की सीमा में दाखिल हो गए हैं। अचानक हुई इस भारी घुसपैठ की वजह से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके चलते स्यूटा प्रशासन ने मैड्रिड से देश में नेशनल इमरजेंसी घोषित करने की पुरजोर मांग कर दी है।
वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेन की सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सेना, सिविल गार्ड और अतिरिक्त पुलिस बलों को सीमा पर तैनात कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि सीमा के हालात इस वक्त पूरी तरह असाधारण हैं और कानून-व्यवस्था को दोबारा बहाल करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की सख्त जरूरत है। इस बीच, स्पेन और मोरक्को के बीच कूटनीतिक बातचीत लगातार जारी है और दोनों देशों ने अवैध रूप से सीमा पार करके पहुंचे प्रवासियों की शीघ्र वापसी के लिए आपसी समन्वय और सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
🌍 मोरक्को से सटी स्पेन की यह छोटी सी और संवेदनशील सीमा
स्यूटा स्पेन का वह छोटा-सा और बेहद अहम इलाका है जो भौगोलिक रूप से यूरोप में नहीं बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में मोरक्को की सीमा से सटा हुआ है। यह यूरोपीय संघ की अफ्रीका महाद्वीप से लगने वाली एकमात्र स्थलीय सीमा (Land Border) है। यही एक मुख्य वजह है कि यह क्षेत्र वर्षों से यूरोप में प्रवेश करने का सपना देखने वाले अवैध प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों का सबसे प्रमुख और पसंदीदा रास्ता बना हुआ है।
इस ताजा संकट ने यूरोपीय राजनीति को भी पूरी तरह गरमा दिया है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कड़ा बयान देते हुए कहा है कि अनियंत्रित और अवैध प्रवासन यूरोप की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक सीधा और गंभीर खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इटली इस मुद्दे पर अपनी स्थिति से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ने पर स्पेन के साथ 'शेंगेन व्यवस्था' (Schengen Area) को अस्थायी रूप से निलंबित करने जैसे असाधारण कदमों पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल शेंगेन व्यवस्था को निलंबित नहीं किया गया है; यह मुख्य रूप से इटली की ओर से दी गई एक कड़ी राजनीतिक चेतावनी है।
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यूरोप की मौजूदा आव्रजन (Immigration) नीतियों की जमकर आलोचना की है। व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर यूरोपीय देशों को अब गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।
🚨 यूरोपीय संघ और अमेरिका के लिए क्यों चिंता का बड़ा विषय बना यह संकट?
यह पूरा संकट केवल स्पेन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चूंकि स्यूटा यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा का एक संवेदनशील हिस्सा है, इसलिए यहाँ पैदा हुई इस स्थिति का सीधा असर पूरे यूरोप की सीमा सुरक्षा, शरणार्थी नीति और शेंगेन मुक्त आवाजाही समझौते पर पड़ सकता है। यही मुख्य वजह है कि यह मुद्दा अब यूरोप की आंतरिक सुरक्षा और महाद्वीप की राजनीति के सबसे बड़े और संवेदनशील विषयों में शामिल हो गया है।
सोशल मीडिया पर हालांकि दसियों हजार प्रवासियों के सीमा पार करने के दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। स्पेनिश अधिकारियों और देश-विदेश के विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने फिलहाल हजारों प्रवासियों के ही स्यूटा पहुँचने की आधिकारिक पुष्टि की है।
स्यूटा के राष्ट्रपति जुआन जीसस विवास ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्तमान हालात वर्ष 2021 जैसे भयानक संकट की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले एक हफ्ते के भीतर ही करीब 1,500 लोग इस रास्ते से यहाँ पहुँच चुके हैं और रोजाना लगभग 300 नए लोग लगातार आ रहे हैं। स्थिति यह है कि केवल नाबालिग प्रवासियों के रहने के लिए बनाए गए केंद्र अपनी क्षमता के 2,400% तक पूरी तरह भर चुके हैं, जिसके कारण कई बेघर लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
📜 वर्ष 2021 में भी सिर्फ 2 दिनों में आ गए थे 8 हजार लोग
मई 2021 में भी ऐसा ही एक बड़ा वाकया सामने आया था जब मोरक्को की तरफ से मात्र 2 दिनों के भीतर 8 हजार से अधिक लोग अवैध रूप से स्यूटा पहुँच गए थे। उस समय भी सीमा प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। वर्तमान समय में उपजा यह ताजा संकट उसी पुरानी और भयावह घटना की पुनरावृत्ति माना जा रहा है।
यह मामला केवल अवैध प्रवासन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप भी लेता जा रहा है। इस ताज़ा संकट के दौरान समुद्र पार करने की कोशिश में कम से कम 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। वहीं, स्थानीय प्रशासन का यह भी कहना है कि इस साल अब तक इस खतरनाक समुद्री मार्ग को पार करने के प्रयास में करीब 60 बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है।
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